Wednesday, April 9, 2014

Lok Sabha, Assembly poll in Odisha tomorrow

The first of the two-phase simultaneous Lok Sabha and Assembly election in Odisha will be held on April 10, 2014. 
The first of the two-phase simultaneous Lok Sabha and Assembly election in Odisha will be held tomorrow to elect representatives from 10 Parliamentary and 70 Assembly constituencies.

The constituencies are spread over in the western and southern areas of Odisha.

There are 98 candidates, including former Congress chief ministers Giridhar Gamang and Hemanand Biswal, former Union ministers Jual Oram ( BJP) and Bhakta Charan Das (Congress) in the fray from Bargarh, Sundargarh, Sambalpur, Balangir, Kalahandi, Nabarangpur, Kandhamal, Aska, Berhampur and Kalahandi parliamentary constituencies.

Hockey star and former Indian team captain Dilip Tirkey is contesting the election as a BJD candidate from Sundergarh Lok Sabha seat, pitted against Hemanand Biswal of Congress and BJP's Jual Oram.

Prominent Odia cinestar Siddhant Mohapatra is a BJD candidate from Berhampur Lok Sabha seat.

There are 673 RPT 673 aspirants for the 70 Assembly seats. Prominent among them is Chief Minister Naveen Patnaik who is seeking re-election from Hinjili constituency in Ganjam district...


From ET News

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40 per cent votes cast in Manipur till noon

40 per cent votes cast in Manipur till noonAbout forty per cent of nine lakh voters have already cast their votes in the the Outer Manipur Lok Sabha constituency till midday, electoral officials in Imphal said today.

People dressed in traditional attires were seen in queues before polling booths in all the five hill districts of Ukhrul, Senapati, Chandel, Tamenglong and Churachandpur, where central security forces have been deployed in strength.

Chief Electoral Officer O Nabakishore said all deputy commissioners of hill districts have been instructed to take every precautionary measure.

A total 10 contestants from BJP, Congress, Trinamool Congress, Naga People's Front, NCP, JD(U) and Aam Admi Party, besides three independents are in the fray.

The candidates whose fate is being decided today are sitting Congress MP Thangso Baite, Gangmumei Kamei (BJP), C Doungel (NCP), Kim Gangte (TMC), Soso Lorho (Naga People's Front), L Gangte (JD-U) and M K Zou (AAP).

The last phase of polls in the state will be held on April 17 for the Inner Manipur seat. 


From NDTV News

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Second round of voting begins in India

Hundreds of thousands of people have started voting in the second phase of India's national election in the country's remote northeast amid tight security.

The election to choose members to the 543-seat Lok Sabha, or House of the People, will be spread over five weeks and run until May 12.

The multi-phase voting kicked off in two small northeastern states of Assam and Tripura on Monday and spread to the states of Arunachal Pradesh, Manipur, Meghalaya, and Nagaland on Wednesday.

The main opposition party, the Bharatiya Janata Party (BJP), which has promised surges in economic growth if it wins the majority, appears to be leading the race to wrest power from the ruling Congress party.

Voters queued outside the polling booths in Itanagar, the capital of the northeastern Arunachal Pradesh state, on Wednesday morning.

A first time voter, Noori, said that she was hoping the elections would result in the formation of a stable government, which would place the nation on a path of development.

"It should be a changed nation, not a changing one, that's why I have come to vote. I have lot of expectations from them, a developed nation. So, that's the reason I am voting for BJP. I am voting for the first time," she said.

Security forces have stepped up safety measures to ensure a safe and fearless environment for voters.

In the past, the strife-torn northeastern region of the country has experienced poll boycotts from fighter groups and there have also been threats against candidates from the outlawed United Liberation Front of Assam (ULFA).


From aljazeera News

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Tuesday, April 8, 2014

Third phase election campaign will hold tomorrow

लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के लिए दस अप्रैल को होने जा रहे मतदान के लिए दिल्ली समेत चौदह राज्यों की 91 सीटों के लिए मंगलवार शाम पांच बजे प्रचार थम जाएगा। दूसरे चरण में पूर्वोत्तर के पांच राज्यों की नौ सीटों पर बुधवार को वोट डाले जाएंगे।

तीसरे चरण में दिल्ली की सभी सात सीटों पर वोट डाले जाएंगे। 10 अप्रैल यानी गुरुवार को ही उत्तर प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र और हरियाणा की 10-10 सीटों पर भी मतदान होगा। इसी चरण में मध्य प्रदेश की नौ, बिहार की छह, झारखंड की चार सीटों के अलावा छत्तीसगढ़ जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ की एक-एक सीट पर मतदान होगा। तीसरे चरण में केरल की सभी 20 सीटों पर मतदान होगा।

दूसरे चरण में अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में दो-दो सीटों और मणिपुर, मिजोरम और नगालैंड की एक-एक सीट पर मतदान होना है।

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April 17 best day for modi to file nomination papers say astrologers

भाजपा के पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी 17 अप्रैल को वाराणसी से पर्चा दाखिल कर सकते हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, ज्योतिषियों ने इस दिन श्रेष्ठ मुहूर्त बताया है।

माना जा रहा है कि मोदी के करीबी अमित शाह बुधवार को वाराणसी पहुंचकर तारीख तय करेंगे। पार्टी ने मोदी के पर्चा भरने की तारीख तय करने के लिए ज्योतिषियों से सलाह ली थी, जिन्होंने 17 अप्रैल के साथ ही 20 तथा 22 अप्रैल को मुहूर्त निकाला है।

वाराणसी के स्थानीय नेता चाहते हैं कि मोदी 17 अप्रैल को ही पर्चा दाखिल कर दें। मोदी का मुकाबला यहां आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से है।

वाराणसी सहित 17 अन्य लोकसभा सीटों के लिए 12 मई को मतदान है। यह नौ चरणों के मतदान का अंतिम चरण होगा। नामांकन दाखिल करने की तिथि 17 अप्रैल से शुरू होकर 24 अप्रैल को समाप्त होगी।

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Saturday, April 5, 2014

Modi will be the next pm advani

लोकसभा चुनाव के लिए शनिवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी गुजरात की गांधीनगर सीट से अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन करने से पहले उन्होंने कहा कि देश के अगले पीएम नरेंद्र मोदी ही होंगे। आडवाणी के नामांकन के दौरान पार्टी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे। आज ही यह दोनों एक रैली को भी संबोधित करेंगे। चुनाव की तिथियां घोषित होने के बाद यह पहला मौका होगा जब यह दोनों नेता कोई मंच साझा करेंगे।

वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने लखनऊ लोकसभा सीट से अपना नामांकन पत्र भरा। इससे पहले उन्होंने पूजा-अर्चना भी की। इस दौरान उनके साथ कुछ समर्थक और कुछ नेता भी शामिल थे। गांधीनगर में मोदी और आडवाणी को साथ लाने के माध्यम से पार्टी यह संदेश भी देना चाहती है कि दोनों के बीच किसी भी तरह का कोई मनमुटाव नहीं है। गौरतलब है कि मोदी की चुनावी सभाओं में आडवाणी की शिरकत को लेकर सवाल लगातार खड़े होते रहे हैं। लिहाजा पार्टी इनपर विराम लगाना चाहती है।

इन दोनों के अलावा आज ही लखनऊ से कांग्रेस की प्रत्याशी रीता बहुगुणा जोशी भी अपना नामांकन दाखिल करेंगी। इस महत्वपूर्ण सीट से सपा के अभिषेक मिश्रा, बसपा के नकुल दुबे और आम आदमी पार्टी के जावेद जाफरी भी चुनावी मैदान में हैं।

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Friday, April 4, 2014

Man attacks on kejriwal in delhi during road show

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर एक शख्स ने हमला कर दिया। यह हमला उस वक्त हुआ जब दिल्ली के दक्षिणपुरी इलाके में वह प्रचार कार्यक्रम के तहत रोड शो कर रहे थे। तभी अचानक एक शख्स ने जीप पर चढ़कर अरविंद केजरीवाल के चेहरे पर मुक्का जड़ दिया। हमले के तुरंत बाद केजरीवाल समर्थकों ने उसको पकड़ लिया और उसकी पिटाई लगा दी। इस हमले के बाद पुलिस ने आप संयोजक की सुरक्षा बढ़ा दी है।

हालांकि बाद में केजरीवाल की अपील पर समर्थकों ने इस शख्स को घेरा बनाकर ले गए और बाद में उसे छोड़ दिया गया। घटना के बाद केजरीवाल ने सभी समर्थकों से अपील की है कि वह इस तरह के हमला करने वाले पर हाथ नहीं उठाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमले उनके ऊपर भाजपा करवा रही है। इस बीच केजरीवाल की तबियत काफी खराब बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक रोड शो के दौरान उन्हें 103 डिग्री बुखार है। बावजूद इसके उन्होंने रोड शो रोकने से मना कर दिया है।

गौर हो कि इससे पहले भी केजरीवाल पर हरियाणा के चरखी-दादरी में इसी प्रकार का हमला हो चुका है। वहीं कल भी इंद्रलोक में इलाके में चांदनी चौक सीट से आप प्रत्याशी आशुतोष के प्रचार अभियान में शामिल समर्थकों पर अंडे फेंके गए थे। जिसके बाद पुलिस ने आकर बीच-बचाव किया था।

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Behind chanduon planted spies per second are news leader

चंदुओं की भरमार से चर्चा में आई छत्तीसगढ़ की महासमुंद लोकसभा सीट पूरे राज्य के लिए जिज्ञासा का विषय बन गई है। सबसे ज्यादा चिंता में भाजपा है। क्योंकि सभी दस चंदूलाल भाजपा प्रत्याशी चंदूलाल साहू के हमनाम हैं। नुकसान से बचने के लिए भाजपा सत्ता व संगठन के नेताओं ने चंदूओं के पीछे जासूस लगा रखे हैं। चौबीस घंटे जासूसों की निगरानी में चुनाव प्रचार अभियान चल रहा है।

बताया जा रहा है कि आरएसएस से जुड़े एक एनजीओ के युवाओं की फौज पूरे लोकसभा क्षेत्र में फैली हुई है। वहीं भाजपा उम्मीदवार के मोबाइल से लेकर वाहन आदि की मानीटरिंग इसी एनजीओ के जिम्मे है। निर्दलीय चंदुओं की भी कथित तौर पर निगरानी हो रही है। राजनीतिक दांव-पेंच में माहिर और खरीद-फरोख्त के लिए राजनीति में आरोपों से घिरे एक कांग्रेस नेता की गतिविधियों पर सबकी नजर है।

घर बैठ गए ज्यादातर चंदू

ज्यादातर 'चंदू" नामांकन दाखिल करने के बाद घर बैठ गए हैं। कोई भी चुनाव प्रचार नहीं कर रहा है। वहीं नामांकन दाखिले के साथ संलग्न ज्यादातर शपथ पत्र में एक ही व्यक्ति की हैंडराइटिंग, निर्दलीय चंदुओं द्वारा जमा कराई गई प्रतिभूति राशि के नोटों में कथित तौर पर एक ही सीरिज और नंबर का मिलान होना, शपथ पत्र में आधी-अधूरी जानकारी और सभी कालमों में 'शून्य" लिखे होने से ऐसी आशंका जाहिर की जा रही है कि इन चंदुओं ने नामांकन दाखिल नहीं किया है। बल्कि, किसी प्रभावशाली व्यक्ति ने इन्हें चुनाव मैदान में उतारा है।

गरीबी की रेखा से नीचे हैं निर्दलीय चंदू

चुनाव मैदान में उतरे 10 निर्दलीय 'चंदू" में से ज्यादातर का नाम गरीबी रेखा से नीचे है। सूत्रों का कहना है कि जिन बड़े नेताओं ने इन चंदुओं को चुनाव मैदान में उतारा है। वे इनके नामों का उपयोग कर अपने लोगों को मतदान और मतगणना के दौरान निर्वाचन अभिकर्ता बनाकर बूथ लेबल से लेकर मतगणना स्थल तक अपना वर्चस्व बनाने के फेर में हैं।

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Tuesday, April 1, 2014

Riwa rally live modi attack on congress

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने कहा कि चुनावी माहौल भांपकर कांग्रेस और थर्ड फ्रंट पार्टियों ने हार मान ली है। अब ये सब मिलकर अस्थिर सरकार की साजिश रच रहे हैं। इस साजिश को विफल करने के लिए उन्होंने मतदाताओं से एनडीए के पक्ष में यूपी में सभी 80 तथा देश में 300 से अधिक सीटें मांगीं।

बरेली, आंवला और पीलीभीत सीटों के भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में मंगलवार को यहां महानगर मैदान में आयोजित विशाल चुनाव रैली में मोदी करीब सवा दो घंटे विलंब से पहुंचे। इसके लिए माफी मांगने के बाद उन्होंने बेहद आक्रामक शैली में सोनिया गांधी, मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव पर प्रहार किए। करीब 30 मिनट के भाषण में उन्होंने यूपीए सरकार को हर मोर्चे पर नाकाम ठहराया।

लाल बहादुर शास्त्री के जय जवान-जय किसान नारे की याद दिलाते हुए अनाज के सड़ने और किसानों की खुदकुशी के मामले उठाए। पाक फौजियों द्वारा हिंदुस्तानी जवानों के सिर काटकर ले जाने की घटना को शर्मनाक बताते हुए केंद्र सरकार पर सोए होने का इल्जाम लगाया। कहा कि जवान सीमा पर कम और आतंकवादी घटनाओं में ज्यादा शहीद हो रहे हैं।

मोदी ने कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र को 'धोखा पत्र' बताते हुए 2009 के घोषणा पत्र के बारे में लोगों से पूछा, बताओ-केंद्र सरकार ने कितनों को नौकरी दी। एक को भी नहीं। इस बार घोषणापत्र में फिर 10 करोड़ रोजगार देने का सफेद झूठ बोला है। कांग्रेस का घोषणापत्र धोखा है। सरकार में शामिल नेता मूर्ख बना रहे हैं। उनके लिए हर दिन अप्रैल फूल है। ऐसे लोगों से देश को बचाना पड़ेगा।

साठ साल तक शासक चुने हैं, एक बार सेवक को चुनना होगा। कांग्रेस को साठ साल दिए, मुझे साठ माह दें। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस हो या सपा-बसपा, सभी हार मान चुके हैं। उनका मकसद सरकार बनाना नहीं है। दूध से बने उत्पाद में नीबू डालकर खेल बिगाड़ने में लग गए हैं। वे देश में कमजोर सरकार बनवाने की साजिश कर रहे हैं। स्थिर सरकार होगी तो हिंदुस्तान की दुनियाभर में साख मजबूत होगी। इसलिए एनडीए को तीन सौ से ज्यादा सीटों पर जिताकर भेजना होगा।

उप्र से सारे सांसद हमारे हों, तो विश्वास दिलाता हूं, जनता जैसा चाहती है, वैसा होगा। किसानों और नौजवानों का भाग्य बदल दूंगा। इस रैली की धूप में आप लोगों का तपना बेकार नहीं जाएगा। उन्होंने बरेली के मांझे का गुजरात की पतंग से रिश्ता भी बताया। बरेली के प्रत्याशी संतोष गंगवार, आंवला के धर्मेद्र कश्यप और पीलीभीत की मेनका गांधी के समर्थन में आयोजित रैली को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी व महामंत्री स्वतंत्रदेव सिंह इत्यादि ने भी संबोधित किया।

बरेली के बाद रीवा में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कांग्रेस पर अपरोक्ष रूप से हमला करते हुए निर्वाचन आयोग से अपील की कि उन्हें इसकी जांच करनी चाहिए कि उनके हेलिकॉप्टर को उड़ने से कौन रोक रहा है।

दरअसल, आज ही बरेली में चुनावी सभा को संबोधित करने के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल से उड़ान की परमीशन न मिलने के चलते नरेंद्र मोदी का हेलिकॉप्टर करीब एक घंटे तक खड़ा रहा। महानगर मैदान में डेढ़ बजे रैली खत्म होने के बाद नरेंद्र मोदी रवाना हुए। लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर एयर ट्रैफिक कंट्रोल ऑफ इंडिया ने उनके हेलिकॉप्टर को उड़ान की इजाजत नहीं दी। इसके चलते करीब एक घंटे तक वे मैदान में ही रुके रहे।

अपराह्न 2.20 बजे के बाद उनके हेलिकॉप्टर को उड़ने की इजाजत मिली। इससे पूर्व बरेली आने के समय भी उनके हेलिकॉप्टर को करीब ढाई घंटे तक दिल्ली हवाई अड्डे पर रोके रखा गया।

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Smriti irani will put an end to dynastic from amethi

कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के खिलाफ भाजपा ने अमेठी से स्मृति ईरानी को चुनाव मैदान में उतारा है। भाजपा उपाध्यक्ष स्मृति सोमवार रात से ही अमेठी में अपने चुनावी अभियान का बिगुल बजा चुकी हैं।

स्मृति ईरानी ने कहा, 'मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि अमेठी के लोगों को 'परिवारवाद' के चंगुल से छुड़ाया जाए। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को ललकारते हुए उन्होंने कहा, 'संसद में राहुल गांधी के पिछले 10 साल का रिकॉर्ड देखिए और मेरा पिछले ढाई साल का। पार्टी ने मुझे जो जिम्मेदारी दी है मैं उससे बहुत सम्मानित महसूस कर रही हूं'।

सोमवार को अमेठी की सीट से चुनाव लड़ने के लिए स्मृति ईरानी के नाम का ऐलान किया गया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा था, 'मैं बहुत खुश हूं कि पार्टी ने मुझे अमेठी से लड़ने का मौका दिया।आम आदमी पार्टी कांग्रेस की बी टीम है और उसने राहुल के खिलाफ 'मॉक कैंडिडेट' उतारा है। हम न सिर्फ कड़ी टक्कर देंगे, बल्कि चुनाव जीतेंगे भी।

स्मृति ईरानी छोटे पर्दे की चहेती बहू रही हैं। वह 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' । सीरियल में लंबे समय तक तुलसी विरानी का रोल कर चुकी हैं। 2003 में वह बीजेपी से जुड़ गई थीं। 2004 में उन्होंने दिल्ली की चांदनी चौक लोकसभा सीट से कपिल सिब्बल के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गई थीं। सन 2010 में उन्हें बड़ा प्रमोशन मिला जब उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय सचिव बना दिया गया। बाद में उन्हें भाजपा महिला मोर्चा की कमान संभालीं और पार्टी के अहम महिला चेहरों में शुमार की जाने लगीं। भाजपा ने 2011 में उन्हें राज्यसभा के रास्ते संसद भेजा।



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Monday, March 31, 2014

UPA empty hand on economic front in the time of election

कहते हैं अंत भला तो सब भला, लेकिन संप्रग सरकार का अंतिम वर्ष अर्थव्यवस्था के लिए कुछ बेहतर साबित नहीं हुआ है। देश की आर्थिक स्थिति आज खस्ताहाल है। सोमवार को समाप्त हो रहा संप्रग-दो का आखिरी वित्तीय वर्ष, संप्रग-एक और राजग के आखिरी साल की तुलना में बेहद खराब रहा है। हालत यह है कि चुनावी मैदान में आर्थिक मोर्चे पर दिखाने के लिए सरकार के पास कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है।

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अर्थव्यवस्था की स्थिति ऐसी है कि वित्त वर्ष 2013-14 में विकास दर घटकर पांच प्रतिशत से नीचे रहने का अनुमान है जो पिछले दस साल में न्यूनतम स्तर होगा। आंकड़ों में थोक महंगाई दर मामूली रूप से घटकर फरवरी में 4.68 प्रतिशत पर जरूर आ गयी है, लेकिन खुदरा महंगाई दर भी अब भी दहाई के अंक की दहलीज पर खड़ी है। पता नहीं यह कब दहाई के अंक को पार कर जाये। रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम आसमान पर हैं। यही वजह है कि रिजर्व बैंक भी ब्याज दरों में कटौती से कतरा रहा है। बेरोजगारी भी चरम पर है। केंद्रीय श्रम मंत्रालय के मुताबिक 15 से 29 वर्ष के युवाओं में बेरोजगारी दर 13 प्रतिशत से अधिक है। सोने के आयात पर कड़ाई के चलते चालू खाते के घाटे में गिरावट जरूर आयी है, लेकिन यह स्थायी नहीं है। चुनाव के बाद नई सरकार बनने पर चालू खाते का घाटा फिर ऊपर जा सकता है। सबसे बड़ी चुनौती रुकी हुई महा परियोजनाएं हैं। फरवरी महीने तक करीब 500 अरब रुपये की परियोजनाएं फसीं हुई थीं। रुपये के मुकाबले डालर का मूल्य भी 60 रुपये पर बना हुआ है जो कि संप्रग-एक के आखिरी वर्ष में लगभग 46 रुपये था। संप्रग-एक के आखिरी वर्ष में विकास दर थोड़ी बेहतर 6.7 प्रतिशत थी। हालांकि, महंगाई दर आठ प्रतिशत से ऊपर थी। वैसे, राजग के आखिरी वर्ष में अर्थव्यवस्था के स्तंभ संप्रग-एक और संप्रग-दो के मुकाबले मजबूत थे। वित्त वर्ष 2003-04 में विकास दर 8 प्रतिशत से अधिक थी जबकि महंगाई दर 5.5 प्रतिशत के निम्न स्तर पर थी। उस समय चालू खाते का घाटा भी एक प्रतिशत के आस-पास था।

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EC not to ban opinion polls; wants Centre to make law

ओपीनियन पोल यानी जनमत सर्वेक्षणों को प्रतिबंधित करने के सवाल पर चुनाव आयोग ने मनमोहन सरकार को करारा झटका दिया है। आयोग ने कानून मंत्रालय को टका सा जवाब दिया है कि वह संविधान के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर सर्वेक्षणों पर रोक नहीं लगाएगी। उसने गेंद सरकार के पाले में डाल दी है। आयोग का कहना है कि सरकार ही कानून बनाकर जनमत सर्वेक्षणों को प्रतिबंधित करे।

कुछ दिनों पहले कानून मंत्रालय ने सुझाव दिया था कि आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत प्रदत्त शक्तियों को इस्तेमाल करते हुए ओपीनियन पोल पर रोक लगाए। सूत्रों के अनुसार आयोग ने मंत्रालय के इस सुझाव पर हाल ही में अपना जवाब भेज दिया है। आयोग ने कहा कि इस मामले में सरकार ही कोई कानून बनाए। यही बेहतर विकल्प होगा। आयोग के मुताबिक, 'सर्वेक्षणों पर रोक लगाने के लिए अनुच्छेद 324 के इस्तेमाल विधि सम्मत नहीं होगा। पूर्व में सरकार ने जैसे कानून बनाकर एग्जिट पोल पर रोक लगा दिया। इस मामले में भी वह ऐसा ही कदम उठाए।' आयोग ने पहले प्रस्तावित किया था कि लोकसभा एवं विधानसभाओं के चुनाव की अधिसूचना जारी होने से लेकर अंतिम चरण का मतदान होने तक जनमत सर्वेक्षणों के परिणाम के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगाई जाए। इस वर्ष के शुरू में अटार्नी जनरल जीई वाहनवती ने भी अपनी रजामंदी दे दी थी। लेकिन कानून मंत्रालय चाहता था कि इस बारे में अंतिम फैसला चुनाव आयोग ही करे। ध्यान रहे कि पिछले वर्ष हुए पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव से पूर्व ओपीनियन पोल पर रोक को लेकर भाजपा और कांग्रेस आपस में भिड़ गई थी। सर्वेक्षणों में पिछड़ती दिख रही कांग्रेस ने जहां इन्हें प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव किया, वहीं भाजपा समेत अन्य विपक्षी दलों ने इस तरह की किसी भी कोशिश का विरोध किया। बहरहाल इस मामले में सरकार ही हीलाहवाली करती रही। 28 फरवरी को आयोग ने सरकार को पत्र लिखकर कहा कि कानून में संशोधन कर चुनावों के दौरान सर्वेक्षणों को प्रतिबंधित करने के उसके प्रस्ताव पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया।

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Saturday, March 29, 2014

Sabir alis bjp membership may be cancelled

जदयू से निकाले जाने के बाद भाजपा में शामिल हुए साबिर अली की सदस्यता शनिवार को रद्द कर दी गई। गौरतलब है कि भाजपा के पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी की तारीफ करने के बाद जेडीयू से निकाले गए साबिर अली को भाजपा में शामिल करने के बाद तूफान मच गया था। मुख्तार अब्बास नकवी समेत भाजपा के कई बड़े नेताओं ने इस फैसले का खुलकर विरोध किया। इसके अलावा आरएसएस ने भी पार्टी नेतृत्व से कह दिया है कि साबिर अली की सदस्यता रद की जाए।

साबिर अली ने भी भाजपा की सदस्यता हासिल करने के बाद उठे विवादों के बाद बिहार के भाजपा प्रभारी धमर्ेंद्र प्रधान को खत लिखकर आग्रह किया था कि उनकी सदस्यता फिलहाल होल्ड पर रखी जाए। साबिर ने कहा कि एक कमेटी बनाकर उनकी जांच करा ली जाए और वह बेदाग साबित होने तक इंतजार करेंगे। साबिर अली ने यह भी कहा है कि अगर वे दोषी पाए गए तो राजनीति से ही संन्यास ले लेंगे। उधर मुख्तार अब्बास नकवी ने अपने जिस ट्वीट में साबिर अली को भटकल का दोस्त बताया था, उसे हटा लिया है।

कर्नाटक में श्रीराम सेना के विवादित नेता प्रमोद मुथालिक को शामिल कराकर फजीहत झेल चुकी पार्टी साबिर अली को लेकर घिर गई थी। पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने सार्वजनिक विरोध जताते हुए स्पष्ट कर दिया कि साबिर को बाहर का रास्ता दिखाना ही पड़ेगा। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि आतंकी भटकल और दाऊद इब्राहिम से उसके रिश्ते रहे हैं।

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Friday, March 28, 2014

Ashwani kumar exclusive interview

संप्रग सरकार के दस सालों में अश्विनी कुमार एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने करीब आधा दर्जन मंत्री पद संभाले तो वहीं आरोपों व मीडिया के दबाव के बाद इस्तीफा देकर सरकार से बाहर हुए। सरकार के भीतर व संगठन के साथ नजदीक से काम करने का अनुभव रखने वाले कुमार को कसक है कि आरोपों की सियासत ने संप्रग सरकार को उस कगार पर ला दिया जहां उसके कामों के मुकाबले इल्जामों का बोझ ज्यादा हो गया है। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री और सरकार को कमजोर बताने और जताने की कवायद में विपक्ष जिम्मेदार है तो साथ ही कई अपनों का दामन भी बेदाग नहीं है। 'दैनिक जागरण' के विशेष संवाददाता प्रणय उपाध्याय से बातचीत में पूर्व कानून मंत्री ने कहा कि सरकार के भीतर से उठे कई मंत्रियों के विरोधाभासी सुरों और प्रचार ने भी कमजोर नेतृत्व की छवि बनाने में योगदान दिया।

आम चुनाव में संप्रग सरकार के एक दशक की समीक्षा हो रही है। आपकी नजर में सरकार कहां नाकाम रही और प्रधानमंत्री को क्यों कहना पड़ा कि अब उन्हें इतिहास से ही न्याय की उम्मीद है?

-मेरी नजर में संप्रग सरकार आजाद भारत में गरीबों व वंचितों के लिए सर्वाधिक योजनाएं बनाने और उनके क्रियान्वयन को धन आवंटन देने वाली सरकार रही। लेकिन, बीते 2-3 सालों में कुछ ऐसा माहौल बना कि आरोप-प्रत्यारोप का शोर बढ़ता गया और सरकार अपने अच्छे कामों पर चर्चा को जनता के बीच ले जाने में नाकाम रही। प्रधानमंत्री का यह कहना बेहद पीड़ादायक है कि अब इतिहास ही उनका आकलन करेगा। मेरी नजर में देश का इतिहास मनमोहन सिंह का आकलन कहीं अधिक समग्रता और सच्चाई से करेगा।

.लेकिन पीएम की छवि कमजोर दिखाने में पार्टी और सरकार के भीतरी तत्वों को कितना दोष देंगे?

-संप्रग सरकार एक दशक चली। इसमें बड़ा योगदान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पीएम के बीच बेहतरीन तालमेल का है। कांग्रेस अध्यक्ष ने पूरी मजबूती के साथ मनमोहन सिंह को समर्थन दिया। पीएम स्वभाव से विनम्र हैं। कई बार उनकी विनम्रता को भी कमजोरी मान लिया जाता है। विपक्ष इसी को दुष्प्रचार का साधन बनाता रहा। परमाणु करार या अन्य कई आर्थिक फैसलों पर देखा जा सकता है कि उन्होंने दृढ़ता के साथ निर्णय लिया।

हां, इतना जरूर मानूंगा कि समय-समय पर मंत्रिमंडल के भीतर से भी पीएम और सरकार के फैसलों के खिलाफ विरोध के ऐसे सुर उठते रहे जो नहीं उठने चाहिए थे। सामूहिक जिम्मेदारी से बंधे इन मंत्रियों के व्यवहार से नुकसान हुआ। यह जरूरी था कि उन्हें अनुशासित किया जाता।

कांग्रेस अध्यक्ष का पूरा समर्थन होने के बावजूद ऐसा होता रहा तो इसके पीछे क्या व्यक्तिगत हित जिम्मेदार थे?

-अब इसके सही कारण क्या थे इसकी किसी वक्त पर समीक्षा करनी होगी। हालांकि अभी मैं किसी निष्कर्ष पर टिप्पणी नहीं करूंगा।

भ्रष्टाचार अहम मुद्दा रहा जिसपर विपक्ष आरोप लगाता रहा। सरकार ने भी कई मंत्रियों के इस्तीफे कराए। आपको भी सीबीआइ जांच रिपोर्ट देखने को लेकर उठे विवाद के बाद पद छोड़ना पड़ा। इस पर क्या कहेंगे?

-देखिए, भ्रष्टाचार एक मुद्दा है इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता। पूरे समाज में इसका विस्तार है और इसके खिलाफ व्यापक स्तर पर लड़ाई जरूरी है। लेकिन, महज आरोप काफी नहीं है। न्याय का नैसर्गिक सिद्धांत है कि कानून प्रक्रिया से सिद्ध न होने तक हर व्यक्ति मासूम है। दुर्भाग्यवश बीते कुछ सालों में आरोपों का शोर और उन्हें लेकर मीडिया का दबाव भी इस कदर बढ़ा कि सरकार के फैसले भी प्रभावित हुए।

अपने मामले में स्पष्ट कर दूं कि मेरे खिलाफ न तो कोई आरोप है और न ही सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी। मुझे इस्तीफे का कोई मलाल नहीं क्योंकि संसदीय व राजनीतिक मर्यादा के चलते मैंने त्यागपत्र दिया और पार्टी व जनता दोनों से मुझे इसके बाद भरपूर स्नेह मिलता रहा।

यानी आप कहेंगे कि केवल मीडिया के दबाव में आपका इस्तीफा हुआ?

-जरूर। मीडिया के दबाव में ही पवन बंसल और अशोक चह्वाण के भी इस्तीफे हुए। उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने का फैसला इसकी तस्दीक करता है। सिंहावलोकन करें तो लगता है कि दबाव में सरकार ने कई अतिवादी निर्णय भी कर दिए। उदाहरण के लिए दिल्ली दुष्कर्म कांड के बाद बने एंटी-रेप कानून में कई ऐसे प्रावधान हैं जिनका गलत इस्तेमाल संभव है। एक वकील होने के नाते मुझे लगता है कि इसमें जल्द से जल्द संशोधन की जरूरत है ताकि इसका दुरुपयोग न हो।

चुनावी परीक्षा से पहले क्या मानेंगे संप्रग सरकार के कौन से विषय कमजोर रह गए?

-बीते कुछ समय में हम जनता की नब्ज पढ़ने में नाकाम हुए और लोगों से हमारा संवाद कमजोर हुआ। राज्यों में हम अपने संगठन को मजबूत करने में भी कामयाब नहीं हुए। जिसके कारण लोगों के बीच हमारे अच्छे कामों का भी सही आकलन नहीं हो पा रहा।

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Uma bharti not to contest against sonia

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की फायर ब्रांड नेता उमा भारती कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेंगी। उमा झांसी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। भाजपा की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि उमा झांसी से ही चुनाव लड़ेंगी। रायबरेली और अमेठी से चुनाव लड़ने वाले पार्टी उम्मीदवारों की घोषणा जल्द ही की जाएगी। भाजपा पहले ही कह चुकी है कि वह उत्तर प्रदेश में रायबरेली और अमेठी में सोनिया व राहुल के खिलाफ मजबूत उम्मीदवार उतारने जा रही है।

Source: Lok Sabha Elections 2014 Candidates

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Thursday, March 27, 2014

Rajasthan is luckey for parachute candidate

राजस्थान की बंजर भूमि बाहर से आने वाले पैराशूट उम्मीदवारों के लिए काफी उपजाऊ रही है। राजस्थान में आकर चुनाव जीतने वाले नेता उप प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री तक के पद पर पहुंचते रहे हैं। इन हस्तियों में चौधरी देवीलाल, बूटा सिंह, बलराम जाखड़ और राजेश पायलट शामिल है। इस बार भी टोंक -सवाईमाधोपुर सीट पर तीन बाहरी प्रत्याशी हैं।

1989 में जनता दल से चौधरी देवीलाल राजस्थान की सीकर सीट से लोकसभा पहुंचे थे तो सरकार में सीधे नंबर दो बन गए थे। हालांकि एक वक्त पर उनके प्रधानमंत्री बनने की भी संभावना हो गई थी। वीपी सिंह सरकार में वह उप प्रधानमंत्री बनाए गए थे। राजेश पायलट और बूटा सिंह भी केंद्र सरकार में सिरमौर बने रहे। पायलट उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के वेदपुरा गांव में जन्मे थे। 1980 में वह भरतपुर से सांसद चुने गए। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के मित्र रहे पायलट 1984, 1991, 1996, 1998 और 1999 में दौसा लोकसभा सीट से चुनाव जीते और केंद्र में अहम मंत्रालयों का जिम्मा संभाला। उनके पुत्र सचिन पायलट को अब तो बाहरी नहीं कहा जा सकता है लेकिन उनकी भी केंद्र में रसूख रही है। केंद्र में मंत्री, राज्यपाल, आयोग के अध्यक्ष जैसे अहम पदों पर रहे बूटा सिंह ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद ही राजस्थान आ गए थे। वह 1984 में जालोर से सांसद चुने गए और केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री बने। इस बार फिर से बूटा सिंह मैदान में हैं।

पंजाब के फाजिल्का जिले के रहने वाले बलराम जाखड़ को भी राजस्थान की भूमि ही रास आई। 1984 में वह सीकर से जीते थे। उन्हें लोकसभा अध्यक्ष जैसा संवैधानिक पद मिला था।

भाजपा में बतौर अध्यक्ष विवादित रहे बंगारू लक्ष्मण हैदराबाद से राजस्थान आकर जालौर से लड़े थे। यह और बात थी कि वह जीत नहीं पाए थे। उसके बाद ही वह एक स्टिंग ऑपरेशन का शिकार हो गए थे। भाजपा ने उनकी पत्नी सुशीला बंगारू लक्ष्मण को जालोर सीट से 2004 में टिकट दिया था और वह बूटा सिंह को हराकर अपने पति की हार का बदला लेने में कामयाब रही थीं। यह तो बात राजनीतिज्ञों की थी। वह सफल भी रहे। लेकिन बीकानेर से चुनाव जीतने वाले धर्मेद्र बुरी तरह फ्लाप रहे। उन्होंने दूसरी बार चुनाव की बात भी नहीं सोची। इस बार कांग्रेस ने क्रिकेटर अजहरूद्दीन तो भाजपा ने दिल्ली के सुखवीर सिंह जौनपुरिया को और समाजवादी पार्टी ने कश्मीर के कमर रब्बानी चेची को टोंक सवाईमाधोपुर सीट से उम्मीदवार बनाया है।

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Wednesday, March 26, 2014

Modi will do average four rally per day

'चाय पर चर्चा' जैसे कार्यक्रमों के जरिए वोटरों से सीधा संपर्क बनाने में जुटे भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी अपनी रैलियों में भी कुछ ऐसा ही करेंगे। रैलियों के लिए खुद ही मतदाताओं को लिखित निमंत्रण भेजेंगे और साथ ही भाजपा की सरकार बनने पर साठ महीने में निराशा को आशा में तब्दील करने का वादा करेंगे। मोदी हर रोज औसतन चार रैलियां करेंगे। वह 46 दिनों में 185 रैलियां करेंगे।

लगभग हर राज्य में कम से कम एक बड़ी रैली कर चुके मोदी 26 मार्च से लोकसभा चुनाव के लिए औपचारिक प्रचार अभियान शुरू करेंगे। वैष्णो देवी की पूजा कर जम्मू से 'भारत विजय रैली' की शुरुआत होगी तो पहले ही दिन कम से कम तीन रैलियां करेंगे। कोशिश होगी कि करीब तीन सौ संसदीय क्षेत्रों में वह किसी न किसी प्रकार जनता को संबोधित करें।

भाजपा के अंदर उठे विवाद और घमासान को नजरअंदाज करते हुए पार्टी ने चुनावी कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर ली है। चुनाव कार्यक्रम का जिम्मा संभाल रहे मुख्तार अब्बास नकवी ने बताया कि मोदी 185 से ज्यादा रैलियां करेंगे। ध्यान रहे कि भाजपा लगभग 280 सीटों पर कभी न कभी जीत हासिल कर चुकी है। 272 प्लस का लक्ष्य लेकर चल रहे मोदी ने भी तीन सौ सीटों पर नजरें जमा दी हैं। लिहाजा, उन क्षेत्रों में जरूर प्रचार करेंगे। शुरुआत जम्मू से होगी। पहले दिन संभवत: ऊधमपुर में वह रैली करेंगे। उसके बाद उत्तर प्रदेश की किसी सीट और आखिरकार दिल्ली में रैली करेंगे। कोशिश यह होगी कि हर रोज वह दो से तीन राज्यों में रैली करें। इसी प्रकार पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी डेढ़ सौ से ज्यादा रैलियां करेंगे। लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली जैसे स्टार प्रचारकों का भी विस्तृत कार्यक्रम बनाया जा रहा है। 

मोदी के चुनाव प्रचार में कुछ नया भी दिखेगा। मसलन, मोदी अपनी रैलियों के लिए वोटर को लिखित निमंत्रण भेजेंगे। उनसे यह अपील की जाएगी कि वह अपनी समस्याओं के बारे में बताएं। यह लिखित वादा भी होगा कि भाजपा सरकार पांच साल में उनका निदान करेगी। कोशिश यह है कि चुनाव प्रचार सिर्फ रैली तक सीमित न रहे बल्कि लोगों की भागीदारी हो। लिहाजा 'नमो समाधान' सुझाया जाएगा जिसमें धर्मनिरपेक्षता के अर्थ लेकर कृषि और गांव तक पर मोदी को सोच बताई जाएगी। तो रैली में पहुंचे लोगों से सुझाव भी मांगे जाएंगे। इसके लिए पार्टी ने प्रोफार्मा तैयार कर लिया है। बात यहीं नहीं रुकेगी। नकवी के मुताबिक इन सुझावों को एकत्रित कर उसे छांटा जाएगा और आने वाली भाजपा सरकार उस दिशा में काम करेगी।

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Modi's mega poll campaign to begin today

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर के हीरानगर में भारत विजय रैली को संबोधित करते हुए कहा कि यहां की जनता के प्यार को ब्याज समेत वापस करूंगा।

इससे पहले नरेंद्र मोदी आज सुबह सांझी छत पहुंचे और वहां से माता वैष्णो देवी के दरबार में पहुंचे। मां के दर्शन करने के बाद मोदी भारत विजय रैली को संबोधित करने के लिए कठुआ के हीरानगर पहुंचे। इसके बाद वे उत्तर प्रदेश में दो और दिल्ली में एक रैली को संबोधित करेंगे।

रैली में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि 30 साल से जम्मू-कश्मीर लहुलूहान है। अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने शासनकाल में यहां के विकास और शांति के लिए जो नींव डाली थी उसे सही दिशा में ले जाना है।

उन्होंने देश में व्याप्त बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विरोधी दल उनके विकास, किसान और महंगाई के मुद्दे का जवाब धर्मनिरपेक्षता से देते हैं। वे धर्मनिरपेक्षता की आड़ में देश की ज्वलंत समस्याओं का जवाब देने से बच जाते हैं। कांग्रेस भ्रष्टाचार और महंगाई के मुद्दों पर जवाब देने की ताकत नहीं है। उन्होंने कहा कि आज किसी भी समस्या का समाधान विकास के बिना संभव नहीं है।

उन्होंने कांग्रेस की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जय किसान, जय जवान का नारा देने वाली पार्टी की आज की नीति मर किसान, मर जवान है। आज सरहदों पर भारतीय जवानों के सिर काटे जा रहे हैं, परंतु कांग्रेस नीत संप्रग सरकार इस पर चुप्पी साधे बैठे है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को तीन नए सिपाही मिल गए हैं, जोकि पाक की नई ताकत है। एक है एक47 जिसकी गोलियों का प्रयोग हमारे सैनिकों के ऊपर किया जाता है। दूसरे है एके एंटनी, जो कि भारत के रक्षा मंत्री होते हुए भी संसद में ऐसे बयान देते हैं जैसे पाकिस्तान सेना अपना पक्ष रख रही है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि एक अन्य है एके-49 जिन्होंने अभी-अभी एक पार्टी को जन्म दिया है। इनकी पार्टी की वेबसाइट पर दिए गए नक्शे में कश्मीर पाकिस्तान को सौंप दिया गया है। उनके नेता कहते हैं जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह होना, जिस पर पाकिस्तान खुश होता है। वे पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं। यहां के सैनिकों के सिर कट जाते हैं परंतु वे कुछ नहीं बोलते।

मोदी ने कहा कि सैकड़ों हिंदू वर्षो से भारतीय नागरिकता के लिए तरस रहे हैं। परंतु उनकी कोई सुनवाई नहीं होती। वहीं, बांग्लादेश मुसलमानों को यहां से आसानी की नागरिकता मिल जाती है और उनके लिए हकों की बात की जाती है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की उत्तर पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क में होने वाली रैली की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन व पुलिस दिन भर जुटी रही। जिला पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त वीवी चौधरी समेत सुरक्षा शाखा के अधिकारी रैली स्थल पर सुरक्षाकर्मियों को दिशा निर्देश देते रहे। रैली को लेकर भाजपा नेता भी दिन भर जुटे रहे। कार्यकर्ताओं को पास उपलब्ध करवाने से लेकर रैली में आने वाले लोगों की सूची बनाने में लगे रहे।

जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार रैली को लेकर आतंकी हमले का खतरा है। इस वजह से पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए गए हैं। जिला पुलिस के अलावा स्पेशल सेल और सुरक्षा विंग के अधिकारियों ने भी रैली स्थल और आसपास के इलाकों का जायजा लिया। रैली की सुरक्षा व्यवस्था के लिए जिला पुलिस ने सुरक्षा बलों की कई अतिरिक्त कंपनियां मांगी हैं। अधिकारियों के अनुसार मोदी की रैली में आने वाले लोगों पर नजर रखने के लिए कई चक्रीय सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। जहां पहले घेरे में जिला पुलिस के जवान रहेंगे वहीं दूसरे घेरे में अ‌र्द्धसैनिक बलों की टुकड़ियां रहेंगी। सुरक्षा विंग के कर्मचारी भी आने जाने वालों की जांच में जुटे रहेंगे। इसके अलावा रैली के दौरान मंच के आसपास तीन चक्रीय सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। मंच के आसपास के क्षेत्र में वीआइपी और वीवीआइपी पास धारक ही पहुंच पाएंगे। रैली के दौरान लोगों के बीच में काफी संख्या में पुलिस कर्मी तैनात रहेंगे। इसमें स्पेशल सेल के जवान व अधिकारी भी रहेंगे। काफी तादाद में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। रैली को लेकर भाजपा नेता मंगलवार को दिन भर मंथन करते रहे। भाजपा के विभिन्न मंडलों ने 20 हजार कार्यकर्ताओं को पास दिए गए हैं। काफी संख्या में आम लोग भी रैली में आएंगे। टेंट लगने से से लेकर बैरीकेडिंग और कुर्सियों आदि की व्यवस्था का जायजा लेने में भाजपा नेता जुटे रहे। इस रैली में दिल्ली के सभी सात संसदीय क्षेत्र के प्रत्याशी पहुंचेगे। चूंकि शास्त्री पार्क का डीडीए मैदान छोटा है इस वजह से पुलिस व जिला प्रशासन ने ज्यादा लोगों को रैली में शामिल नहीं करने का आग्रह किया है। इससे सुरक्षा व्यवस्था संभालना मुश्किल हो जाएगा।

रैली के दौरान लगेगा जाम:

रैली के दौरान जीटी रोड पर जाम रहने की संभावना है। जिससे रैली के दौरान वैकल्पिक रास्तों का प्रयोग करने की यातायात पुलिस ने सलाह दी है।

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Monday, March 24, 2014

Suspense starts on nagina lok sabha seat

नगीना लोकसभा सीट ने राजनीतिक दलों को भ्रम के भंवर में डाल दिया है। सपा के कब्जे से सीट निकालने के लिए बसपा और भाजपा पूरी तिकड़म भिड़ा रहे हैं। सपा अपना दबदबा बनाए रखने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। अब देखना यह है कि 17 अप्रैल को होने वाले मतदान महायज्ञ का प्रसाद किसके हिस्से में आएगा।

वर्ष 2009 में अमरोहा लोकसभा सीट से स्योहारा और धामपुर विधानसभा तथा बिजनौर लोकसभा सीट से अफजलगढ़, नगीना और नजीबाबाद काटकर नगीना लोकसभा सीट बनाई गई। स्योहारा विधानसभा को नूरपुर और अफजलगढ़ को बढ़ापुर नाम दिया गया। इस लोकसभा क्षेत्र से सपा ने यहां पर यशवीर सिंह धोबी को उतारा था और उन्होंने बसपा के आरके सिंह को शिकस्त दी थी, जबकि भाजपा और रालोद के गठबंधन के प्रत्याशी मुंशी रामपाल तीसरे नंबर पर आए थे। यशवीर सिंह को 2,34,739 तथा बसपा के आरके सिंह 1,75,056 वोट मिले। जबकि मुंशीरामपाल को 1,62,897 और कांग्रेस प्रत्याशी इसम सिंह मात्र 31,770 वोटों पर सिमट गए थे।

सपा को छोड़कर स्थिति इस बार जुदा है। मोहरे भी और राजनीतिक बिसात भी। बसपा ने इस बार पूर्व विधायक गिरीशचंद और सपा ने अपने पुराने सांसद यशवीर पर ही दांव लगाया है। कांग्रेस और रालोद ने इस सीट से खुद का पल्ला झाड़कर रणक्षेत्र गठबंधन के सहयोगी महानदल को सौंप दिया है। अब भगवानदास राठौर इस सीट से ताल ठोंक रहे हैं। आम आदमी पार्टी से सारिका चौधरी व पीस पार्टी से पूर्व सांसद शीशराम सिंह रवि समेत आधा दर्जन से अधिक दावेदार मैदान में ताल ठोक रहे हैं।

भाजपा से डा. यशवंत सिंह नामांकन करा चुके हैं, लेकिन अभी उनके प्रत्याशी बनने पर संदेह के बादल पूरी तरह छंटे नहीं हैं। इस सीट पर भाजपा के तीन दर्जन दावेदार पहले ही थे। अब पूर्व केंद्रीय मंत्री अशोक प्रधान का नाम भी अचानक चर्चा में आ गया है। सपा की निगाह मुस्लिमों के साथ ही चौहान बिरादरी पर भी है। प्रदेश सरकार में मंत्री व धामपुर विधायक मूलचंद चौहान इसी बिरादरी से हैं। बसपा दलितों के साथ ही मुस्लिमों में सेंध लगाने में जुटी है। भाजपा प्रत्याशी मोदी के नाम पर मैदान में उतर रहे हैं। अन्य दलों के प्रत्याशी भी जीत के दावे कर रहे हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि जो भी प्रत्याशी या पार्टी मतदाताओं को अपना पक्ष समझाने में सफल हो जाएगी नगीना की जीत का 'नगीना' उसी की अंगूठी में होगा।

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Jaswant files nomination from barmer as Independent candidate today

बाड़मेर की सीट से टिकट न देने से नाराज भाजपा के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह सोमवार को कुछ खुलासे करने वाले हैं। इन खुलासों के सामने आने से पहले ही पार्टी में चिंता की लकीरें साफतौर पर देखी जा रही हैं। पार्टी फिलहाल इतना ही कह रही है कि यदि वह भाजपा छोड़कर जाते हैं तो यह दुखद होगा। आज ही जसवंत सिंह ने बाड़मेर सीट से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया।

दो दिन पहले ही उन्होंने जैसलमेर पहुंचने पर मीडिया से कहा था कि वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर बाड़मेर सीट से नामांकन भरने के लिए तैयार हैं। लेकिन वह इससे पहले कुछ खुलासे भी करेंगे। कल ही उन्होंने भाजपा के नेताओं पर अहंकारी होने का भी आरोप लगाया था। उन्होंने अमृतसर के प्रत्याशी अरुण जेटली के बयान के जवाब में कहा था कि वह कोई सामान नहीं है जिसको पार्टी को एडजेस्ट करना पड़ेगा।

गौरतलब है कि नौ बार से सांसद जसवंत सिंह मौजूदा समय में दार्जिलिंग से सांसद हैं। इस बार उन्होंने बाड़मेर सीट से टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने उन्हें नजरअंदाज कर कुछ दिन पहले पार्टी में शामिल हुए कर्नल सोनाराम को लोकसभा का टिकट दे दिया। इससे नाराज जसवंत ने अब बागी तेवर अपनाते हुए पार्टी को तिलांजली देने का भी मन बना लिया है।

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