Thursday, April 3, 2014

Hema malinis path is not easy in mathura

अदाकारी भले ही उनकी पहचान रही लेकिन यह अंदाज खास सियासी है। भाजपा का परचम लिए मथुरा की सड़कों पर निकलीं हेमा मालिनी को अपनी चुनौतियों का एहसास है। इसीलिए उनका हर कदम सुनियोजित सा नजर आता है। गुरुवार की सुबह मथुरा के अपने होटल से निकलीं तो सीधे वृंदावन स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रकल्प केशव धाम में थीं। यहां थे आरएसएस, विहिप और भाजपा के पदाधिकारी। बैठक में अपनी मंशा जाहिर करते हेमा मालिनी को देर न लगी। पूरे अधिकार के साथ अपने चुनाव का सारा दारोमदार उनको सौंप दिया जो भाजपा से पहले टिकट मांग रहे थे। यह उनके सियासी कौशल की बानगी थी।

चुनावी नजरिए से अहम सियासी कौशल की एक बानगी और देखने को मिलती है। आत्मविश्वास से भरे स्वर में कार्यकर्ताओं से कहती हैं-'मुझे सभी वरिष्ठ नेताओं के घर जाना है।' यह टिकट से वंचित नेताओं के मन की कड़वाहट दूर करने की उनकी पहल है। फिर हेमामालिनी टिकट के प्रबल दावेदार रहे एसके शर्मा के घर गई और उनसे सहयोग मांगा। दोपहर बाद जब वह अपने होटल लौटीं, तब गांव-देहात से आए बहुत से लोग मिलना चाह रहे थे। कुछ की मुलाकात हुई और कुछ इंतजार करते रह गए। हेमा ने वादा किया कि वह अहम बैठक के लिए दिल्ली जा रही हैं, लेकिन जब दोबारा आएंगी तब स्थायी रूप से रहेंगी। सबसे मुलाकात होगी।

66 साल की उम्र में भी युवाओं में लोकप्रिय सिने तारिका हेमा मालिनी की हसरतें मथुरा में आसमान छू रही हैं। उनके भाजपा उम्मीदवार होने से यहां के समीकरण बदले हैं और कान्हा की भूमि पर सियासी समर रोमांचक हो गया है। हेमा संगठन को महत्व देकर अपनी मंजिल पाना चाहती हैं। उनके पहले दौरे ने यह साफ संकेत दे दिया है।

वैसे मथुरा में भाजपा के सहयोग से पिछली बार मैदान मार चुके राष्ट्रीय लोकदल के जयंत चौधरी इस बार कांग्रेस की साझीदारी में विजयश्री दोहराने की जंग लड़ रहे हैं। सपा ने चंदन सिंह और बसपा ने योगेश द्विवेदी को मैदान में उतारकर लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है। लेकिन लोगों की दिलचस्पी इस बात में है कि हेमामालिनी इस लड़ाई में किस तरह आगे बढ़ती हैं।

सभी मेरे देवर हैं..

मथुरा संसदीय क्षेत्र जाट बहुल है। 2002 के विधानसभा चुनाव में हेमा मालिनी भाजपा उम्मीदवार श्याम सिंह अहेरिया का प्रचार करने आई थीं। सौंख में उनकी सभा लगी थी। हेमा के मंच पर कुछ जाट युवक चढ़ गए तो पुलिस ने डंडे चलाने शुरू कर दिए। हेमा ने पुलिस वालों को रोकते हुए कहा कि सभी मेरे देवर हैं, इन पर लाठी न चलाओ। उनके इस अंदाजे बयां का असर इतना हुआ कि अहेरिया चुनाव जीत गए।

हेमा की जीत को अलग से काम करेगा संघ

वृंदावन [जासं]। कान्हा की नगरी में कमल दल का परचम लहराने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) और आनुषांगिक संगठन सक्रिय हो गए हैं। गुरुवार प्रात: वृंदावन के केशवधाम में आरएसएस और संगठनों के पदाधिकारियों के साथ भाजपा प्रत्याशी हेमा मालिनी की बंद कमरे में वार्ता चली। वार्ता में नामांकन से लेकर वोटिंग वाले दिन तक की रणनीति पर मंथन चलता रहा। हालांकि पदाधिकारी बैठक को परिचयात्मक नाम दे रहे हैं।

गुरुवार सुबह लगभग 11 बजे केशवधाम में संघ के पदाधिकारी पहुंच गए। इसके बाद प्रत्याशी हेमा मालिनी पहुंची। सूत्रों के मुताबिक इस मुलाकात को गोपनीय रखा गया था। बंद कमरे में हुई वार्ता हेमा मालिनी ने पूछा कि चुनाव में हिंदूवादी संगठन की उनसे क्या-क्या अपेक्षाएं हैं? बकौल हेमा, वह संसदीय क्षेत्र में रैली, रोड शो और सभाएं करेंगी और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता शहर-देहात के गली मुहल्लों में वोटरों के पास जाएं। कोशिश यह हो कि मतदान वाले दिन वोटरों को घरों से निकालकर मतदेय केंद्र तक ले जाया जाए। बैठक में चुनावी रणनीति के साथ संघ परिवार और भाजपा की भूमिका स्पष्ट की गई। बैठक में शामिल रहे नेताओं के अनुसार, संघ परिवार भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट डलवाने के लिए रणनीति तैयार कर रहा है। भाजपा के समानांतर हिंदूवादी संगठनों की पूरी टीम तैयार की जा रही है। यहां तक कि पोलिंग एजेंट भी संघ परिवार से जुड़े लोग बनाये जा सकते हैं। बैठक में भारतीय जनता पार्टी के भी तीन अहम पदाधिकारी शामिल थे। चुनाव के दौरान भाजपा के समानांतर संघ के कार्यकर्ता-पदाधिकारियों की डयूटी भी विधानसभा क्षेत्रवार लगायी जायेगी। ये पार्टी के असंतुष्टों पर भी निगाह रखेंगे।

गौरतलब है कि भाजपा संगठन और लोकसभा उम्मीदवार को पार्टी आलाकमान ने यह हिदायत दी है कि वे आरएसएस की रणनीति का पालन चुनाव के दौरान करें। बैठक में आरएसएस के प्रांत प्रचारक दिनेश समेत कई पदाधिकारी मौजूद थे।

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