Bukhari likely to announce support to congress
जामा मस्जिद के शाही इमाम 34 साल बाद फिर मुसलमानों से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को समर्थन देने की अपील करेंगे। जुमे की नमाज के बाद उनकी अपील की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। 1980 के लोकसभा चुनाव के दौरान मौजूदा शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी के पिता स्वर्गीय अब्दुला बुखारी ने इंदिरा गांधी को वोट देने की अपील की थी। दो दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद ही शाही इमाम के कांग्रेस के साथ जाने का रास्ता साफ हो गया था।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार जुमे की नमाज के बाद कांग्रेस को समर्थन की अपील के साथ ही शाही इमाम इस पर मुस्लिम समुदाय के भीतर और बाहर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब भी देंगे। चुनाव के लिए बनाई गई 11 सदस्यीय कमेटी इन सवालों के जवाब को अंतिम रूप देने में जुटी है।
दरअसल, शाही इमाम के भाई याह्यंा बुखारी कांग्रेस के साथ जाने का मुखर विरोध कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इससे बेफिक्र शाही इमाम शुक्रवार को जामा मसजिद से कांग्रेस के समर्थन का एलान करेंगे।
इस दौरान वह समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधेंगे। खासतौर से नरेंद्र मोदी और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के बीच पक रही खिचड़ी पर भी प्रहार करेंगे कि गुजरात की तरह ही मुजफ्फरनगर में भी दंगे इसी मिलीभगत का परिणाम हैं। दो साल पहले विधानसभा चुनाव में सपा का समर्थन करने वाले शाही इमाम मुजफ्फरनगर दंगे के बाद से ही अखिलेश सरकार के खिलाफ बयान देते रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शाही इमाम के सहारे कांग्रेस मतदान से ठीक पहले खासतौर पर दिल्ली और उत्तर प्रदेश में मुसलमानों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है। 2009 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सातों और उत्तर प्रदेश में 21 सीटें जीतने में कांग्रेस को मिले मुसलमानों के समर्थन को अहम माना जाता है। लेकिन, दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के दयनीय प्रदर्शन के बाद भाजपा को रोकने के लिए मुसलमानों के आप के साथ जाने का खतरा बढ़ गया था। साथ ही उत्तर प्रदेश में सपा को सबक सिखाने के लिए मुसलमानों के बसपा के पक्ष में जाने की आशंका थी।
वैसे शाही इमाम की अपील के बाद मुसलमान कांग्रेस को कितना समर्थन करते हैं, इसका पता तो चुनाव नतीजे आने पर ही चलेगा।
सबसे बड़ी सांप्रदायिक पार्टी कांग्रेस : याह्या बुखारी
नई दिल्ली [राज्य ब्यूरो]। इस लोकसभा चुनाव ने जामा मस्जिद के शाही इमाम के परिवार में दूरियां बढ़ा दी हैं। जहां शाही इमाम मौलाना सैयद अहमद बुखारी कांग्रेस के साथ खड़े नजर आ रहे हैं, वहीं उनके छोटे भाई याह्यंा बुखारी ने कांग्रेस को सबसे बड़ी सांप्रदायिक पार्टी करार दिया है। बकौल याह्यंा, 'मुसलमान कहते हैं कि भाजपा सांप्रदायिक पार्टी है लेकिन वे सामने से हमला करते हैं जबकि कांग्रेस पीछे से वार करती है।'
गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में याह्यंा ने कहा कि कांग्रेस भरोसे के काबिल नहीं है। यदि मुस्लिमों ने कांग्रेस को वोट दिया तो उन्हें पछताना पड़ेगा। इंदिरा गांधी के समय में फिर भी राजनीति में सच्चे और ईमानदार लोग शामिल थे। जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम के अध्यख याह्या ने बुखारी के सोनिया गांधी से मिलने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जामा मस्जिद के शाही इमाम की यह परंपरा रही है कि वह किसी को समर्थन देने के लिए उसके पास नहीं जाता है।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार जुमे की नमाज के बाद कांग्रेस को समर्थन की अपील के साथ ही शाही इमाम इस पर मुस्लिम समुदाय के भीतर और बाहर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब भी देंगे। चुनाव के लिए बनाई गई 11 सदस्यीय कमेटी इन सवालों के जवाब को अंतिम रूप देने में जुटी है।
दरअसल, शाही इमाम के भाई याह्यंा बुखारी कांग्रेस के साथ जाने का मुखर विरोध कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इससे बेफिक्र शाही इमाम शुक्रवार को जामा मसजिद से कांग्रेस के समर्थन का एलान करेंगे।
इस दौरान वह समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधेंगे। खासतौर से नरेंद्र मोदी और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के बीच पक रही खिचड़ी पर भी प्रहार करेंगे कि गुजरात की तरह ही मुजफ्फरनगर में भी दंगे इसी मिलीभगत का परिणाम हैं। दो साल पहले विधानसभा चुनाव में सपा का समर्थन करने वाले शाही इमाम मुजफ्फरनगर दंगे के बाद से ही अखिलेश सरकार के खिलाफ बयान देते रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शाही इमाम के सहारे कांग्रेस मतदान से ठीक पहले खासतौर पर दिल्ली और उत्तर प्रदेश में मुसलमानों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है। 2009 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सातों और उत्तर प्रदेश में 21 सीटें जीतने में कांग्रेस को मिले मुसलमानों के समर्थन को अहम माना जाता है। लेकिन, दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के दयनीय प्रदर्शन के बाद भाजपा को रोकने के लिए मुसलमानों के आप के साथ जाने का खतरा बढ़ गया था। साथ ही उत्तर प्रदेश में सपा को सबक सिखाने के लिए मुसलमानों के बसपा के पक्ष में जाने की आशंका थी।
वैसे शाही इमाम की अपील के बाद मुसलमान कांग्रेस को कितना समर्थन करते हैं, इसका पता तो चुनाव नतीजे आने पर ही चलेगा।
सबसे बड़ी सांप्रदायिक पार्टी कांग्रेस : याह्या बुखारी
नई दिल्ली [राज्य ब्यूरो]। इस लोकसभा चुनाव ने जामा मस्जिद के शाही इमाम के परिवार में दूरियां बढ़ा दी हैं। जहां शाही इमाम मौलाना सैयद अहमद बुखारी कांग्रेस के साथ खड़े नजर आ रहे हैं, वहीं उनके छोटे भाई याह्यंा बुखारी ने कांग्रेस को सबसे बड़ी सांप्रदायिक पार्टी करार दिया है। बकौल याह्यंा, 'मुसलमान कहते हैं कि भाजपा सांप्रदायिक पार्टी है लेकिन वे सामने से हमला करते हैं जबकि कांग्रेस पीछे से वार करती है।'
गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में याह्यंा ने कहा कि कांग्रेस भरोसे के काबिल नहीं है। यदि मुस्लिमों ने कांग्रेस को वोट दिया तो उन्हें पछताना पड़ेगा। इंदिरा गांधी के समय में फिर भी राजनीति में सच्चे और ईमानदार लोग शामिल थे। जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम के अध्यख याह्या ने बुखारी के सोनिया गांधी से मिलने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जामा मस्जिद के शाही इमाम की यह परंपरा रही है कि वह किसी को समर्थन देने के लिए उसके पास नहीं जाता है।
Source: Lok Sabha Elections 2014
Labels: Lok Sabha Elections 2014 Candidates, Lok Sabha Elections 2014 Prediction, Lok Sabha Elections Political Leaders, Lok Sabha Elections Political Parties
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