Analysis election crop gory in green revolution states
जिस पूर्वी क्षेत्र की दूसरी हरित क्रांति से देश खाद्यान्न के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गया, राजनीतिक रूप से भी अति उर्वरा इस जमीन पर अब वोटों की खेती शुरू हो गई है। लोकसभा की चुनावी जंग में सत्ता की कुंजी भी उसी के हाथ लगने वाली है, जिसके कब्जे में यहां की राजनीतिक जमीन होगी। इसी मकसद से भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और सपा प्रमुख मुलायम सिंह ने अपनी भी यहीं से ताल ठोंकी है।हरितक्रांति की दूसरी अलख जगाने वाले पूर्वी क्षेत्र में लगभग पौने दो सौ संसदीय सीटें आती हैं। इसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में राजनीतिक दलों के बीच कड़ा संघर्ष है। केंद्र में सरकार बनाने में इस पूर्वी क्षेत्र की भूमिका अहम हो गई है। जाति व वर्गो में बंटे इस इलाके में गरीबी और बेरोजगारी की खाद ने राजनीतिक जमीन को और भी उर्वरा बना दिया है।
संप्रग के दूसरे कार्यकाल में यहां की उत्पादकता को दोगुना करने के मकसद से दूसरी हरितक्रांति की शुरुआत की गई थी, जिसे शत प्रतिशत सफलता मिली। खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। लिहाजा हरितक्रांति की योजना जारी है। दूसरी हरितक्रांति वाले पूर्वी क्षेत्र की इस धरती में अब सत्ता पर काबिज होने के लिए राजनीतिक दल वोट उगाने में जुट गए हैं।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में 32 संसदीय सीटों का जातीय समीकरण राजनीतिक दलों को लुभाने लगा है। 20 फीसद के आसपास यहां मुस्लिम मतदाता है, जो गैर भाजपा दलों के लिए बड़ा आकर्षण है। यही वजह है कि यहां की माटी में बसपा और समाजवादी पार्टी खूब फूल और फल रही है। दलित मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है जो बहुजन समाज पार्टी का बड़ा वोट बैंक है। पिछड़ी जातियों में मुलायम सिंह की जाति वाले मतदाताओं की संख्या भी खूब है, जिससे उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग का फायदा मिलता है।
लोकसभा चुनाव में भाजपा नरेंद्र मोदी को आगे कर जहां हिंदू व मुस्लिम ध्रुवीकरण का लाभ चाह रही है, वहीं मोदी के पिछड़ा होने का लाभ भी लेने का दांव चल दिया है। दूसरी ओर मुस्लिमों के सबसे बड़े खैरख्वाह और पिछड़े वोटों पर परंपरागत अपना अधिकार समझने वाले मुलायम को यह नागवार गुजरा, इसीलिए अपना गढ़ बचाने के लिए खुद आजमगढ़ से चुनाव मैदान में कूद पड़े।
पूर्वी राज्यों में बिहार में 40 सीट, झारखंड में 14, असम में 14, छत्तीसगढ़ में 11, ओड़िशा में 21 और पश्चिम बंगाल में 42 संसदीय सीटें हैं, जिसके लिए सबसे अधिक मारामारी है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस जहां एकतरफा चुनाव लड़ती दिख रही है, वहीं ओड़िशा में नवीन पटनायक सभी दलों पर भारी पड़ रहे हैं। बनारस से मोदी के चुनाव लड़ने से बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा की लहर से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
Source: Lok Sabha Elections 2014
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