Tuesday, April 1, 2014

BJP preparation of saffron tide

दूसरे चरण के चुनाव से पहले रुहेलखंड में भाजपा की पहली बड़ी रैली के बाद तो कहने के लिए यह तीन उम्मीदवारों बरेली से संतोष गंगवार, आंवला से धर्मेद्र कश्यप और पीलीभीत से मेनका गांधी के लिए हो हुई, लेकिन इसका संदेश रुहेलखंड की सभी 11 लोकसभा सीटों तक पहुंचाने की कोशिश है। इन तीन में से भाजपा के पास दो सीट हैं। बरेली की सीट भाजपा ने पिछले चुनाव में कांग्रेस के हाथों गंवा दी थी। रैली के फोकस में यही सीट होगी, क्योंकि बरेली भाजपा का लंबे समय तक गढ़ रहा है। 

उम्मीद की जा रही है कि इस सीट पर वापसी के लिए मोदी कुछ ऐसा जरूर कहकर जाएंगे, जिससे भाजपा का परंपरागत वोट एकजुट हो सके, जो किन्हीं कारणों से पिछले चुनाव में छिटक गया था। आंवला और पीलीभीत सीट पहले से भाजपा के पास है। बदलाव महज इतना है कि मेनका गांधी सांसद आंवला से हैं, इस बार पीलीभीत से लड़ रही हैं। पीलीभीत से उनके सुपुत्र वरुण गांधी सांसद थे, जो अब सुल्तानपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने आंवला से मेनका गांधी की जगह धर्मेद्र कश्यप को उतारा है, जो पिछली साथ मेनका गांधी से मुकाबले में बतौर सपा प्रत्याशी रनर थे। पिछले चुनाव में वही मेनका गांधी से कम वोटों के अंतर से हारे थे। अभी तक के चुनावी समीकरणों में इन तीनों सीटों पर भाजपा मुख्य मुकाबले में है। अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की रैली के जरिये भाजपा तीनों सीटों पर परचम फहराने का मंसूबा लेकर तैयारी में जुटी है। भाजपा नेताओं का भी मानना है कि नब्ज भांपने के महारथी मोदी यहां कुछ ऐसा जरूर कहकर जाएंगे, जिससे उनके मंसूबों को पंख लग जाएंगे। मोदी की रैलियों में सभी जगह भीड़ उमड़ रही है, यहां भी दावे और अनुमान दोनों आसमान पर हैं। ख्याल इस बात का भी रखा जा रहा है कि रुहेलखंड में अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा है, इसलिए कोई ऐसी बात नहीं हो, जिसे मुद्दा बनाकर विरोधी दल अल्पसंख्यकों को शिद्दत से भड़का सके। कुल मिलाकर रैली के जरिए रूहेलखंड में भाजपा पूरे चुनाव को मोदी बनाम सब करने की तैयारी में है।

महीनों कयासबाजी और लंबी जद्दोजहद.. आखिरकार रुहेलखंड के इलेक्शन बॉक्स ऑफिस पर के रिलीज का रास्ता साफ हो ही गया। एक अप्रैल यानी मंगलवार को जनता के सामने होगी, उनसे रूबरू होगी.. नए तेवर और कलेवर के साथ। डायरेक्टर [भाजपा] को पूरी उम्मीद है, इस दफा फिल्म उम्मीद से बढ़कर सफलता हासिल करेगी।

मोदी-1 की नाकामी का दाग भी धुलेगा। इसीलिए फिल्म में सस्पेंस के साथ एक्शन, इमोशन और पब्लिसिटी का भरपूर तड़का लगाया गया है। डिस्ट्रीब्यूटर [स्थानीय संगठन] भी फिल्म को कामयाब बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

मोदी-टू.। सोचकर थोड़ा अजीब जरूर लगे लेकिन सोशल मीडिया में इन दिनों बॉलीवुड फिल्म दबंग-टू की तरह भाजपा प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का पोस्टर जबरदस्त हिट हो रहा है। रुहेलखंड के संदर्भ में यह फार्मूला इसलिए भी 'हिट' है क्योंकि नरेंद्र मोदी दूसरी दफा रुहेलखंड की सरजमीं पर अपनी ताकत का अहसास कराने पहुंचेंगे। 

रुहेलखंड के इलेक्शन बॉक्स ऑफिस पर भाजपा ने पहली बार मोदी-वन 2009 के लोक सभा चुनाव में रिलीज की थी। तारीख थी, 10 मई। दिन सोमवार। स्थान था, बरेली इंटर कॉलेज और वक्त शाम के 7.20 बजे। मोदी-1 'फिल्म' में बेशक नरेंद्र मोदी की मौजूदगी थी, लेकिन भूमिका साइड हीरो [स्टार प्रचारक] की थी। वे सफलता का 'छक्का' लगा चुके फिल्म के अहम किरदार संतोष गंगवार को प्रमोट करने पहुंचे थे लेकिन.लाख कोशिश के बाद भी मोदी-1 सफल नहीं हो सकी। न केवल पूरी भाजपा इलेक्शन बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी, बल्कि संतोष का सातवां फेरा भी अधूरा रह गया। हालांकि, 2009 में मोदी-1 बेशक फ्लॉप रही, मोदी भी साइड हीरो थे, लेकिन तेवर और अलग अंदाज के दम पर उन्होंने जनता के बीच जबरदस्त मौजूदगी दर्ज कराई थी। 

उनके 'डायलॉग्स' कुछ ऐसे गूंजे, अहसास करा गए कि अगले इलेक्शन में जरूर बनेगी। तब उस फिल्म में नरेंद्र मोदी साइड हीरो नहीं, बल्कि मेन लीड रोल में होंगे। आज पांच साल बाद.नतीजा सामने है। रुहेलखंड में रिलीज को तैयार है और मेन हीरो [प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार] नरेंद्र मोदी ही हैं। देखना अब यह होगा कि जनता के बीच कितना सफल हो पाएगी। संतोष का सातवां फेरा पूरा होगा, मेनका की घर वापसी कितनी कारगर होगी। धर्मेद्र पहली बार रुहेलखंड लांघकर दिल्ली जा सकेंगे बगैरह-वगैरह।

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Rahul reject modi development model of gujarat

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर देश भर में तूफानी प्रचार पर निकले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी राज्य के पार्टी प्रभारी हरी प्रसाद के साथ झारखंड के गोडा पहुंच गए हैं। जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल ने भाजपा पीएम पद उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के गुजरात मॉडल पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा देश में गुजरात मॉडल नहीं चलेगा।

आगामी लोकसभा चुनाव में यूपीए-3 को विजयी बनाने का आह्वान करते हुए राहुल ने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो हम महिलाओं को आरक्षण देंगे। बता दें कि गोडा सीट से कांग्रेस के फुरकन अंसारी चुनाव मैदान में हैं।

गौरतलब है कि आज राहुल बिहार के औरंगाबाद समेत कई अन्य जगहों पर चुनावी जनसभाओं को संबोधित करेंगे। हालांकि इस रैली में राष्ट्रीय जनता दल [राजद] अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव इस रैली में शिरकत नहीं करेंगे। लालू ने साफ किया है कि बिहार में इस सप्ताह सोनिया और राहुल की होने वाली सभाओं में उनके जाने का कोई कार्यक्रम नहीं है।

राहुल मंगलवार को औरंगाबाद में पार्टी प्रत्याशी निखिल कुमार के पक्ष में चुनावी सभा को संबोधित करेंगे, वहीं सोनिया तीन अप्रैल को सासाराम में एक चुनावी सभा को संबोधित करेंगी। सासाराम से लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार कांग्रेस की प्रत्याशी हैं।

लालू ने मीडिया से बात करते हुए सोमवार को कहा कि कांग्रेस और राजद के नेता अलग-अलग चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं, इसमें यह जरूरी नहीं है कि दोनों दलों के नेता एक साथ शामिल ही हों। राहुल और सोनिया पूरे देश में दौरा कर रहे हैं। लालू ने कहा कि बिहार में उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा जा रहा है। गौरतलब है कि चुनावी तालमेल के तहत बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से राजद 27 सीटों पर जबकि कांग्रेस 12 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एक सीट पर चुनाव लड़ रही है।

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Monday, March 31, 2014

Mukul returns AAP ticekt from Farrukhabad

बीमार होने के कारण चंडीगढ़ का रोड शो छोड़कर दिल्ली लौटे आप के संयोजक को फर्रुखाबाद में तगड़ा झटका लगा है। फर्रुखाबाद में इनके प्रत्याशी ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया है।

मुकुल त्रिपाठी के चुनाव लड़ने से मना कर देने से विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को भ्रष्टाचार के मामले में घेरने की अरविंद केजरीवाल की योजना पर पानी फिर गया है। केजरीवाल ने फर्रुखाबाद के बारे में विशेष योजना तैयार की थी और कई बार अपने साथ पार्टी के तमाम वरिष्ठ सहयोगियों को लेकर फर्रुखाबाद में चुनावी लड़ाई की जमीन तैयार की थी। विकलांग जनों को उपकरण वितरण में घोटालों के घेरे में आए सलमान खुर्शीद को विकलांग मुकुल त्रिपाठी के जरिए घेरने की केजरीवाल की उम्मीद टूटती नजर आ रही है।

मुकुल त्रिपाठी ने पार्टी पर अपनी उपेक्षा का आरोप लगाया है। मुकुल ने कहा कि चुनाव से पहले तो अरविंद केजरीवाल सहित आप के तमाम बड़े नेता फर्रुखाबाद में जमे रहते थे लेकिन जब वास्तव में जरूरत है तो सभी ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। पार्टी की इस उपेक्षा के कारण अब मेरा अकेले चुनाव लड़ना संभव नहीं हैं। इस कारण मैं पार्टी का टिकट लौटा रहा हूं।

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Intervention of political families

महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश की राजनीति में राजनीतिक परिवारों का निर्णायक दखल रहा है। केंद्र की राजनीति को भी ये रिमोट कंट्रोल के जरिये प्रभावित करते रहे हैं। वंशवृक्ष सीरीज की अंतिम कड़ी में अतुल चतुर्वेदी की एक नजर:

महाराष्ट्र

बाल ठाकरे (1926-2012)

शिव सेना के संस्थापक। पार्टी को राज्य की सत्ता तक पहुंचाया। रिमोट कंट्रोल के जरिये पार्टी और राज्य की सत्ता को चलाया। मराठी मानुष की राजनीति के पोषक। राजनीतिक विरासत सबसे छोटे पुत्र उद्धव ठाकरे को सौंपी। इसके चलते महत्वाकांक्षी भतीजे राज ठाकरे ने पार्टी छोड़ी। यह चुनाव उद्धव के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि पहली बार उनके नेतृत्व में शिव सेना लड़ रही है। इनके पुत्र आदित्य ठाकरे को शिव सेना के भविष्य के नेता के रूप में देखा जा रहा है। राज ठाकरे ने शिव सेना से अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) का गठन किया। राज्य में पार्टी की सियासी जमीन बढ़ रही है। भाजपा-शिवसेना गठबंधन चुनाव लड़ रहा है। मनसे ने चुनाव बाद नरेंद्र मोदी को समर्थन देने की घोषणा की है।

शरद पवार (1940)

मराठा राजनीति के क्षत्रप। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता। सियासी रुख को भांपने में माहिर खिलाड़ी। देश के कृषि मंत्री। एक जमाने में कांग्रेस के कद्दावर नेता। सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे को उठाते हुए पार्टी छोड़ी। ज्योति बसु ने बाद में कहा था कि यदि शरद पार्टी नहीं छोड़ते तो देश के प्रधानमंत्री बनते। कांग्रेस से अलग होने के बाद 1999 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन किया। इस बार चुनाव नहीं लड़ने का निश्चय किया है। बेटी सुप्रिया सुले भी बारामती से संसद सदस्य है। भतीजे अजीत पवार राज्य के कांग्रेस-राकांपा मंत्रिमंडल में ताकतवर सिंचाई मंत्री। माना जा रहा है कि राज्य में अपने वारिस के तौर पर अजीत को तैयार कर रहे हैं और राष्ट्रीय क्षितिज पर सुप्रिया पार्टी की बागडोर संभालेंगी।

आंध्र प्रदेश

एनटी रामाराव (1923-1996)

तेलुगु देसम के संस्थापक। राज्य के मुख्यमंत्री रहे। उनकी विरासत को दामाद एन चंद्रबाबू नायडू आगे बढ़ा रहे हैं। दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहने के बाद लगभग एक दशक से सत्ता से बाहर हैं। उनके लिए यह चुनाव बेहद अहमियत रखता है क्योंकि इसके नतीजों से उनके सियासी भविष्य का रास्ता तय होता है। एनटी रामाराव की पुत्री डी पुरंदेश्वरी केंद्र सरकार में वाणिज्य और उद्योग राज्यमंत्री थीं। सात मार्च को भाजपा में शामिल होकर अपनी परंपरागत विशाखापत्तनम सीट से चुनाव लड़ रही हैं।

वाइएस राजशेखर रेड्डी (1949-2009)

2004 में 10 वर्षो बाद कांग्रेस को आंध्र प्रदेश की सत्ता में लाने का श्रेय इन्हें जाता है। पेशे से डॉक्टर राज्य के ऐसे मुख्यमंत्री थे जो जनता के बीच बेहद लोकप्रिय थे। विमान दुर्घटना में निधन। पुत्र जगनमोहन ने मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने के कारण विरोध के चलते पार्टी छोड़कर वाइएसआर कांग्रेस का गठन किया। यह चुनाव उनके लिए अग्निपरीक्षा की घड़ी है। इसके नतीजे उनके सियासी भविष्य को तय करेंगे।

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Sonia Gandhi attacks on BJP during Delhi Election Rally for "talking big"

77 के आम चुनाव में कांग्रेस के सफाए के दो साल बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की रैली दिल्ली के अजमल खां पार्क में हुई थी। कांग्रेसी दावा करते हैं कि उसी के बाद कांग्रेस की वापसी शुरू हुई। करीब 35 साल बाद रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उसी पार्क में पार्टी के पस्त सूरमाओं में जोश फूंकने पहुंचीं।

चुनावी थकान के बावजूद तल्ख तेवरों में सोनिया ने नाम लिए बगैर भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा तो दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर भी मैदान छोड़कर भागने का आरोप लगाने से नहीं चूकीं। बोलीं, सरकार चलाना कोई बच्चों का खेल नहीं है। दिल्ली में सरकार तो बना ली लेकिन बाद में मैदान छोड़कर भाग खड़े हुए। सोनिया ने साफ कर दिया कि सरकार बनाना और चलाना कांग्रेस के लिए कोई नई बात नहीं है। लेकिन यह चुनाव विचारधारा की लड़ाई है। एक ओर कट्टरता, बांटने वाली, भाई-भाई में भेद करने वाली विचारधारा है तो दूसरी ओर कांग्रेस की विचारधारा है जो पूरे समाज को जोड़ने वाली और विपक्षियों से भी सद्भावना रखने वाली है। उन्होंने कहा कि जो बलिदान की बातें करते हैं, उन्हें इसके बारे में कुछ नहीं पता। कांग्रेस ने ही देश की गंगा-जमुनी तहजीब को जिंदा रखा है।

इससे पहले असम के लखीमपुर जिले में आयोजित रैली में संप्रग अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा देश में नफरत की राजनीति फैला रही है। उन्होंने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि वे देश भर में बड़ी-बड़ी बातें कर जनता को बहला रहे हैं। लेकिन जब केंद्र में उनकी सरकार थी तो उन्होंने कुछ नहीं किया। बोलीं, संप्रग झूठा वादा नहीं करती, जो भी कहा देश के सामने पूरा किया। 'हर हाथ शक्ति, हर हाथ तरक्की' का नारा देते हुए कहा कि कांग्रेस इस तरह की राजनीति में विश्वास करती है। उसके नेताओं ने देश के लिए अपना खून बहाया है। आजादी से पहले और उसके बाद विपक्ष का कहीं कोई नामोनिशान नहीं था। अब वे देश को बांटने में लगे हैं।

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Saturday, March 29, 2014

Analysis election crop gory in green revolution states

जिस पूर्वी क्षेत्र की दूसरी हरित क्रांति से देश खाद्यान्न के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गया, राजनीतिक रूप से भी अति उर्वरा इस जमीन पर अब वोटों की खेती शुरू हो गई है। लोकसभा की चुनावी जंग में सत्ता की कुंजी भी उसी के हाथ लगने वाली है, जिसके कब्जे में यहां की राजनीतिक जमीन होगी। इसी मकसद से भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और सपा प्रमुख मुलायम सिंह ने अपनी भी यहीं से ताल ठोंकी है।

हरितक्रांति की दूसरी अलख जगाने वाले पूर्वी क्षेत्र में लगभग पौने दो सौ संसदीय सीटें आती हैं। इसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में राजनीतिक दलों के बीच कड़ा संघर्ष है। केंद्र में सरकार बनाने में इस पूर्वी क्षेत्र की भूमिका अहम हो गई है। जाति व वर्गो में बंटे इस इलाके में गरीबी और बेरोजगारी की खाद ने राजनीतिक जमीन को और भी उर्वरा बना दिया है।

संप्रग के दूसरे कार्यकाल में यहां की उत्पादकता को दोगुना करने के मकसद से दूसरी हरितक्रांति की शुरुआत की गई थी, जिसे शत प्रतिशत सफलता मिली। खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। लिहाजा हरितक्रांति की योजना जारी है। दूसरी हरितक्रांति वाले पूर्वी क्षेत्र की इस धरती में अब सत्ता पर काबिज होने के लिए राजनीतिक दल वोट उगाने में जुट गए हैं।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में 32 संसदीय सीटों का जातीय समीकरण राजनीतिक दलों को लुभाने लगा है। 20 फीसद के आसपास यहां मुस्लिम मतदाता है, जो गैर भाजपा दलों के लिए बड़ा आकर्षण है। यही वजह है कि यहां की माटी में बसपा और समाजवादी पार्टी खूब फूल और फल रही है। दलित मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है जो बहुजन समाज पार्टी का बड़ा वोट बैंक है। पिछड़ी जातियों में मुलायम सिंह की जाति वाले मतदाताओं की संख्या भी खूब है, जिससे उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग का फायदा मिलता है।

लोकसभा चुनाव में भाजपा नरेंद्र मोदी को आगे कर जहां हिंदू व मुस्लिम ध्रुवीकरण का लाभ चाह रही है, वहीं मोदी के पिछड़ा होने का लाभ भी लेने का दांव चल दिया है। दूसरी ओर मुस्लिमों के सबसे बड़े खैरख्वाह और पिछड़े वोटों पर परंपरागत अपना अधिकार समझने वाले मुलायम को यह नागवार गुजरा, इसीलिए अपना गढ़ बचाने के लिए खुद आजमगढ़ से चुनाव मैदान में कूद पड़े।

पूर्वी राज्यों में बिहार में 40 सीट, झारखंड में 14, असम में 14, छत्तीसगढ़ में 11, ओड़िशा में 21 और पश्चिम बंगाल में 42 संसदीय सीटें हैं, जिसके लिए सबसे अधिक मारामारी है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस जहां एकतरफा चुनाव लड़ती दिख रही है, वहीं ओड़िशा में नवीन पटनायक सभी दलों पर भारी पड़ रहे हैं। बनारस से मोदी के चुनाव लड़ने से बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा की लहर से इन्कार नहीं किया जा सकता है।

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Analysis cast base politics starts in bihar

जाति आधारित राजनीति की जमीन रहे बिहार में एक बार फिर लोकसभा चुनाव के लिए नेता जातीय समीकरण बनाने की कोशिश में हैं। शुरू में विकास के नाम और दुहाई पर वोट मांगने वालों की राग अब जातीय हो गई है।

प्रत्येक सीट पर उतारे गए उम्मीदवारों के नाम पढ़कर भी इस समीकरण का एक खाका आसानी से दिखाई देता है। यहां जातियों को लेकर 'माई' (मुस्लिम -यादव), 'लव-कुश' (कुर्मी-कुशवाहा), 'डीएम' (दलित-मुस्लिम), एसडीएमवीएस (सवर्ण, दलित, मुस्लिम, वंचित समाज), महादलित जैसे समीकरण भी बनाए गए।

प्रदेश में जातीय विकास की राजनीति इस कदर हावी है कि शुक्रवार को कभी बिहार के पांच दिन के मुख्यमंत्री रहे सतीश प्रसाद सिंह ने यह कहते हुए भाजपा से इस्तीफा दे दिया कि पार्टी ने वायदे के मुताबिक कुशवाहा समाज के लोगों को टिकट नहीं दिया। कुछ दिन पहले जदयू छोड़ने वाले साबिर अली (राज्यसभा सदस्य) ने कहा था कि पार्टी ने उन्हें इसलिए टिकट नहीं दिया कि वो मुसलमान हैं। कुर्मी होते तो ऐसा नहीं होता।

जाति आधारित राजनीति के पुराने खिलाड़ी राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद सबको 'अहीर मरोड़' का दांव बता और समझा रहे हैं। कुर्मी बहुल इलाकों में उनकी सफाई होती है-'कुर्मी भाइयों, मैं हमेशा आपके दिल में रहा हूं। कुछ लोगों ने साजिश कर आपको मुझसे दूर करने की कोशिश की है।' सवर्ण जातियों को लेकर लालू आजकल कुछ ज्यादा आग्रही हैं। उनका कहना है कि 'मैंने कभी नहीं कहा कि भूरा बाल (भूमिहार, राजपूत, ब्राह्माण, लाला) को साफ करो।'

दरअसल, नेता जातीय बयानों की आड़ में अपने काम और वादे को छुपा लेते हैं। जातीय संगठन टिकट के लिए पार्टियों पर दबाव बनाने का चरण पूरा कर चुके हैं। अब फतवा का दौर चल रहा है जिसमें 'जाति तोड़ो-जनेऊ तोड़ो' जैसे नारों से हवा बनाने की कोशिश हो रही है।

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I am stumbling block for narendra modi nitish kumar

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी उन्हें अपनी राह का सबसे बड़ा रोड़ा मानते हैं। पटना में चुनाव प्रचार के दौरान शनिवार को नीतीश ने कहा कि लोग बेबुनियाद और मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं। इससे पहले राज्य के मुख्यमंत्री ने कल भी गया के इमामगंज और बेलागंज क्षेत्र में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए भी मोदी पर जमकर निशाना साधा था।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद को लोग अलग-अलग चश्मे से देख रहे हैं। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा कि लोगों को पूरे देश में दो ही दुश्मन नजर आ रहे हैं, एक भारत का मुसलमान और दूसरा नीतीश कुमार। गौरतलब है कि मोदी ने दो दिन पूर्व सासाराम और गया में रैली को संबोधित करते हुए नीतीश सरकार पर राज्य में आतंकवाद, बिजली और सिंचाई की समस्या को लेकर जमकर निशाना साधा था।

गौरतलब है कि जनता दल युनाइटेड [जदयू] पिछले वर्ष भाजपा से 17 वर्ष पुराना अपना गठबंधन तोड़ कर अलग हो गया था। इस बार लोकसभा चुनाव में दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने रामविलास पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी और उपेन्द्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के साथ इस बार गठबंधन किया है।

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Now sp leader comments on bsp supremo mayawati

अभी सहारनपुर में कांग्रेस प्रत्योशी इमरान मसूद द्वारा नरेन्द्र मोदी के खिलाफ जहर उगलने का मामला थमा भी नहीं था कि शामली में एक सभा को संबोधित करते हुए सपा के कैराना लोकसभा प्रत्यासी नाहिद हसन ने मायावती के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी कर बखेड़ा खड़ा कर दिया।

नाहिद ने बसपा सुप्रीमो मायावती पर निशाना साधते हुए कहा कि मायावती भाजपा नेता नरेन्द्र मोदी की गोद में तीन बार बैठ चुकी हैं। इसके आगे उन्होंने माया और मोदी को अविवाहित बताते हुए ऐसी आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके लिए आम बोलचाल की भाषा में भी कोई जगह नहीं है। कहा कि पहले मायावती को उनके बाबा ने हराया था, उसके बाद में उनके पिता से एक बार उनका पाला पड़ा था और अब यदि उनसे उसका पाला पड़ा तो आप खुद ही देख लो। उनका मतलब था के 1984 के लोकसभा चुनाव में उनके बाबा अख्तर हसन ने मायावती को हराया था। उसके बाद लखनउ में गेस्ट हाउस कांड उनके पिता मुनव्वर हसन का नाम भी उछला था। अब यदि मायावती उनके सामने प्रचार करने आती है तो वो भी उसे देख लेंगे। साथ ही नाहिद ने कहा कि मायावती का पागल हाथी शामली व कैराना में नही घुस पायेगा। गौरतलब है उनकी मां तबस्सुम हसन ने 2009 में कैराना से लोकसभा सीट से बसपा के ही टिकट पर चुनाव लड़कर संसद पहुंची थी। नाहिद की इस टिप्पंणी के बाद जिले का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। तमाम दलों ने इसकी निंदा की है।

वहीं, दूसरी ओर पुलिस प्रशासन का हाल यह है जो वीडियो दर्जनों हाथों में पहुंच चुका है उसे हासिल करने में पुलिस प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं। इस संबंध में जब पुलिस प्रशासन से बात की गई तो अधिकारियों ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि वीडियो क्लिप एकत्र करने के प्रयास किए जा रहे हें। माना जा रहा है पुलिस प्रशासन पर सत्तारूढ़ पार्टी का दबाव है और इसी कारण मामले में लीपा पोती के प्रयास किए जा रहे हैं। पूरे प्रकरण के मामले में नाहिद हसन से बात करने का कई बार प्रयास किया गया लेकिन वे उपलब्ध नहीं हो सके।

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Development model is better than gujarat akhilesh

सिकंदराबाद में आयोजित चुनावी रैली में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दावा किया कि जितना विकास सपा सरकार ने उत्तर प्रदेश में कराया है, कम समय में उतना रिकार्ड विकास किसी और ने नहीं कराया है।

रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग गुजरात के विकास मॉडल की बात कर रहे हैं, वे भ्रमित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विकास का मॉडल गुजरात से बेहतर है। अपने 20 मिनट के संबोधन के दौरान उन्होंने किसी भी पार्टी का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया। लेकिन प्रकारांतर से मोदी पर निशाना साधा। अखिलेश यादव हेलीकाप्टर से करीब 12.16 बजे सिकंदराबाद पहुंचे थे। संबोधन समाप्त करने के बाद वह बड़ौत के लिए रवाना हो गए।

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Aap got 1 million of donation in a day

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ काशी से चुनाव लड़ने का मन बना चुके आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जब चुनाव लड़ने के लिए लोगों से दान मांगा तो पार्टी को एक ही दिन में एक करोड़ रुपये चंदे के रूप में मिले हैं। हालांकि लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ने 200 करोड़ रुपये चंदे के रूप में एकत्रित होने का अनुमान लगाया था। मगर बृहस्पतिवार शाम छह बजे तक पार्टी की झोली में कुल चंदा 17,41,74,117 रुपये ही आया है।

पार्टी के नेता पंकज गुप्ता के अनुसार बुधवार और बृहस्पतिवार शाम तक के समय को मिलाकर पार्टी के पास एक करोड़ रुपये का चंदा आ गया है। इसमें हांगकांग निवासी गणेश रमानी ने पार्टी को सबसे बड़ी रकम 62.03 लाख रुपये चंदे के रूप में दी है। गुप्ता की मानें तो यह आप समर्थकों का मोदी का जवाब है।

बृहस्पतिवार शाम छह बजे तक चंदे के रूप में 33,20,126 रुपये आए हैं। यह 892 लोगों ने दिए हैं। एक दिन में मिले कुल चंदे में दिल्ली का हिस्सा देखते हुए पता चलता है कि दिल्ली में आप पार्टी के भले ही अधिक समर्थक हैं, लेकिन चंदा सबसे अधिक महाराष्ट्र के लोगों से मिला है। पार्टी को मिले इस चंदे में सबसे ज्यादा 21.5 फीसद महाराष्ट्र से है। दूसरे नंबर पर दिल्ली है, जहां से 21.3 फीसद चंदा आया है।

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Friday, March 28, 2014

AAP got 1 Million of donation in a day

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ काशी से चुनाव लड़ने का मन बना चुके आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जब चुनाव लड़ने के लिए लोगों से दान मांगा तो पार्टी को एक ही दिन में एक करोड़ रुपये चंदे के रूप में मिले हैं। हालांकि लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ने 200 करोड़ रुपये चंदे के रूप में एकत्रित होने का अनुमान लगाया था। मगर बृहस्पतिवार शाम छह बजे तक पार्टी की झोली में कुल चंदा 17,41,74,117 रुपये ही आया है।

पार्टी के नेता पंकज गुप्ता के अनुसार बुधवार और बृहस्पतिवार शाम तक के समय को मिलाकर पार्टी के पास एक करोड़ रुपये का चंदा आ गया है। इसमें हांगकांग निवासी गणेश रमानी ने पार्टी को सबसे बड़ी रकम 62.03 लाख रुपये चंदे के रूप में दी है। गुप्ता की मानें तो यह आप समर्थकों का मोदी का जवाब है।

बृहस्पतिवार शाम छह बजे तक चंदे के रूप में 33,20,126 रुपये आए हैं। यह 892 लोगों ने दिए हैं। एक दिन में मिले कुल चंदे में दिल्ली का हिस्सा देखते हुए पता चलता है कि दिल्ली में आप पार्टी के भले ही अधिक समर्थक हैं, लेकिन चंदा सबसे अधिक महाराष्ट्र के लोगों से मिला है। पार्टी को मिले इस चंदे में सबसे ज्यादा 21.5 फीसद महाराष्ट्र से है। दूसरे नंबर पर दिल्ली है, जहां से 21.3 फीसद चंदा आया है।

Source: Lok Sabha Elections 2014 Schedule

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Bihar Bjp trying to persuade Chaubey

बिहार में बक्सर से तीन बार सांसद रह चुके लालमुनि चौबे भाजपा छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ने के फैसले से अब पीछे हट गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार उनको मना लिया गया है। टिकट नहीं मिलने से नराज चौबे को बिहार प्रदेश इकाई मनाने में जुटी थी। भाजपा के पीएम प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने भी उनसे करीब 15 मिनट तक बातचीत की थी।

भाजपा इस बार नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के मिशन को पूरा करने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रही, लेकिन उसके कद्दावर नेता ही एक-एक करके उससे छिटक दूर होते जा रहे हैं। राजस्थान में जसवंत सिंह और बिहार में लालमुनि चौबे पर भाजपा ने दांव नहीं खेला। भाजपा को अपना मिशन पूरा करना था, इसलिए उसने जसवंत सिंह की जगह कांग्रेस से आए उम्मीदवार पर ही दांव खेला और बक्सर से पार्टी के वरिष्ठ नेता लालमुनि चौबे की जगह पर पार्टी के पूर्व मंत्री अश्विनी चौबे को अपना उम्मीदवार बनाया।

भाजपा ने जहां जसवंत सिंह को मनाने में कोई रुचि नहीं दिखाई वहीं, लालमुनि चौबे को मनाने के लिए खुद नरेंद्र मोदी ने फोन पर उनसे काफी देर तक बात की । बताया गया है कि लालमुनि चौबे का गुस्सा शांत हो गया है और अब वे चुनाव नहीं लड़ेंगे और पार्टी द्वारा तय प्रत्याशी और अपने ही चेले अश्विनी चौबे के पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगे।

राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं लालमुनि

लाल बाबा भी राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं और उन्हें राजनीति की नब्ज को अच्छी तरह जांचना और परखना आता है। राजनीति में अपना कद दर्शाने के लिए उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर दिया।

उनके निर्दलीय चुनाव लड़ने के फैसले के बाद बिहार भाजपा को अपनी एक सीट पर खतरे के बादल मंडराते दिखने लगे। जिससे खुद नरेंद्र मोदी को उनको मनाने के लिए फोन पर बात करनी पड़ी।

उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाया। लाल मुनि ने कहा कि तीन सौ किलोमीटर दूर के व्यक्ति को बक्सर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाने का कोई औचित्य नहीं है। चौबे ने पार्टी में बुजुर्गो की उपेक्षा व अपमान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बनारस से पार्टी के उम्मीदवार और भाजपा के पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रचार करने का एलान भी किया। चौबे बक्सर से चुनाव लड़ना चाह रहे थे। चौबे ने किसी भी पद की लालसा से भी पूरी तरह इन्कार किया। कहा कि उन्हें राज्यपाल बनने की लालसा नहीं है। लाल मुनि चौबे ने स्थानीय व्यक्ति को टिकट न दिए जाने को पूरे शाहाबाद का अपमान बताया। उन्होंने नेतृत्व से सवाल किया कि क्या पूरे इलाके में एक भी काबिल युवा नहीं था जिसे पार्टी अपना उम्मीदवार घोषित करती। चौबे ने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा को भी मुद्दा बनाया था।

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Sabir ali join bjp

जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से निष्कासित साबिर अली भी शुक्रवार को भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा का हाथ थामने के बाद साबिर अली ने कहा कि वह जिस पार्टी के साथ रहे हैं पूरी ईमानदारी से रहे हैं।

गौरतलब है कि साबिर अली जदयू के सबसे प्रभावशाली नेता थे। साबिर अली नीतीश कुमार के काफी करीबी भी माने जाते थे। भाजपा के पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी की प्रसंशा करने की वजह से उन्हें जदयू से निकाल दिया गया था। इस बात को लेकर पार्टी उनसे इतनी नाराज थी कि उन्हें हमेशा के लिए पार्टी से निकाल दिया, जबकि आम तौर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के तौर पर नेताओं को छह साल के लिए पार्टी से निकाला जाता है।

Source: Lok Sabha Elections 2014 Schedule

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Thursday, March 27, 2014

LIVE Narendra Modi Criticises Congress Manifesto

लोहरदगा/सासाराम/ गया। बिहार के गया में नरेंद्र मोदी की रैली में हंगामा हो गया। मोदी को देखने के लिए लोगों की भीड़ बेकाबू हो गई। इस अफरा तफरी में कई लोगों को चोटें भी आई। स्थिति पर नियंत्रण के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। लोगों का आरोप हैं कि सुरक्षा इंतजाम पुख्ता नहीं थे इस लिए ऐसी घटना हुई।

यहां नक्सलियों की चेतावनी के बावजूद भारी संख्या में लोग मोदी को सुनने पहुंचे थे। पूरा मैदान लोगों से खचाखच भरा हुआ था। यहां मोदी को देखने-सुनने के लिए बड़ी तादाद में लोग जुटे हुए थे। नरेंद्र मोदी जैसे ही मंच पर पहुंचे उन्हें देखने के लिए रैली स्थल पर अव्यवस्था फैलनी शुरू हो गई। कुछ लोग मंच की ओर बढ़े, तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिस के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण कुछ ही देर में आमतौर पर मोदी की रैली में संयमित दिखने वाली यह भीड़ हुड़दंग पर उतर आई।

पुलिस को धकेलते हुए भीड़ मीडिया वाले सुरक्षित क्षेत्र की ओर बढ़ने लगी। पुलिस ने इस दौरान हल्का लाठीचार्ज किया, तो भीड़ ने पथराव कर दिया। लोगों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और बांस इधर-उधर फेंकने लगे। यह हंगामा जब हो रहा था मोदी मंच पर मौजूद सब देख रहे थे। उनके साथ मंच पर मौजूद सुशील मोदी लोगों से शांत होने की अपील करते रहे, लेकिन हुड़दंग जारी रहा। 20 मिनट बाद हालात काबू में आए। इसके बाद ही मोदी ने अपना भाषण शुरू किया।

अपने अंदाज में मोदी ने रैली को संबोधित करते हुए केंद्र और प्रदेश सरकार पर हमला जारी रखा। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को सिर्फ कुर्सी की चिंता है। ये लोग कुर्सी से चिपके रहना चाहते हैं लेकिन अब इन्हें उखाड़ फेंकने का समय आ गया है।

मोदी ने कहा कि प्रदेश सरकार की अकर्मण्यता की वजह से गया में आतंकियों ने ब्लास्ट किए। इसका असर यहां के पर्यटन पर पड़ा है। जिसका खामियाजा इससे जुड़े लोगों को उठाना पड़ रहा है। मोदी ने कहा कि गया की भूमि तोड़ने की नहीं जोड़ने की है। विश्वविख्यात पर्यटक स्थल होने के बावजूद केंद्र और राज्य सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही।

इससे पहले सासाराम में एक बड़ी रैली को संबोधित करते हुए भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को केंद्र के साथ प्रदेश सरकार पर भी जम कर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यहां से इतने बड़े बड़े नेता हुए हैं तब भी यह क्षेत्र इतना पिछड़ा है। लोकसभा की अध्यक्ष मीरा कुमार इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं लेकिन उनके पिता जगजीवन राम का सपना आज भी अधूरा है। मोदी ने कहा कि सभी समस्या का एक ही हल है : विकास। उन्होंने कहा कि सासाराम पर बड़े नेताओं का बोझ है।

मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोलते उन्हें बिहार के लिए ग्रहण करार दिया। मोदी ने कहा कि नीतीश बिहार के विकास में ग्रहण हैं। जब वे हट जाएंगे तो बिहार का विकास शुरू होगा। बिहार में बिजली की कमी पर भी कटाक्ष करते हुए मोदी ने राज्य सरकार पर निशाना साधा और कहा कि अगर गुजरात में दो मिनट भी बिजली गुल हो जाती है तो खबर बन जाती है।

इसके अलावा मोदी ने केंद्र की यूपीए सरकार हमला करते हुए कहा कि दिल्ली की सरकार भरोसे लायक नहीं है। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस से संबंध विच्छेद करने का समय आ गया है। इससे पहले मोदी ने झारखंड में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि विकास का रास्ता बंदूक से नहीं, हल से आता है। भारत विजय रैली में मोदी ने झारखंड को लेकर पंडित जवाहर लाल नेहरू की सोच पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पंडित नेहरू ने झारखंड की मांग का मजाक उड़ाया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कार्यकाल में झारखंड को बनवाया था। यदि वह नहीं होते तो झारखंड का जन्म नहीं होता, इसके लिए हमें वाजपेयी का आभारी होना चाहिए।

मोदी ने कांग्रेस के घोषणापत्र पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यह झूठ का पिटारा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राज में महंगाई और भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है, जिससे आज आम आदमी परेशान है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने पहले के चुनावी वादों को पूरा नहीं किया है। कांग्रेस ने झारखंड की संपदा को लूटा है, जिससे यहां का विकास अवरूद्ध हुआ है। कांग्रेस ने आदिवासियों के लिए कुछ नहीं किया। अगर आदिवासियों का कोई भला कर सकती है तो वह भाजपा है।

उन्होंने अपने संबोधन में झारखंड के महापुरुषों का नाम लेते हुए इसे वीरों और बलिदानियों की भूमि कहा। यहां की खनिज संपदा की तारीफ की और कहा कि झारखंड अमीर है पर लोग गरीब हैं। नक्सली बंद पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि आज माओवादियों ने लोकतंत्र को ललकारा है। उन्होंने कहा कि विकास का रास्ता बंदूक से नहीं, हल से निकलता है।

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SP, BSP, Cong will be losers as Kejriwal takes on Modi

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भाजपा के पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी और आप के अरविंद केजरीवाल के बीच होने जा रहे मुकाबले पर पूरे देश की नजर है। हालांकि यहां से चुनाव लड़ने जा रहे अन्य दलों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इस मुकाबले की वजह से समाजवादी पार्टी, बसपा और कांग्रेस की हार पहले ही तय हो गई है।

गौरतलब है कि इस मुकाबले की वजह से मतों का जबरदस्त तरीके से ध्रुवीकरण होगा। मुसलिम मतदाताओं का झुकाव उस दल के साथ होगा जो मोदी को सबसे जोरदार तरीके से टक्कर देने में सक्षम होगा। आप के सूत्रों के मुताबिक इस मुकाबले की वजह से उत्तर प्रदेश की सबसे मजबूत दो पार्टियां सपा और बसपा सहित कांग्रेस की हार पहले से ही तय हो गई है।

आप का मानना है कि मुजफ्फरनगर दंगे का भी इसपर काफी असर होगा। अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का समर्थन आप को मिलेगा। उधर, भाजपा भी जानती है कि लोकसभा की सबसे अधिक सीटें उत्तर प्रदेश में है, अगर पार्टी को यहां से अधिक से अधिक सीटें जीतनी है तो मोदी को प्रदेश में किसी सीट से लड़ना होगा, इसका जनता में सकारात्मक संदेश जाएगा। साथ ही पड़ोसी राज्य की सीटों पर भी इसका व्यापक असर होगा।

उधर, आप की नजर भी प्रदेश में वोट के बड़े हिस्से पर है। केजरीवाल के मोदी से मुकाबले से आप को इसका फायदा होगा। अल्पसंख्यक समुदाय का झुकाव आप की तरफ होगा। आप का मानना है कि पार्टी की इस कदम का फायदा उन्हें अन्य राज्यों में भी मिलेगा जैसे दिल्ली, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में जहां आप का काफी प्रभाव है।

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Wednesday, March 26, 2014

Interesting contest will be seen in Delhi loksabha election

सियासी रणभेरी बजने के बाद सूबे के चुनावी मैदान में विभिन्न दलों के सूरमा अब आमने-सामने आ चुके हैं। कौन किसके खिलाफ लड़ेगा यह तय हो चुका है। तमाम दिग्गजों ने ताल भी ठोक दी है। दिल्ली का यह सियासी मुकाबला बेहद दिलचस्प और यादगार होने की उम्मीद है। दिल्ली के चुनावी मुकाबले का सबसे खास पहलू यह है कि पहली बार शहर में त्रिकोणीय मुकाबला होगा। अब तक कांग्रेस व भाजपा के बीच होती रही आमने-सामने की टक्कर में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी (आप) भी शामिल हो चुकी है। सियासी जानकारों के अनुसार आप के आने से शहर की सभी सातों सीटों पर हार-जीत का समीकरण उलझ गया है।

पूर्वी दिल्ली संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी संदीप दीक्षित जीत की हैट्रिक लगाने के लिए चुनाव मैदान में उतरे हैं तो भाजपा के महेश गिरी और आप प्रत्याशी व महात्मा गांधी के पौत्र राजमोहन गांधी पहली बार संसद पहुंचने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली सीट पर और भी जोरदार घमासान है। दिल्ली के पुराने कांग्रेसी नेता जयप्रकाश अग्रवाल को इस बार भोजपुरी फिल्मों के गायक व अभिनेता मनोज तिवारी से कड़ी टक्कर मिलने का अनुमान है। भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे तिवारी धुआंधार चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। इन दोनों नेताओं के बीच आप प्रत्याशी प्रोफेसर आनंद कुमार भी पहली बार अपनी सियासी किस्मत आजमा रहे हैं। उत्तर-पश्चिमी सीट पर भाजपा ने दलित नेता उदित राज को टिकट दिया है। कांग्रेस की ओर से केंद्रीय मंत्री कृष्णा तीरथ एक बार फिर यहां से सांसद बनने की जुगत में हैं। लेकिन इन दोनों प्रत्याशियों को अब आप की नेता व दिल्ली सरकार में मंत्री रहीं राखी बिड़ला की चुनौती से निपटना होगा। चांदनी चौक में कई दिग्गज चुनावी अखाड़े में हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. हर्षवर्धन दिल्ली की स्थानीय सियासत से निकलकर संसद पहुंचने की आस में यहां से चुनाव मैदान में उतरे हैं। दूसरी ओर देश के नामी वकील और केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल हैट्रिक बनाने के लिए यहां से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने पत्रकार आशुतोष को इस सीट से उम्मीदवार बनाया है।

नई दिल्ली में कांग्रेस महासचिव अजय माकन और मीनाक्षी लेखी के बीच मुकाबला हो रहा है। यहां आप के आशीष खेतान भी चुनाव मैदान में हैं। पश्चिम व दक्षिण दिल्ली संसदीय सीटों पर भी कड़ी टक्कर होगी। पश्चिम दिल्ली में कांग्रेस सांसद महाबल मिश्र की प्रतिष्ठा दांव पर है। उन्हें भाजपा के जाट नेता प्रवेश वर्मा और आप प्रत्याशी जरनैल सिंह से जोरदार चुनौती मिलने के कयास लगाए जा रहे हैं। उधर, दक्षिण दिल्ली में रमेश कुमार के बहाने कांग्रेस के चर्चित जाट नेता सज्जन कुमार की भी प्रतिष्ठा दांव पर है। इस सीट पर भाजपा की ओर से विधायक रमेश बिधूड़ी दूसरी बार अपनी सियासी किस्मत आजमाने उतरे हैं। आप ने यहां से देवेंद्र सहरावत को अपना प्रत्याशी बनाया है।

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Lok Sabha Elections 2014 - Think different, Kejriwal from Kashi against Modi!

काशी से भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के सामने चुनावी रण में उतरने का मन बना रहे आप नेता अरविंद केजरीवाल के लिए यहां की राह कुछ मुश्किलों भरी हो सकती है। ऐसा इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यहां के लोगों का मिजाज केजरीवाल से मेल नहीं खाता है। 

दिल्ली में केजरीवाल की सफलता में तीन कारण अहम थे। पहला, वह लगातार चर्चा में थे और हर घर में केबल टीवी की पहुंच वाले घरों में आप लगातार चर्चा में रही। दूसरा, दिल्ली में पार्टी का संगठन खड़ा हो चुका था और 15 साल के कांग्रेस के शासन व भाजपा के स्थानीय नेतृत्व की विश्वसनीयता के अभाव में केजरीवाल ने चमत्कार कर दिया। तीसरा सबसे अहम कारण था, दिल्ली में जनता की बहस-मुबाहिस टीवी चैनलों और अखबारों तक ही ज्यादा सीमित रही। 

लेकिन, बनारस में लोगों के पास सियासत से लेकर साहित्य तक हर मुद्दे पर चर्चा का खूब समय और ज्ञान भी है। मोदी और राहुल के इतिहास से लेकर केजरीवाल का भी पूरा जीवन चरित सबको पता है। भाजपा उसे अपने तरीके से पेश कर केजरी को जरा भी मौका नहीं दे रही। 

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BJP launches new party anthem with Narendra Modi as singer

भाजपा के चुनाव प्रचार का हर हिस्सा संवाद की तरह ही होगा और केंद्र में मोदी ही होंगे। रैलियों के लिए नरेंद्र मोदी का लिखित निमंत्रण हर वोटर तक जाएगा तो चुनावी गीत भी खुद मोदी ही गाएंगे। 'मैं देश नहीं मिटने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा' के आश्वासन के साथ मोदी वोट भी मांगेंगे और यह भरोसा भी दिलाएंगे कि अब हर किसी को उसका पूरा अधिकार मिलेगा।

पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने मंगलवार को भाजपा का चुनावी गीत जारी किया। एलबम का टाइटल है 'सौगंध' गीत प्रसून जोशी ने लिखा है जबकि संगीत आदेश श्रीवास्तव और स्वर सुखविंदर ने दिया है। नई बात यह है कि गीत के अलग-अलग पैरा की शुरुआत मोदी की आवाज में है। दरअसल, मतदाताओं को यह अहसास दिलाने की कोशिश होगी कि भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार ने मिंट्टी की सौगंध ली है तो उसे पूरा भी करेंगे। एलबम का वीडियो भी जारी किया गया है। यह गीत अब रैली, प्रचार वैन, 3डी ट्रक और अन्य स्थानों पर चलाए जाएंगे। पूरे गीत का मंत्र यह है कि भाजपा सरकार बनी तो देश और देश का कोई भी नागरिक अब पीछे नहीं होगा। उसे उसका हक मिलेगा और देश आगे बढ़ेगा। वीडियो में महंगाई, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा जैसे कई विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। एक सवाल के जवाब में जेटली ने कहा कि मोदी प्रधानमंत्री उम्मीदवार हैं और प्रचार सबसे आगे खड़े नेता को केंद्रित कर ही किया जाता है। ध्यान रहे कि इससे पहले भी 'मोदी आने वाला है' के मुखड़े के साथ एलबम जारी किया गया था। दरअसल, मोदी की लोकप्रियता को भुनाने के लिहाज से ही पार्टी ने 'मोदी फार पीएम' का नारा दिया था।

Source: Lok Sabha Elections 2014 Prediction

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Arvind kejriwal comment on modi

राजनीतिक पार्टियों और राजनेताओं से सवाल-जवाब करने के लिए मशहूर आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुजरात सरकार द्वारा नरेंद्र मोदी के बचाव पक्ष में दिए जवाबों से असंतोष जताते हुए बुधवार को कहा कि मुझे भाजपा से नहीं बल्कि मोदी जी से जवाब चाहिए। केजरीवाल ने मोदी की चिट्ठी को भी मीडिया के समक्ष पेश किया। मोदी को भाजपा से सर्वश्रेष्ठ बताते हुए केजरीवाल ने कहा कि यहां भाजपा की नहीं मोदी की सरकार बनने जा रही है।

गौरतलब है कि गुजरात सरकार ने पहली बार केजरीवाल के 16 आरोपों का जवाब दिया और उन्हें भ्रमजाल फैलाने में माहिर बताते हुए जिंदा किसानों को मृत बता देने वाला बताया है एवं केजरीवाल के आरोपों को झूठ का पुलिंदा बताया। गुजरात सरकार ने प्रेस रिलीज जारी कर आम आदमी पार्टी द्वारा लगाए गए आरोपों का सिलसिलेवार जवाब देते हुए कहा कि गुजरात में सिर्फ एक किसान ने अब तक आत्महत्या की है। उसकी आत्महत्या का कारण फसल खराब होना था। आप का आरोप था कि पिछले 10 साल में गुजरात में 800 किसानों ने आत्महत्या की है। आप द्वारा मृत बताए गए किसान आज भी जिंदा है। गुजरात सरकार ने अरविंद केजरीवाल के किसानों की आत्महत्या के आंकड़ों पर भी अंगुली उठाई और पूछा कि मात्र दस दिनों में 800 किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा बढ़कर एकदम से 5,874 कैसे हो गया।

उल्लेखनीय है कि अरविंद केजरीवाल ने गुजरात दौरे के दौरान राज्य में 800 किसानों द्वारा आत्महत्या करने की बात कहने के बाद मंगलवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे हुए अपने भाषण में गुजरात में पिछले 10 साल में 5 हजार से ज्यादा किसानों द्वारा आत्महत्या करने की बात कही थी।

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