Rajasthan is luckey for parachute candidate
राजस्थान की बंजर भूमि बाहर से आने वाले पैराशूट उम्मीदवारों के लिए काफी उपजाऊ रही है। राजस्थान में आकर चुनाव जीतने वाले नेता उप प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री तक के पद पर पहुंचते रहे हैं। इन हस्तियों में चौधरी देवीलाल, बूटा सिंह, बलराम जाखड़ और राजेश पायलट शामिल है। इस बार भी टोंक -सवाईमाधोपुर सीट पर तीन बाहरी प्रत्याशी हैं।
1989 में जनता दल से चौधरी देवीलाल राजस्थान की सीकर सीट से लोकसभा पहुंचे थे तो सरकार में सीधे नंबर दो बन गए थे। हालांकि एक वक्त पर उनके प्रधानमंत्री बनने की भी संभावना हो गई थी। वीपी सिंह सरकार में वह उप प्रधानमंत्री बनाए गए थे। राजेश पायलट और बूटा सिंह भी केंद्र सरकार में सिरमौर बने रहे। पायलट उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के वेदपुरा गांव में जन्मे थे। 1980 में वह भरतपुर से सांसद चुने गए। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के मित्र रहे पायलट 1984, 1991, 1996, 1998 और 1999 में दौसा लोकसभा सीट से चुनाव जीते और केंद्र में अहम मंत्रालयों का जिम्मा संभाला। उनके पुत्र सचिन पायलट को अब तो बाहरी नहीं कहा जा सकता है लेकिन उनकी भी केंद्र में रसूख रही है। केंद्र में मंत्री, राज्यपाल, आयोग के अध्यक्ष जैसे अहम पदों पर रहे बूटा सिंह ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद ही राजस्थान आ गए थे। वह 1984 में जालोर से सांसद चुने गए और केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री बने। इस बार फिर से बूटा सिंह मैदान में हैं।
पंजाब के फाजिल्का जिले के रहने वाले बलराम जाखड़ को भी राजस्थान की भूमि ही रास आई। 1984 में वह सीकर से जीते थे। उन्हें लोकसभा अध्यक्ष जैसा संवैधानिक पद मिला था।
भाजपा में बतौर अध्यक्ष विवादित रहे बंगारू लक्ष्मण हैदराबाद से राजस्थान आकर जालौर से लड़े थे। यह और बात थी कि वह जीत नहीं पाए थे। उसके बाद ही वह एक स्टिंग ऑपरेशन का शिकार हो गए थे। भाजपा ने उनकी पत्नी सुशीला बंगारू लक्ष्मण को जालोर सीट से 2004 में टिकट दिया था और वह बूटा सिंह को हराकर अपने पति की हार का बदला लेने में कामयाब रही थीं। यह तो बात राजनीतिज्ञों की थी। वह सफल भी रहे। लेकिन बीकानेर से चुनाव जीतने वाले धर्मेद्र बुरी तरह फ्लाप रहे। उन्होंने दूसरी बार चुनाव की बात भी नहीं सोची। इस बार कांग्रेस ने क्रिकेटर अजहरूद्दीन तो भाजपा ने दिल्ली के सुखवीर सिंह जौनपुरिया को और समाजवादी पार्टी ने कश्मीर के कमर रब्बानी चेची को टोंक सवाईमाधोपुर सीट से उम्मीदवार बनाया है।
1989 में जनता दल से चौधरी देवीलाल राजस्थान की सीकर सीट से लोकसभा पहुंचे थे तो सरकार में सीधे नंबर दो बन गए थे। हालांकि एक वक्त पर उनके प्रधानमंत्री बनने की भी संभावना हो गई थी। वीपी सिंह सरकार में वह उप प्रधानमंत्री बनाए गए थे। राजेश पायलट और बूटा सिंह भी केंद्र सरकार में सिरमौर बने रहे। पायलट उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के वेदपुरा गांव में जन्मे थे। 1980 में वह भरतपुर से सांसद चुने गए। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के मित्र रहे पायलट 1984, 1991, 1996, 1998 और 1999 में दौसा लोकसभा सीट से चुनाव जीते और केंद्र में अहम मंत्रालयों का जिम्मा संभाला। उनके पुत्र सचिन पायलट को अब तो बाहरी नहीं कहा जा सकता है लेकिन उनकी भी केंद्र में रसूख रही है। केंद्र में मंत्री, राज्यपाल, आयोग के अध्यक्ष जैसे अहम पदों पर रहे बूटा सिंह ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद ही राजस्थान आ गए थे। वह 1984 में जालोर से सांसद चुने गए और केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री बने। इस बार फिर से बूटा सिंह मैदान में हैं।
पंजाब के फाजिल्का जिले के रहने वाले बलराम जाखड़ को भी राजस्थान की भूमि ही रास आई। 1984 में वह सीकर से जीते थे। उन्हें लोकसभा अध्यक्ष जैसा संवैधानिक पद मिला था।
भाजपा में बतौर अध्यक्ष विवादित रहे बंगारू लक्ष्मण हैदराबाद से राजस्थान आकर जालौर से लड़े थे। यह और बात थी कि वह जीत नहीं पाए थे। उसके बाद ही वह एक स्टिंग ऑपरेशन का शिकार हो गए थे। भाजपा ने उनकी पत्नी सुशीला बंगारू लक्ष्मण को जालोर सीट से 2004 में टिकट दिया था और वह बूटा सिंह को हराकर अपने पति की हार का बदला लेने में कामयाब रही थीं। यह तो बात राजनीतिज्ञों की थी। वह सफल भी रहे। लेकिन बीकानेर से चुनाव जीतने वाले धर्मेद्र बुरी तरह फ्लाप रहे। उन्होंने दूसरी बार चुनाव की बात भी नहीं सोची। इस बार कांग्रेस ने क्रिकेटर अजहरूद्दीन तो भाजपा ने दिल्ली के सुखवीर सिंह जौनपुरिया को और समाजवादी पार्टी ने कश्मीर के कमर रब्बानी चेची को टोंक सवाईमाधोपुर सीट से उम्मीदवार बनाया है।
Source: News Headlines on LS Polls 2014
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