Monday, March 31, 2014

Intervention of political families

महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश की राजनीति में राजनीतिक परिवारों का निर्णायक दखल रहा है। केंद्र की राजनीति को भी ये रिमोट कंट्रोल के जरिये प्रभावित करते रहे हैं। वंशवृक्ष सीरीज की अंतिम कड़ी में अतुल चतुर्वेदी की एक नजर:

महाराष्ट्र

बाल ठाकरे (1926-2012)

शिव सेना के संस्थापक। पार्टी को राज्य की सत्ता तक पहुंचाया। रिमोट कंट्रोल के जरिये पार्टी और राज्य की सत्ता को चलाया। मराठी मानुष की राजनीति के पोषक। राजनीतिक विरासत सबसे छोटे पुत्र उद्धव ठाकरे को सौंपी। इसके चलते महत्वाकांक्षी भतीजे राज ठाकरे ने पार्टी छोड़ी। यह चुनाव उद्धव के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि पहली बार उनके नेतृत्व में शिव सेना लड़ रही है। इनके पुत्र आदित्य ठाकरे को शिव सेना के भविष्य के नेता के रूप में देखा जा रहा है। राज ठाकरे ने शिव सेना से अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) का गठन किया। राज्य में पार्टी की सियासी जमीन बढ़ रही है। भाजपा-शिवसेना गठबंधन चुनाव लड़ रहा है। मनसे ने चुनाव बाद नरेंद्र मोदी को समर्थन देने की घोषणा की है।

शरद पवार (1940)

मराठा राजनीति के क्षत्रप। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता। सियासी रुख को भांपने में माहिर खिलाड़ी। देश के कृषि मंत्री। एक जमाने में कांग्रेस के कद्दावर नेता। सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे को उठाते हुए पार्टी छोड़ी। ज्योति बसु ने बाद में कहा था कि यदि शरद पार्टी नहीं छोड़ते तो देश के प्रधानमंत्री बनते। कांग्रेस से अलग होने के बाद 1999 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन किया। इस बार चुनाव नहीं लड़ने का निश्चय किया है। बेटी सुप्रिया सुले भी बारामती से संसद सदस्य है। भतीजे अजीत पवार राज्य के कांग्रेस-राकांपा मंत्रिमंडल में ताकतवर सिंचाई मंत्री। माना जा रहा है कि राज्य में अपने वारिस के तौर पर अजीत को तैयार कर रहे हैं और राष्ट्रीय क्षितिज पर सुप्रिया पार्टी की बागडोर संभालेंगी।

आंध्र प्रदेश

एनटी रामाराव (1923-1996)

तेलुगु देसम के संस्थापक। राज्य के मुख्यमंत्री रहे। उनकी विरासत को दामाद एन चंद्रबाबू नायडू आगे बढ़ा रहे हैं। दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहने के बाद लगभग एक दशक से सत्ता से बाहर हैं। उनके लिए यह चुनाव बेहद अहमियत रखता है क्योंकि इसके नतीजों से उनके सियासी भविष्य का रास्ता तय होता है। एनटी रामाराव की पुत्री डी पुरंदेश्वरी केंद्र सरकार में वाणिज्य और उद्योग राज्यमंत्री थीं। सात मार्च को भाजपा में शामिल होकर अपनी परंपरागत विशाखापत्तनम सीट से चुनाव लड़ रही हैं।

वाइएस राजशेखर रेड्डी (1949-2009)

2004 में 10 वर्षो बाद कांग्रेस को आंध्र प्रदेश की सत्ता में लाने का श्रेय इन्हें जाता है। पेशे से डॉक्टर राज्य के ऐसे मुख्यमंत्री थे जो जनता के बीच बेहद लोकप्रिय थे। विमान दुर्घटना में निधन। पुत्र जगनमोहन ने मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने के कारण विरोध के चलते पार्टी छोड़कर वाइएसआर कांग्रेस का गठन किया। यह चुनाव उनके लिए अग्निपरीक्षा की घड़ी है। इसके नतीजे उनके सियासी भविष्य को तय करेंगे।

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