Friday, April 4, 2014

Behind chanduon planted spies per second are news leader

चंदुओं की भरमार से चर्चा में आई छत्तीसगढ़ की महासमुंद लोकसभा सीट पूरे राज्य के लिए जिज्ञासा का विषय बन गई है। सबसे ज्यादा चिंता में भाजपा है। क्योंकि सभी दस चंदूलाल भाजपा प्रत्याशी चंदूलाल साहू के हमनाम हैं। नुकसान से बचने के लिए भाजपा सत्ता व संगठन के नेताओं ने चंदूओं के पीछे जासूस लगा रखे हैं। चौबीस घंटे जासूसों की निगरानी में चुनाव प्रचार अभियान चल रहा है।

बताया जा रहा है कि आरएसएस से जुड़े एक एनजीओ के युवाओं की फौज पूरे लोकसभा क्षेत्र में फैली हुई है। वहीं भाजपा उम्मीदवार के मोबाइल से लेकर वाहन आदि की मानीटरिंग इसी एनजीओ के जिम्मे है। निर्दलीय चंदुओं की भी कथित तौर पर निगरानी हो रही है। राजनीतिक दांव-पेंच में माहिर और खरीद-फरोख्त के लिए राजनीति में आरोपों से घिरे एक कांग्रेस नेता की गतिविधियों पर सबकी नजर है।

घर बैठ गए ज्यादातर चंदू

ज्यादातर 'चंदू" नामांकन दाखिल करने के बाद घर बैठ गए हैं। कोई भी चुनाव प्रचार नहीं कर रहा है। वहीं नामांकन दाखिले के साथ संलग्न ज्यादातर शपथ पत्र में एक ही व्यक्ति की हैंडराइटिंग, निर्दलीय चंदुओं द्वारा जमा कराई गई प्रतिभूति राशि के नोटों में कथित तौर पर एक ही सीरिज और नंबर का मिलान होना, शपथ पत्र में आधी-अधूरी जानकारी और सभी कालमों में 'शून्य" लिखे होने से ऐसी आशंका जाहिर की जा रही है कि इन चंदुओं ने नामांकन दाखिल नहीं किया है। बल्कि, किसी प्रभावशाली व्यक्ति ने इन्हें चुनाव मैदान में उतारा है।

गरीबी की रेखा से नीचे हैं निर्दलीय चंदू

चुनाव मैदान में उतरे 10 निर्दलीय 'चंदू" में से ज्यादातर का नाम गरीबी रेखा से नीचे है। सूत्रों का कहना है कि जिन बड़े नेताओं ने इन चंदुओं को चुनाव मैदान में उतारा है। वे इनके नामों का उपयोग कर अपने लोगों को मतदान और मतगणना के दौरान निर्वाचन अभिकर्ता बनाकर बूथ लेबल से लेकर मतगणना स्थल तक अपना वर्चस्व बनाने के फेर में हैं।

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