Friday, April 4, 2014

This time amethi raebareli big challenge for priyanka gandhi

बाद अमेठी में मुकाबला रोचक हो गया है। यहां पहले से सक्रिय आम आदमी पार्टी के कुमार विश्वास ने जनता के बीच पहचान बना ली है। ऐसे में देश भर में चल रहे पार्टी के चुनाव अभियान की निगरानी और समन्वय कर रही प्रियंका की अमेठी और रायबरेली में कड़ी परीक्षा होनी तय है।

गांधी परिवार का गढ़ बन चुके अमेठी और रायबरेली की जिम्मेदारी पिछले कई चुनावों से प्रियंका वाड्रा के जिम्मे रही है। प्रियंका के प्रबंधन के बूते ही पार्टी अध्यक्ष और राहुल गांधी देश भर में पार्टी कर प्रचार करते हैं। इस बार हालात अलग हैं। दस साल से सत्ता में रही कांग्रेस पार्टी सत्ता विरोधी रुझान से मुकाबिल है। भाजपा मोदी लहर पर सवार है। ऐसे में अपना ज्यादातर समय राहुल गांधी के आवास स्थित कार्यालय से चुनाव संचालन में दे रहीं प्रियंका के चुनावी कौशल की परीक्षा का भी है।

पार्टी की चुनावी रणनीति, राहुल के चुनावी दौरे, प्रत्याशियों के चयन, मीडिया मैनेजमेंट से लेकर ब्रांड राहुल के तौर पर पार्टी उपाध्यक्ष की छवि निखारने में अहम भूमिका निभा रहीं प्रियंका के लिए इस बार रायबरेली और अमेठी की चुनौती बड़ी है। व्यस्तता के चलते मां सोनिया गांधी के नामांकन में प्रियंका भले ही न आ पाई हों, लेकिन सूत्रों के मुताबिक प्रियंका जल्द ही रायबरेली आएंगी और यहीं से चुनाव का संचालन करेंगी। पार्टी यहां एक हाईटेक कार्यालय स्थापित करने की तैयारी में है। यहां से प्रियंका न सिर्फ अपनी मां और भाई के चुनावों को मैनेज करेंगी बल्कि देश भर में चल रहे कांग्रेस के चुनावी अभियान की निगरानी करेंगी।

गांधी परिवार के करीबी कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने प्रियंका की सक्रिय भूमिका के बारे में पूछे जाने पर दार्शनिक अंदाज में संगठन के कामकाज में उनकी बढ़ी भूमिका को स्पष्ट कर दिया।

लहर पर होती रही है रायबरेली की जनता सवार

आजादी के बाद से ही रायबरेली और अमेठी कांग्रेस के गढ़ रहे हैं, लेकिन रायबरेली की जनता लहर पर सवार हाने के लिए भी जानी जाती है। जनता लहर में यहां से जनता पार्टी के राजनारायण ने जी दर्ज की तो 1996 और 1998 की रामलहर में रायबरेली भाजपा के साथ हो ली। उस समय यहां से भाजपा उम्मीदवार अशोक सिंह ने जीत दर्ज की थी। 1977 की हार से नाराज इंदिरा ने अस्सी की बड़ी जीत के बावजूद रायबरेली को छोड़ आंध्र की मेढक सीट को चुना। हालांकि उपचुनाव में कांग्रेस के ही अरुण नेहरू जीते। इसी तरह अमेठी भी कांग्रेस का मजबूत किला रहा है। देश की चौथी लोकसभा में कांग्रेस के विद्याधर वाजपेयी के साथ कांग्रेसी रंग में रंगी अमेठी में 1977 के चुनावों में जनता पार्टी के रविंद्र प्रताप सिंह और बारहवीं लोकसभा के चुनावों में भाजपा के संजय सिंह ने जीत दर्ज की थी। तेरहवीं लोकसभा में यहां से सोनिया ने जीत दर्ज की। बाद में वो रायबरेली चली गई और यह सीट राहुल के खाते में आ गई।

कोट्स::-

'जहां तक मुझे जानकारी है, राजनीति में प्रियंका की रुचि बहुत कम आयु से ही थी। राजनीतिक घटनाओं को वे आरंभ से ही समझना चाहती थीं। प्रियंका की भूमिका के संबंध में 1990 में राजीव जी ने मुझसे कुछ कहा था। अभी बस इतना ही।'

जर्नादन द्विवेदी, कांग्रेस महासचिव

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