Rao Inderjit Singh eyes Modi wave to fight 'opportunist'
गुड़गांव लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी राव इंद्रजीत सिंह का मानना है कि देशभर में चल रही मोदी की लहर उनकी जीत में सहायक बनेगी। लगभग 35 साल तक कांग्रेस में रहने के बाद राव इंद्रजीत सिंह ने भाजपा का दामन थामा है। भाजपा का दामन थामने के बाद आलोचकों द्वारा अवसरवादी कहे जाने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का कहना है कि आंतरिक राजनीति का शिकार होने की वजह से उन्हें कांग्रेस छोड़नी पड़ी।
इस सीट से तीन बार लोकसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके इंद्रजीत पिछले साल सितंबर में कांग्रेस से नाता तोड़ने के बाद इस साल फरवरी में भाजपा में शामिल हुए थे। इस बार आम आदमी पार्टी [पार्टी] के वरिष्ठ नेता योगेंद्र यादव में उनके खिलाफ चुनाव मैदान में हैं। योगेंद्र यादव के चुनाव मैदान में कूदने से गुड़गांव लोकसभा सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है और देश की नजरें इस सीट पर लग गई हैं। सन् 2009 में बसपा प्रत्याशी जाकिर हुसैन को हराने वाले राव इंद्रजीत को इस बार भी अपनी जीत का पूरा भरोसा है।
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत राव बीरेंद्र सिंह के बेटे इंद्रजीत संप्रग के पहले कार्यकाल में राज्यमंत्री थे। उन्होंने कहा कि प्रचार के समय मुझे अहसास हुआ कि मतदाता इससे अवगत हैं कि (संप्रग) सत्ता विरोधी लहर पर कौन सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार होगा। दिल्ली में जैसा उन्होंने किया वैसा वे नहीं कर सकते। आम आदमी पार्टी की आलोचना करते हुए सिंह ने कहा कि यह एक स्वयंभू संगठन है जो लगातार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का मान घटा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मेरी स्पर्धा सिर्फ इंडियन नेशनल लोकदल उम्मीदवार हुसैन से है, क्योंकि मेवात क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ है। इंद्रजीत ने कहा कि गुड़गांव में भी मोदी लहर है और इसके कारण मुझे व्यापक समर्थन मिल रहा है।
सिंह ने हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर इस क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि विकास का कार्य कुछ चुने हुए क्षेत्रों तक सीमित रह गया। मैंने लगभग 36 साल तक कांग्रेस की सेवा की, परंतु पिछले 10 साल से मेरे साथ कैसा सलूक किया गया यह सब जानते हैं। हुड्डा सरकार का सारा ध्यान नए गुड़गांव के विकास में रहा, जबकि पुराने गुड़गांव की उपेक्षा की गई। कांग्रेस से अलग होने के बाद राव इंद्रजीत ने हरियाणा इंसाफ मंच का गठन किया था। भाजपा में शामिल होने के साथ ही उसका विलय भी पार्टी में कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में मेरी सुनवाई नहीं हो रही थी, इसलिए मैंने अपनी आवाज उठाने के लिए इंसाफ मंच का गठन किया। राव इंद्रजीत ने कहा कि कुछ राजनेताओं द्वारा भूमि हथियाने के मुद्दों को मैं शिद्दत से उठाता रहूंगा। 63 वर्षीय नेता ने कहा कि वे पुराने गुड़गांव में ढांचागत विकास की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने माना कि पुराने गुड़गांव क्षेत्र में पब्लिक ट्रांसपोर्ट एक बड़ी समस्या है। मैं सुनिश्चित करूंगा कि द्वारका मेट्रो पुराने गुड़गांव के क्षेत्र से जुड़े। मेट्रो आने के बाद केवल गुड़गांव के नवविकसित क्षेत्रों का ही तेजी से विकास हुआ है।
इस सीट से तीन बार लोकसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके इंद्रजीत पिछले साल सितंबर में कांग्रेस से नाता तोड़ने के बाद इस साल फरवरी में भाजपा में शामिल हुए थे। इस बार आम आदमी पार्टी [पार्टी] के वरिष्ठ नेता योगेंद्र यादव में उनके खिलाफ चुनाव मैदान में हैं। योगेंद्र यादव के चुनाव मैदान में कूदने से गुड़गांव लोकसभा सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है और देश की नजरें इस सीट पर लग गई हैं। सन् 2009 में बसपा प्रत्याशी जाकिर हुसैन को हराने वाले राव इंद्रजीत को इस बार भी अपनी जीत का पूरा भरोसा है।
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत राव बीरेंद्र सिंह के बेटे इंद्रजीत संप्रग के पहले कार्यकाल में राज्यमंत्री थे। उन्होंने कहा कि प्रचार के समय मुझे अहसास हुआ कि मतदाता इससे अवगत हैं कि (संप्रग) सत्ता विरोधी लहर पर कौन सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार होगा। दिल्ली में जैसा उन्होंने किया वैसा वे नहीं कर सकते। आम आदमी पार्टी की आलोचना करते हुए सिंह ने कहा कि यह एक स्वयंभू संगठन है जो लगातार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का मान घटा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मेरी स्पर्धा सिर्फ इंडियन नेशनल लोकदल उम्मीदवार हुसैन से है, क्योंकि मेवात क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ है। इंद्रजीत ने कहा कि गुड़गांव में भी मोदी लहर है और इसके कारण मुझे व्यापक समर्थन मिल रहा है।
सिंह ने हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर इस क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि विकास का कार्य कुछ चुने हुए क्षेत्रों तक सीमित रह गया। मैंने लगभग 36 साल तक कांग्रेस की सेवा की, परंतु पिछले 10 साल से मेरे साथ कैसा सलूक किया गया यह सब जानते हैं। हुड्डा सरकार का सारा ध्यान नए गुड़गांव के विकास में रहा, जबकि पुराने गुड़गांव की उपेक्षा की गई। कांग्रेस से अलग होने के बाद राव इंद्रजीत ने हरियाणा इंसाफ मंच का गठन किया था। भाजपा में शामिल होने के साथ ही उसका विलय भी पार्टी में कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में मेरी सुनवाई नहीं हो रही थी, इसलिए मैंने अपनी आवाज उठाने के लिए इंसाफ मंच का गठन किया। राव इंद्रजीत ने कहा कि कुछ राजनेताओं द्वारा भूमि हथियाने के मुद्दों को मैं शिद्दत से उठाता रहूंगा। 63 वर्षीय नेता ने कहा कि वे पुराने गुड़गांव में ढांचागत विकास की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने माना कि पुराने गुड़गांव क्षेत्र में पब्लिक ट्रांसपोर्ट एक बड़ी समस्या है। मैं सुनिश्चित करूंगा कि द्वारका मेट्रो पुराने गुड़गांव के क्षेत्र से जुड़े। मेट्रो आने के बाद केवल गुड़गांव के नवविकसित क्षेत्रों का ही तेजी से विकास हुआ है।
Source: Lok Sabha Elections 2014
Labels: Lok Sabha Elections 2014


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