Tuesday, April 1, 2014

BJP preparation of saffron tide

दूसरे चरण के चुनाव से पहले रुहेलखंड में भाजपा की पहली बड़ी रैली के बाद तो कहने के लिए यह तीन उम्मीदवारों बरेली से संतोष गंगवार, आंवला से धर्मेद्र कश्यप और पीलीभीत से मेनका गांधी के लिए हो हुई, लेकिन इसका संदेश रुहेलखंड की सभी 11 लोकसभा सीटों तक पहुंचाने की कोशिश है। इन तीन में से भाजपा के पास दो सीट हैं। बरेली की सीट भाजपा ने पिछले चुनाव में कांग्रेस के हाथों गंवा दी थी। रैली के फोकस में यही सीट होगी, क्योंकि बरेली भाजपा का लंबे समय तक गढ़ रहा है। 

उम्मीद की जा रही है कि इस सीट पर वापसी के लिए मोदी कुछ ऐसा जरूर कहकर जाएंगे, जिससे भाजपा का परंपरागत वोट एकजुट हो सके, जो किन्हीं कारणों से पिछले चुनाव में छिटक गया था। आंवला और पीलीभीत सीट पहले से भाजपा के पास है। बदलाव महज इतना है कि मेनका गांधी सांसद आंवला से हैं, इस बार पीलीभीत से लड़ रही हैं। पीलीभीत से उनके सुपुत्र वरुण गांधी सांसद थे, जो अब सुल्तानपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने आंवला से मेनका गांधी की जगह धर्मेद्र कश्यप को उतारा है, जो पिछली साथ मेनका गांधी से मुकाबले में बतौर सपा प्रत्याशी रनर थे। पिछले चुनाव में वही मेनका गांधी से कम वोटों के अंतर से हारे थे। अभी तक के चुनावी समीकरणों में इन तीनों सीटों पर भाजपा मुख्य मुकाबले में है। अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की रैली के जरिये भाजपा तीनों सीटों पर परचम फहराने का मंसूबा लेकर तैयारी में जुटी है। भाजपा नेताओं का भी मानना है कि नब्ज भांपने के महारथी मोदी यहां कुछ ऐसा जरूर कहकर जाएंगे, जिससे उनके मंसूबों को पंख लग जाएंगे। मोदी की रैलियों में सभी जगह भीड़ उमड़ रही है, यहां भी दावे और अनुमान दोनों आसमान पर हैं। ख्याल इस बात का भी रखा जा रहा है कि रुहेलखंड में अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा है, इसलिए कोई ऐसी बात नहीं हो, जिसे मुद्दा बनाकर विरोधी दल अल्पसंख्यकों को शिद्दत से भड़का सके। कुल मिलाकर रैली के जरिए रूहेलखंड में भाजपा पूरे चुनाव को मोदी बनाम सब करने की तैयारी में है।

महीनों कयासबाजी और लंबी जद्दोजहद.. आखिरकार रुहेलखंड के इलेक्शन बॉक्स ऑफिस पर के रिलीज का रास्ता साफ हो ही गया। एक अप्रैल यानी मंगलवार को जनता के सामने होगी, उनसे रूबरू होगी.. नए तेवर और कलेवर के साथ। डायरेक्टर [भाजपा] को पूरी उम्मीद है, इस दफा फिल्म उम्मीद से बढ़कर सफलता हासिल करेगी।

मोदी-1 की नाकामी का दाग भी धुलेगा। इसीलिए फिल्म में सस्पेंस के साथ एक्शन, इमोशन और पब्लिसिटी का भरपूर तड़का लगाया गया है। डिस्ट्रीब्यूटर [स्थानीय संगठन] भी फिल्म को कामयाब बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

मोदी-टू.। सोचकर थोड़ा अजीब जरूर लगे लेकिन सोशल मीडिया में इन दिनों बॉलीवुड फिल्म दबंग-टू की तरह भाजपा प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का पोस्टर जबरदस्त हिट हो रहा है। रुहेलखंड के संदर्भ में यह फार्मूला इसलिए भी 'हिट' है क्योंकि नरेंद्र मोदी दूसरी दफा रुहेलखंड की सरजमीं पर अपनी ताकत का अहसास कराने पहुंचेंगे। 

रुहेलखंड के इलेक्शन बॉक्स ऑफिस पर भाजपा ने पहली बार मोदी-वन 2009 के लोक सभा चुनाव में रिलीज की थी। तारीख थी, 10 मई। दिन सोमवार। स्थान था, बरेली इंटर कॉलेज और वक्त शाम के 7.20 बजे। मोदी-1 'फिल्म' में बेशक नरेंद्र मोदी की मौजूदगी थी, लेकिन भूमिका साइड हीरो [स्टार प्रचारक] की थी। वे सफलता का 'छक्का' लगा चुके फिल्म के अहम किरदार संतोष गंगवार को प्रमोट करने पहुंचे थे लेकिन.लाख कोशिश के बाद भी मोदी-1 सफल नहीं हो सकी। न केवल पूरी भाजपा इलेक्शन बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी, बल्कि संतोष का सातवां फेरा भी अधूरा रह गया। हालांकि, 2009 में मोदी-1 बेशक फ्लॉप रही, मोदी भी साइड हीरो थे, लेकिन तेवर और अलग अंदाज के दम पर उन्होंने जनता के बीच जबरदस्त मौजूदगी दर्ज कराई थी। 

उनके 'डायलॉग्स' कुछ ऐसे गूंजे, अहसास करा गए कि अगले इलेक्शन में जरूर बनेगी। तब उस फिल्म में नरेंद्र मोदी साइड हीरो नहीं, बल्कि मेन लीड रोल में होंगे। आज पांच साल बाद.नतीजा सामने है। रुहेलखंड में रिलीज को तैयार है और मेन हीरो [प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार] नरेंद्र मोदी ही हैं। देखना अब यह होगा कि जनता के बीच कितना सफल हो पाएगी। संतोष का सातवां फेरा पूरा होगा, मेनका की घर वापसी कितनी कारगर होगी। धर्मेद्र पहली बार रुहेलखंड लांघकर दिल्ली जा सकेंगे बगैरह-वगैरह।

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