Loksabha election:life of sabar tribe
भारत की आजादी के बाद से चुनाव अपने नियत समय पर हमेशा आते हैं लेकिन अफसोस कि गली-नुक्कड़ तक वोटरों को लुभाने का राग अलापने वाले नेता भी उपेक्षित जगहों पर नहीं जाना चाहते। सरकार कहती है झारखंड की सबर जनजाति लुप्तप्राय है। उसकी इन बातों को सबसे बड़ा बल यहां आकर मिलता है। सच में, पर्याप्त पानी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ये जनजाति जल्द लुप्त होने की कगार पर है। करीब 115 लोगों की जनसंख्या वाले क्षेत्र खडि़याकोचा में आजादी के बाद से न कोई विधायक आया न सांसद।जमशेदपुर संसदीय क्षेत्र के पोटका प्रखंड मुख्यालय से महज 25 किलोमीटर दूर खड़ियाकोचा में घुसते ही दो सबर महिलाओं से भेंट होती है। बंगरी सबर और पारो सबर। उम्र 40 से ऊपर। दोनों लकड़ी काटने जा रही हैं। वोटर कार्ड के बारे में पूछने पर चौंककर बोली चुनाव आ गया क्या? बोलीं, गांव वालों को तो चुनाव के बारे में कुछ पता ही नहीं। यहां कोई वोटर कार्ड बनाने वाला भी नहीं आया। गांव में लगभग 50 मतदाता हैं, उनमें से महज 19 लोगों के पास वोटर कार्ड है। यहां के वृद्धों व विधवाओं को कोई पेंशन नहीं मिलती। सरकारी सुविधा नदारद, गांव में सब भूखे-नंगे। बीमार हुए तो भगवान सहारा। गांव में सड़क नहीं है। जंगल झाड़ियों को काटकर रास्ता बनाया है। बिजली की बात छोड़िए, ढिबरी- लालटेन के लिए केरोसिन मिल जाए तो रात कटती है। पानी नहीं है, आसपास के तालाब-गड्ढों से प्यास बुझती है। प्रशासन के किसी अधिकारी ने भी इस ओर रुख नहीं किया। गांव में कुल 22 घर हैं जिनमें 115 लोग रहते हैं।
Source: Lok Sabha Polls 2014
Labels: election news 2014, Lok Sabha Elections 2014 Candidates, lok sabha elections 2014 opinion poll, Lok Sabha Elections 2014 Prediction, lok sabha elections 2014 schedule

0 Comments:
Post a Comment
Subscribe to Post Comments [Atom]
<< Home