Bihar Bjp trying to persuade Chaubey
बिहार में बक्सर से तीन बार सांसद रह चुके लालमुनि चौबे भाजपा छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ने के फैसले से अब पीछे हट गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार उनको मना लिया गया है। टिकट नहीं मिलने से नराज चौबे को बिहार प्रदेश इकाई मनाने में जुटी थी। भाजपा के पीएम प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने भी उनसे करीब 15 मिनट तक बातचीत की थी।भाजपा इस बार नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के मिशन को पूरा करने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रही, लेकिन उसके कद्दावर नेता ही एक-एक करके उससे छिटक दूर होते जा रहे हैं। राजस्थान में जसवंत सिंह और बिहार में लालमुनि चौबे पर भाजपा ने दांव नहीं खेला। भाजपा को अपना मिशन पूरा करना था, इसलिए उसने जसवंत सिंह की जगह कांग्रेस से आए उम्मीदवार पर ही दांव खेला और बक्सर से पार्टी के वरिष्ठ नेता लालमुनि चौबे की जगह पर पार्टी के पूर्व मंत्री अश्विनी चौबे को अपना उम्मीदवार बनाया।
भाजपा ने जहां जसवंत सिंह को मनाने में कोई रुचि नहीं दिखाई वहीं, लालमुनि चौबे को मनाने के लिए खुद नरेंद्र मोदी ने फोन पर उनसे काफी देर तक बात की । बताया गया है कि लालमुनि चौबे का गुस्सा शांत हो गया है और अब वे चुनाव नहीं लड़ेंगे और पार्टी द्वारा तय प्रत्याशी और अपने ही चेले अश्विनी चौबे के पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगे।
राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं लालमुनि
लाल बाबा भी राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं और उन्हें राजनीति की नब्ज को अच्छी तरह जांचना और परखना आता है। राजनीति में अपना कद दर्शाने के लिए उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर दिया।
उनके निर्दलीय चुनाव लड़ने के फैसले के बाद बिहार भाजपा को अपनी एक सीट पर खतरे के बादल मंडराते दिखने लगे। जिससे खुद नरेंद्र मोदी को उनको मनाने के लिए फोन पर बात करनी पड़ी।
उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाया। लाल मुनि ने कहा कि तीन सौ किलोमीटर दूर के व्यक्ति को बक्सर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाने का कोई औचित्य नहीं है। चौबे ने पार्टी में बुजुर्गो की उपेक्षा व अपमान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बनारस से पार्टी के उम्मीदवार और भाजपा के पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रचार करने का एलान भी किया। चौबे बक्सर से चुनाव लड़ना चाह रहे थे। चौबे ने किसी भी पद की लालसा से भी पूरी तरह इन्कार किया। कहा कि उन्हें राज्यपाल बनने की लालसा नहीं है। लाल मुनि चौबे ने स्थानीय व्यक्ति को टिकट न दिए जाने को पूरे शाहाबाद का अपमान बताया। उन्होंने नेतृत्व से सवाल किया कि क्या पूरे इलाके में एक भी काबिल युवा नहीं था जिसे पार्टी अपना उम्मीदवार घोषित करती। चौबे ने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा को भी मुद्दा बनाया था।
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