Tuesday, April 1, 2014

Riwa rally live modi attack on congress

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने कहा कि चुनावी माहौल भांपकर कांग्रेस और थर्ड फ्रंट पार्टियों ने हार मान ली है। अब ये सब मिलकर अस्थिर सरकार की साजिश रच रहे हैं। इस साजिश को विफल करने के लिए उन्होंने मतदाताओं से एनडीए के पक्ष में यूपी में सभी 80 तथा देश में 300 से अधिक सीटें मांगीं।

बरेली, आंवला और पीलीभीत सीटों के भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में मंगलवार को यहां महानगर मैदान में आयोजित विशाल चुनाव रैली में मोदी करीब सवा दो घंटे विलंब से पहुंचे। इसके लिए माफी मांगने के बाद उन्होंने बेहद आक्रामक शैली में सोनिया गांधी, मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव पर प्रहार किए। करीब 30 मिनट के भाषण में उन्होंने यूपीए सरकार को हर मोर्चे पर नाकाम ठहराया।

लाल बहादुर शास्त्री के जय जवान-जय किसान नारे की याद दिलाते हुए अनाज के सड़ने और किसानों की खुदकुशी के मामले उठाए। पाक फौजियों द्वारा हिंदुस्तानी जवानों के सिर काटकर ले जाने की घटना को शर्मनाक बताते हुए केंद्र सरकार पर सोए होने का इल्जाम लगाया। कहा कि जवान सीमा पर कम और आतंकवादी घटनाओं में ज्यादा शहीद हो रहे हैं।

मोदी ने कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र को 'धोखा पत्र' बताते हुए 2009 के घोषणा पत्र के बारे में लोगों से पूछा, बताओ-केंद्र सरकार ने कितनों को नौकरी दी। एक को भी नहीं। इस बार घोषणापत्र में फिर 10 करोड़ रोजगार देने का सफेद झूठ बोला है। कांग्रेस का घोषणापत्र धोखा है। सरकार में शामिल नेता मूर्ख बना रहे हैं। उनके लिए हर दिन अप्रैल फूल है। ऐसे लोगों से देश को बचाना पड़ेगा।

साठ साल तक शासक चुने हैं, एक बार सेवक को चुनना होगा। कांग्रेस को साठ साल दिए, मुझे साठ माह दें। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस हो या सपा-बसपा, सभी हार मान चुके हैं। उनका मकसद सरकार बनाना नहीं है। दूध से बने उत्पाद में नीबू डालकर खेल बिगाड़ने में लग गए हैं। वे देश में कमजोर सरकार बनवाने की साजिश कर रहे हैं। स्थिर सरकार होगी तो हिंदुस्तान की दुनियाभर में साख मजबूत होगी। इसलिए एनडीए को तीन सौ से ज्यादा सीटों पर जिताकर भेजना होगा।

उप्र से सारे सांसद हमारे हों, तो विश्वास दिलाता हूं, जनता जैसा चाहती है, वैसा होगा। किसानों और नौजवानों का भाग्य बदल दूंगा। इस रैली की धूप में आप लोगों का तपना बेकार नहीं जाएगा। उन्होंने बरेली के मांझे का गुजरात की पतंग से रिश्ता भी बताया। बरेली के प्रत्याशी संतोष गंगवार, आंवला के धर्मेद्र कश्यप और पीलीभीत की मेनका गांधी के समर्थन में आयोजित रैली को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी व महामंत्री स्वतंत्रदेव सिंह इत्यादि ने भी संबोधित किया।

बरेली के बाद रीवा में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कांग्रेस पर अपरोक्ष रूप से हमला करते हुए निर्वाचन आयोग से अपील की कि उन्हें इसकी जांच करनी चाहिए कि उनके हेलिकॉप्टर को उड़ने से कौन रोक रहा है।

दरअसल, आज ही बरेली में चुनावी सभा को संबोधित करने के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल से उड़ान की परमीशन न मिलने के चलते नरेंद्र मोदी का हेलिकॉप्टर करीब एक घंटे तक खड़ा रहा। महानगर मैदान में डेढ़ बजे रैली खत्म होने के बाद नरेंद्र मोदी रवाना हुए। लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर एयर ट्रैफिक कंट्रोल ऑफ इंडिया ने उनके हेलिकॉप्टर को उड़ान की इजाजत नहीं दी। इसके चलते करीब एक घंटे तक वे मैदान में ही रुके रहे।

अपराह्न 2.20 बजे के बाद उनके हेलिकॉप्टर को उड़ने की इजाजत मिली। इससे पूर्व बरेली आने के समय भी उनके हेलिकॉप्टर को करीब ढाई घंटे तक दिल्ली हवाई अड्डे पर रोके रखा गया।

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Uma bharti will contest from raebareli against congress president sonia gandhi

यूपी के सियासी दंगल की दो सबसे महत्वपूर्ण सीट रायबरेली और अमेठी को लेकर भारतीय जनता पार्टी में मंथन अभी भी जारी है। हालांकि मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक रायबरेली और अमेठी की दो अहम सीटों के लिए पार्टी ने नाम लगभग तय कर लिए हैं। इसमें रायबरेली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ पार्टी उमा भारती को उतारने के लिए सहमत हो गई है। इसके अलावा पार्टी इस बात पर भी सहमत हो गई है कि उमा को यहां के अलावा झांसी सीट से भी चुनाव लड़वाया जाए।

उमा भारती के नाम के प्रस्ताव पर संघ भी अपनी मुहर लगा चुका है। हालांकि इस सीट पर साध्वी प्राची का नाम भी चर्चा है। वहीं दूसरी सबसे अहम सीट अमेठी में स्मृति इरानी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरेंगी। इस पर अंतिम फैसला लेने के लिए सोमवार को पार्टी की चुनाव समिति की बैठक होनी है, जिसमें इन दोनों सीटों के लिए प्रत्याशियों के नामों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

गौरतलब है कि उमा भारती ने सोनिया के खिलाफ चुनाव लड़ने के साथ ही झांसी की लोकसभा सीट से लड़ने की मंशा जाहिर की थी। इस मांग के आगे अब पार्टी झुकती दिखाई दे रही है।

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Analysis ec not to ban opinion polls wants centre to make law

ओपीनियन पोल यानी जनमत सर्वेक्षणों को प्रतिबंधित करने के सवाल पर चुनाव आयोग ने मनमोहन सरकार को करारा झटका दिया है। आयोग ने कानून मंत्रालय को टका सा जवाब दिया है कि वह संविधान के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर सर्वेक्षणों पर रोक नहीं लगाएगी। उसने गेंद सरकार के पाले में डाल दी है। आयोग का कहना है कि सरकार ही कानून बनाकर जनमत सर्वेक्षणों को प्रतिबंधित करे।

कुछ दिनों पहले कानून मंत्रालय ने सुझाव दिया था कि आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत प्रदत्त शक्तियों को इस्तेमाल करते हुए ओपीनियन पोल पर रोक लगाए। सूत्रों के अनुसार आयोग ने मंत्रालय के इस सुझाव पर हाल ही में अपना जवाब भेज दिया है। आयोग ने कहा कि इस मामले में सरकार ही कोई कानून बनाए। यही बेहतर विकल्प होगा। आयोग के मुताबिक, 'सर्वेक्षणों पर रोक लगाने के लिए अनुच्छेद 324 के इस्तेमाल विधि सम्मत नहीं होगा। पूर्व में सरकार ने जैसे कानून बनाकर एग्जिट पोल पर रोक लगा दिया। इस मामले में भी वह ऐसा ही कदम उठाए।' आयोग ने पहले प्रस्तावित किया था कि लोकसभा एवं विधानसभाओं के चुनाव की अधिसूचना जारी होने से लेकर अंतिम चरण का मतदान होने तक जनमत सर्वेक्षणों के परिणाम के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगाई जाए। 

इस वर्ष के शुरू में अटार्नी जनरल जीई वाहनवती ने भी अपनी रजामंदी दे दी थी। लेकिन कानून मंत्रालय चाहता था कि इस बारे में अंतिम फैसला चुनाव आयोग ही करे। ध्यान रहे कि पिछले वर्ष हुए पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव से पूर्व ओपीनियन पोल पर रोक को लेकर भाजपा और कांग्रेस आपस में भिड़ गई थी। सर्वेक्षणों में पिछड़ती दिख रही कांग्रेस ने जहां इन्हें प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव किया, वहीं भाजपा समेत अन्य विपक्षी दलों ने इस तरह की किसी भी कोशिश का विरोध किया। 

बहरहाल इस मामले में सरकार ही हीलाहवाली करती रही। 28 फरवरी को आयोग ने सरकार को पत्र लिखकर कहा कि कानून में संशोधन कर चुनावों के दौरान सर्वेक्षणों को प्रतिबंधित करने के उसके प्रस्ताव पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया।

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Monday, March 31, 2014

Ex-corporator misbehaves with Joshi, expelled

कानपुर के आर्यनगर विधानसभा में भाजपा के कार्यकर्ता सम्मेलन में जमकर हंगामा हुआ। जिसमें पार्टी से लोकसभा प्रत्याशी और वरिष्ठ नेता डा. मुरली मनोहर जोशी के साथ पूर्व पार्षद ने अभद्रता कर डाली। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने मामला शांत कराने का प्रयास किया लेकिन मामला नहीं सुलझा। बाद में जिलाध्यक्ष ने उसे पार्टी से निष्कासित कर दिया।

महानगर अध्यक्ष सुरेन्द्र मैथानी के अनुसार सम्मेलन शुरू होने पर डॉ. जोशी ने मंच पर विराजमान लोगों का नाम बोलना शुरू किया तभी सामने से पूर्व पार्षद विकास जायसवाल की आवाज आई। बाबू जी खड़े होकर बोलिए आवाज नहीं आ रही'। इसके बाद बोले कि जब से आप आएं है तब से बैठे ही हैं। खड़े होकर नहीं मिलना था तो चुनाव में क्यों खड़े हो गए। कार्यकताओं ने पूर्व पार्षद को शांत कराने का प्रयास किया लेकिन उनके साथ कुछ और लोगों ने भी नारेबाजी शुरू कर दी।

उसने कुछ विधायकों पर भी आरोप लगाए। इस पर जिलाध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी ने सार्वजनिक रुप से पूर्व पार्षद को पार्टी से निष्कासित करने की घोषणा कर दी। तब जाकर मामला शांत हो सका। पूर्व पार्षद विकास जायसवाल ने कहा कि पार्टी का कार्यकर्ता यदि अपने सम्मेलन में बात नहीं कहेगा तो कहां कहेगा। यह वही पूर्व पार्षद हैं जिनका झगड़ा पूर्व एसएसपी यशस्वी यादव से हुआ था तो पूरी भाजपा इनके पक्ष में आ गई थी।

हंगामे के पीछे गुटबाजी तो नहींकार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान हुए हंगामे के पीछे शहर भाजपा में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी उभर कर सामने आ गई। चर्चा है कि टिकट की लाइन में लगे कुछ उम्मीदवार जो डा. जोशी के नाम को शहर में पसंद ही नहीं कर रहे थे। यह सब उन्होंने ही प्रायोजित किया हो। हालांकि सुरेन्द्र मैथानी ने इसका आरोप विरोधी पार्टियों के सिर मढ़ा है।

शहीद के घर पहुंचे जोशीलोकसभा प्रत्याशी मुरली मनोहर जोशी कल शहीद आशीष यादव के घर पहुंचे। उन्होंने दुखी परिवारवालों को सांत्वना देने के साथ ही हर सुख दुख में साथ रहने का वादा किया। दो दिन पूर्व ग्वालियर के पास हुए हरक्युलिस विमान हादसे में मंगला विहार निवासी एयरफोर्स पायलट आशीष यादव शहीद हो गए थे। शनिवार को उनका अंतिम संस्कार हुआ था। रविवार को उनके आवास पर मुरली मनोहर जोशी पहुंचे। उन्होंने परिवारवालों के साथ घर पर आधा घंटा बिताया।

भाजपाइयों ने किया पुतला दहन

शहर में भाजपा का बाहरी प्रत्याशी बर्दाश्त नहीं होगा। महालक्ष्मी गेस्ट हाउस में रविवार को हुई बैठक के बाद कार्यकर्ताओं ने यह फैसला लिया व जाजमऊ चौराहे पर डा. जोशी का पुतला दहन कर दिया।

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Loksabha election:life of sabar tribe

भारत की आजादी के बाद से चुनाव अपने नियत समय पर हमेशा आते हैं लेकिन अफसोस कि गली-नुक्कड़ तक वोटरों को लुभाने का राग अलापने वाले नेता भी उपेक्षित जगहों पर नहीं जाना चाहते। सरकार कहती है झारखंड की सबर जनजाति लुप्तप्राय है। उसकी इन बातों को सबसे बड़ा बल यहां आकर मिलता है। सच में, पर्याप्त पानी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ये जनजाति जल्द लुप्त होने की कगार पर है। करीब 115 लोगों की जनसंख्या वाले क्षेत्र खडि़याकोचा में आजादी के बाद से न कोई विधायक आया न सांसद।

जमशेदपुर संसदीय क्षेत्र के पोटका प्रखंड मुख्यालय से महज 25 किलोमीटर दूर खड़ियाकोचा में घुसते ही दो सबर महिलाओं से भेंट होती है। बंगरी सबर और पारो सबर। उम्र 40 से ऊपर। दोनों लकड़ी काटने जा रही हैं। वोटर कार्ड के बारे में पूछने पर चौंककर बोली चुनाव आ गया क्या? बोलीं, गांव वालों को तो चुनाव के बारे में कुछ पता ही नहीं। यहां कोई वोटर कार्ड बनाने वाला भी नहीं आया। गांव में लगभग 50 मतदाता हैं, उनमें से महज 19 लोगों के पास वोटर कार्ड है। यहां के वृद्धों व विधवाओं को कोई पेंशन नहीं मिलती। सरकारी सुविधा नदारद, गांव में सब भूखे-नंगे। बीमार हुए तो भगवान सहारा। गांव में सड़क नहीं है। जंगल झाड़ियों को काटकर रास्ता बनाया है। बिजली की बात छोड़िए, ढिबरी- लालटेन के लिए केरोसिन मिल जाए तो रात कटती है। पानी नहीं है, आसपास के तालाब-गड्ढों से प्यास बुझती है। प्रशासन के किसी अधिकारी ने भी इस ओर रुख नहीं किया। गांव में कुल 22 घर हैं जिनमें 115 लोग रहते हैं।

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Jaswant singh attacks on BJP

भाजपा से निष्कासित किए गए वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह ने रविवार को नरेंद्र मोदी और उनके इर्द-गिर्द केंद्रित प्रचार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा अपनी विचारधारा से दूर होती जा रही है। पार्टी में पुराने नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है। यहां व्यक्ति पूजा शुरू हो गई है। क्षणिक लाभ के लिए किसी राजनीतिक दल को एक व्यक्ति का गुलाम नहीं होना चाहिए।

न्यूज एजेंसी पीटीआइ को दिए गए विशेष साक्षात्कार में 76 वर्षीय जसवंत सिंह ने भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह पर भी निशाना साधा। कहा- 'मैंने पार्टी को उनके अध्यक्ष बनने को लेकर चेतावनी दी थी और यह भी कहा था कि भाजपा को उनके निर्णय का खामियाजा उठाना पड़ेगा।' भाजपा के संस्थापक सदस्य रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और भैरोसिंह शेखावत ने जो मूल्य स्थापित किए थे, पार्टी अब पूरी तरह उससे विमुख हो गई है। अब यहां सफलता पाने के लिए न स्वीकार किए जा सकने वाले शॉर्ट कट अपनाए जा रहे हैं।

पढ़ें: भाजपा ने नहीं साधा संपर्क, डटे रहेंगे जसवंत

भाजपा द्वारा नमो मंत्र गढ़ने और पार्टी के ऊपर व्यक्तियों की स्तुति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जसवंत सिंह ने कहा कि 'हमें इसका सार समझना चाहिए। व्यक्ति अस्थाई होते हैं। ऐसे राजनीतिक दल, जिनकी इच्छा देश की सेवा करना है, को व्यक्तियों का दास नहीं बनना चाहिए।' इस सवाल पर कि क्या भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री उम्मीदवार की घोषणा चुनाव से पहले ही कर देना अच्छा फैसला था, उन्होंने कहा कि यह समय बताएगा और भारत भुगतेगा। ज्ञात हो कि जसवंत सिंह को शनिवार देर रात भाजपा से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था। बाड़मेर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना नाम वापस लेने से इन्कार करने पर उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई। भाजपा ने यहां से सोनाराम चौधरी को टिकट दे दिया है।

मिला मुलायम का सहारा

जयपुर। भाजपा से निकाले जाने के बाद जसवंत सिंह को सपा मुखिया मुलायम सिंह का सहारा मिल गया है। मुलायम ने उनसे फोन पर बातचीत कर चुनाव में समर्थन का आश्वासन दिया है। सपा की राजस्थान इकाई को भी जसवंत की मदद करने के लिए कहा गया है। मुलायम सिंह उनके चुनाव प्रचार के लिए राजस्थान भी आ सकते हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भी उनके समर्थन में यहां आने की चर्चा है। इस बीच भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। वह भी सीकर लोकसभा क्षेत्र से टिकट न मिलने पर नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे।

यह मोदी का विध्वंसकारी प्रभाव : कांग्रेस

दिल्ली। कांग्रेस ने जसवंत सिंह को भाजपा से निकाले जाने की घटना को नरेंद्र मोदी के विध्वंसक प्रभाव का संकेत करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अभी आगे मोदी की वजह से भाजपा में और टूट-फूट होगी। पहली झलक तो दिख ही गई है।

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Saturday, March 29, 2014

Sabir alis bjp membership may be cancelled

जदयू से निकाले जाने के बाद भाजपा में शामिल हुए साबिर अली की सदस्यता शनिवार को रद्द कर दी गई। गौरतलब है कि भाजपा के पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी की तारीफ करने के बाद जेडीयू से निकाले गए साबिर अली को भाजपा में शामिल करने के बाद तूफान मच गया था। मुख्तार अब्बास नकवी समेत भाजपा के कई बड़े नेताओं ने इस फैसले का खुलकर विरोध किया। इसके अलावा आरएसएस ने भी पार्टी नेतृत्व से कह दिया है कि साबिर अली की सदस्यता रद की जाए।

साबिर अली ने भी भाजपा की सदस्यता हासिल करने के बाद उठे विवादों के बाद बिहार के भाजपा प्रभारी धमर्ेंद्र प्रधान को खत लिखकर आग्रह किया था कि उनकी सदस्यता फिलहाल होल्ड पर रखी जाए। साबिर ने कहा कि एक कमेटी बनाकर उनकी जांच करा ली जाए और वह बेदाग साबित होने तक इंतजार करेंगे। साबिर अली ने यह भी कहा है कि अगर वे दोषी पाए गए तो राजनीति से ही संन्यास ले लेंगे। उधर मुख्तार अब्बास नकवी ने अपने जिस ट्वीट में साबिर अली को भटकल का दोस्त बताया था, उसे हटा लिया है।

कर्नाटक में श्रीराम सेना के विवादित नेता प्रमोद मुथालिक को शामिल कराकर फजीहत झेल चुकी पार्टी साबिर अली को लेकर घिर गई थी। पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने सार्वजनिक विरोध जताते हुए स्पष्ट कर दिया कि साबिर को बाहर का रास्ता दिखाना ही पड़ेगा। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि आतंकी भटकल और दाऊद इब्राहिम से उसके रिश्ते रहे हैं।

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Friday, March 28, 2014

Ashwani kumar exclusive interview

संप्रग सरकार के दस सालों में अश्विनी कुमार एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने करीब आधा दर्जन मंत्री पद संभाले तो वहीं आरोपों व मीडिया के दबाव के बाद इस्तीफा देकर सरकार से बाहर हुए। सरकार के भीतर व संगठन के साथ नजदीक से काम करने का अनुभव रखने वाले कुमार को कसक है कि आरोपों की सियासत ने संप्रग सरकार को उस कगार पर ला दिया जहां उसके कामों के मुकाबले इल्जामों का बोझ ज्यादा हो गया है। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री और सरकार को कमजोर बताने और जताने की कवायद में विपक्ष जिम्मेदार है तो साथ ही कई अपनों का दामन भी बेदाग नहीं है। 'दैनिक जागरण' के विशेष संवाददाता प्रणय उपाध्याय से बातचीत में पूर्व कानून मंत्री ने कहा कि सरकार के भीतर से उठे कई मंत्रियों के विरोधाभासी सुरों और प्रचार ने भी कमजोर नेतृत्व की छवि बनाने में योगदान दिया।

आम चुनाव में संप्रग सरकार के एक दशक की समीक्षा हो रही है। आपकी नजर में सरकार कहां नाकाम रही और प्रधानमंत्री को क्यों कहना पड़ा कि अब उन्हें इतिहास से ही न्याय की उम्मीद है?

-मेरी नजर में संप्रग सरकार आजाद भारत में गरीबों व वंचितों के लिए सर्वाधिक योजनाएं बनाने और उनके क्रियान्वयन को धन आवंटन देने वाली सरकार रही। लेकिन, बीते 2-3 सालों में कुछ ऐसा माहौल बना कि आरोप-प्रत्यारोप का शोर बढ़ता गया और सरकार अपने अच्छे कामों पर चर्चा को जनता के बीच ले जाने में नाकाम रही। प्रधानमंत्री का यह कहना बेहद पीड़ादायक है कि अब इतिहास ही उनका आकलन करेगा। मेरी नजर में देश का इतिहास मनमोहन सिंह का आकलन कहीं अधिक समग्रता और सच्चाई से करेगा।

.लेकिन पीएम की छवि कमजोर दिखाने में पार्टी और सरकार के भीतरी तत्वों को कितना दोष देंगे?

-संप्रग सरकार एक दशक चली। इसमें बड़ा योगदान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पीएम के बीच बेहतरीन तालमेल का है। कांग्रेस अध्यक्ष ने पूरी मजबूती के साथ मनमोहन सिंह को समर्थन दिया। पीएम स्वभाव से विनम्र हैं। कई बार उनकी विनम्रता को भी कमजोरी मान लिया जाता है। विपक्ष इसी को दुष्प्रचार का साधन बनाता रहा। परमाणु करार या अन्य कई आर्थिक फैसलों पर देखा जा सकता है कि उन्होंने दृढ़ता के साथ निर्णय लिया।

हां, इतना जरूर मानूंगा कि समय-समय पर मंत्रिमंडल के भीतर से भी पीएम और सरकार के फैसलों के खिलाफ विरोध के ऐसे सुर उठते रहे जो नहीं उठने चाहिए थे। सामूहिक जिम्मेदारी से बंधे इन मंत्रियों के व्यवहार से नुकसान हुआ। यह जरूरी था कि उन्हें अनुशासित किया जाता।

कांग्रेस अध्यक्ष का पूरा समर्थन होने के बावजूद ऐसा होता रहा तो इसके पीछे क्या व्यक्तिगत हित जिम्मेदार थे?

-अब इसके सही कारण क्या थे इसकी किसी वक्त पर समीक्षा करनी होगी। हालांकि अभी मैं किसी निष्कर्ष पर टिप्पणी नहीं करूंगा।

भ्रष्टाचार अहम मुद्दा रहा जिसपर विपक्ष आरोप लगाता रहा। सरकार ने भी कई मंत्रियों के इस्तीफे कराए। आपको भी सीबीआइ जांच रिपोर्ट देखने को लेकर उठे विवाद के बाद पद छोड़ना पड़ा। इस पर क्या कहेंगे?

-देखिए, भ्रष्टाचार एक मुद्दा है इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता। पूरे समाज में इसका विस्तार है और इसके खिलाफ व्यापक स्तर पर लड़ाई जरूरी है। लेकिन, महज आरोप काफी नहीं है। न्याय का नैसर्गिक सिद्धांत है कि कानून प्रक्रिया से सिद्ध न होने तक हर व्यक्ति मासूम है। दुर्भाग्यवश बीते कुछ सालों में आरोपों का शोर और उन्हें लेकर मीडिया का दबाव भी इस कदर बढ़ा कि सरकार के फैसले भी प्रभावित हुए।

अपने मामले में स्पष्ट कर दूं कि मेरे खिलाफ न तो कोई आरोप है और न ही सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी। मुझे इस्तीफे का कोई मलाल नहीं क्योंकि संसदीय व राजनीतिक मर्यादा के चलते मैंने त्यागपत्र दिया और पार्टी व जनता दोनों से मुझे इसके बाद भरपूर स्नेह मिलता रहा।

यानी आप कहेंगे कि केवल मीडिया के दबाव में आपका इस्तीफा हुआ?

-जरूर। मीडिया के दबाव में ही पवन बंसल और अशोक चह्वाण के भी इस्तीफे हुए। उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने का फैसला इसकी तस्दीक करता है। सिंहावलोकन करें तो लगता है कि दबाव में सरकार ने कई अतिवादी निर्णय भी कर दिए। उदाहरण के लिए दिल्ली दुष्कर्म कांड के बाद बने एंटी-रेप कानून में कई ऐसे प्रावधान हैं जिनका गलत इस्तेमाल संभव है। एक वकील होने के नाते मुझे लगता है कि इसमें जल्द से जल्द संशोधन की जरूरत है ताकि इसका दुरुपयोग न हो।

चुनावी परीक्षा से पहले क्या मानेंगे संप्रग सरकार के कौन से विषय कमजोर रह गए?

-बीते कुछ समय में हम जनता की नब्ज पढ़ने में नाकाम हुए और लोगों से हमारा संवाद कमजोर हुआ। राज्यों में हम अपने संगठन को मजबूत करने में भी कामयाब नहीं हुए। जिसके कारण लोगों के बीच हमारे अच्छे कामों का भी सही आकलन नहीं हो पा रहा।

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SP supporters organized dance program at the school in up

जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे प्रत्याशी तथा उनके समर्थक वोटरों को लुभाने के लिए अपनी भी चाल चल रहे हैं। इसमें सबसे सुलभ हो रहा है डांस कार्यक्रम। इन कार्यक्रमों में बार बालाओं के ठुमकों पर जमकर नोट की बारिश भी हो रहे हैं। इन डांसों के आयोजन में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी सबसे आगे हैं।

समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों ने कल इलाहाबाद तथा मेरठ में डांस कार्यक्रमों का आयोजन किया। जिनमें लोगों ने अश्लील डांस का जमकर लुत्फ उठाया। इलाहाबाद में यह कार्यक्रम एक जूनियर हाईस्कूल एवं प्राइमरी स्कूल में कराया गया। मेरठ के दौराला क्षेत्र के दादरी गांव में आयोजित जनसभा में दो मंच बनाए गए। एक मंच पर रागिनी कलाकारों ने भीड़ जुटाने को जमकर ठुमके लगाए।

इलाहाबाद में होली मिलन के नाम पर बार डांसर का नाच कराकर सपा के नेता फंस गए हैं। आयोजक के खिलाफ एसडीएम ने कार्रवाई की संस्तुति की है। इस दौरान बीज विकास निगम के अध्यक्ष उज्जवल रमण सिंह व सपा के अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। बसपा ने मामले की शिकायत चुनाव आयोग से की थी। इस मामले में अब दोनों स्कूलों के प्रधानाध्यापकों पर भी गाज गिरने की संभावना बढ़ गई है। शंकरगढ़ के करियाखुर्द गांव में प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय परिसर में 26 मार्च को की दोपहर होली मिलन समारोह धूमधाम से मनाया गया। बसपा का आरोप है कि इसके लिए विद्यालयों को अचानक बंद कर दिया गया। समाचार पत्रों में यह खबर प्रकाशित हुई, तो पूरा मामला विवाद में आ गया। बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष लाला प्रसाद विद्यार्थी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और जिला निर्वाचन अधिकारी से शिकायत की। इसकी तत्काल जांच के निर्देश दे दिये गए। एडीएम सिटी अशोक कुमार के मुताबिक बारा के एआरओ द्वारा की गई जांच में आयोजक दोषी मिले हैं।

Source: News Headlines on LS Polls 2014

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Modi in rush to take over PM's post, says Pawar

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए कहा है कि वह प्रधानमंत्री बनने की जल्दी में हैं।

नासिक में कांग्रेस और एनसीपी की संयुक्त रैली को संबोधित करते हुए शरद पवार ने कहा कि भाजपा को छोड़ कर किसी दल ने चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया है। हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ऐसी परंपरा नहीं रही है। भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किए जाने के बावजूद मोदी पीएम बनने की जल्दी में हैं।

मोदी के विकास के दावों की आलोचना करते हुए पवार ने कहा कि गुजरात के विकास का दावा झूठा है। इसके लिए आंकड़ों को गलत तरीके से पेश किया गया है। पवार ने कहा कि यूपीए सरकार को जनता का समर्थन हासिल है। उन्होंने कहा कि हर आपदा के समय हम किसानों सहित जनता के साथ खड़े रहे हैं और उनकी हर तरह से मदद की है।

गौरतलब है कि पवार का मोदी पर स्टैंड समय समय पर बदलता रहता है। कभी वह मोदी की प्रसंशा करते हैं तो कभी उनकी आलोचना। इस वजह से वह अपने विरोधियों के निशाने पर भी रहे हैं। 

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Uma bharti not to contest against sonia

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की फायर ब्रांड नेता उमा भारती कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेंगी। उमा झांसी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। भाजपा की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि उमा झांसी से ही चुनाव लड़ेंगी। रायबरेली और अमेठी से चुनाव लड़ने वाले पार्टी उम्मीदवारों की घोषणा जल्द ही की जाएगी। भाजपा पहले ही कह चुकी है कि वह उत्तर प्रदेश में रायबरेली और अमेठी में सोनिया व राहुल के खिलाफ मजबूत उम्मीदवार उतारने जा रही है।

Source: Lok Sabha Elections 2014 Candidates

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Thursday, March 27, 2014

Congress Candidate Arrested for Violation of Model Code of Conduct

कांग्रेस के इलाहाबाद से लोकसभा उम्मीदवार नंद गोपाल गुप्ता को [नंदी] 2012 के लोकल चुनाव मे ं अचार संहिता उल्लंघन मामले में कुछ दिनों के लिए जेल भेजा गया है। पिछले दिनों जब उत्तर प्रदेश में मायावती की सरकार थी और वे मंत्री थे तो काफी चर्चा में रहे थे। इस हफ्ते उनके खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि उन्होंने पाला बदलते हुए बासपा का दामन छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं और इलाहाबाद संसदीय सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी है।

न्यायिक दंडाधिकारी ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने 2012 के चुनाव स्थानीय निकाय से बिना अनुमति लिए प्रदर्शन करने पर नंदी के पत्नी को एक हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया है। नंदी की पत्नी अभिलाषा मेयर भी हैं। कोर्ट द्वारा दोषी सिद्ध होने के बाद बसपा ने पिछले दिनों नंदी और अभिलाषा को पार्टी से निकाल दिया था।

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Survey: modi's big lead on rahul gandhi

भाजपा की तरह संघ ने भी इस बार चुनाव में अपने सारे संसाधन झोंक दिए हैं। संघ के मुखपत्र पांचजन्य ने बाकायदा सर्वे कराकर देश की जनता की नब्ज टटोलने की कोशिश की है। 300 लोकसभा सीटों पर किए सर्वे में 43 फीसद लोग नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। सर्वे के अनुसार ग्रामीण, शहरी, महिला, पुरुष, युवा, बुजुर्ग सभी वर्गो में नरेंद्र मोदी अपने विरोधियों पर भारी दिख रहे हैं। लेकिन सर्वे में इस समर्थन के साथ मिलने वाली सीटों का अनुमान नहीं लगाया गया है।

मजेदार बात यह है कि सर्वे में संघ के पुराने मुद्दे रामजन्मभूमि, धारा-370 और समान नागरिक संहिता सिरे से गायब हैं। इसके बजाय बिजली, सड़क, पानी, रोजगार जैसे विकास से जुड़े मुद्दे पर जनता की राय जानने की कोशिश की गई है। सर्वे में युवाओं का मन टटोलने की विशेष कोशिश की गई है। सभी क्षेत्रों में अधिकतर लोगों ने रोजगार के बेहतर अवसर, विद्युत आपूर्ति में सुधार, बेहतर सड़कें, बेहतर अस्पताल और पेयजल को प्रमुख चुनावी मुद्दा बताया है। ध्यान देने की बात है कि भाजपा भी चुनाव प्रचार में इन्हीं मुद्दों को आगे रख रही है।

पांचजन्य और आर्गेनाइजर के ताजा अंक में प्रकाशित सर्वे के अनुसार लोकसभा में सबसे अधिक 162 सीटें देने वाले उत्तर भारत में 48.6 फीसद लोग मोदी को प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं। जबकि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी केवल 27 फीसद लोगों की पसंद हैं। उत्तरी भारत में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश और बिहार शामिल हैं। पिछली बार इस क्षेत्र से भाजपा को महज 34 सीटें मिली थीं। इस बार भाजपा सबसे अधिक सीटें यहीं जीतने की उम्मीद कर रही है।

केवल दक्षिण भारत में राहुल गांधी नरेंद्र मोदी पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। लोकसभा में 132 सांसद भेजने वाले दक्षिण भारत में प्रधानमंत्री के रूप में 35.8 फीसद लोग राहुल गांधी और 33.3 फीसद लोग नरेंद्र मोदी को पसंद कर रहे हैं। आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल वाले दक्षिण भारत में 2009 में भाजपा को केवल 20 सीटों से संतोष करना पड़ा था। जबकि 83 सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा किया था। राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ वाले मध्य भारत में मोदी 45.4 तो राहुल गांधी 29 फीसद लोगों की पसंद हैं। इसी क्षेत्र में अरविंद केजरीवाल भी 14.3 फीसद लोगों की पसंद के रूप में उभरे हैं।

नरेंद्र मोदी को सबसे अधिक समर्थन गुजरात और महाराष्ट्र वाले पश्चिमी भारत में मिल रहा है। 78 सीटों वाले इस क्षेत्र में नरेंद्र मोदी 57 फीसद लोगों की पसंद हैं। जबकि राहुल गांधी को उनके आधे से कम 24.4 फीसद लोग पसंद कर रहे हैं। इसी तरह 88 सीटों वाले पूर्वी भारत में भी मोदी ने विरोधियों पर बढ़त बना ली है। यहां मोदी 34.3 और राहुल गांधी 31.1 फीसद लोगों की पसंद है।

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Wednesday, March 26, 2014

LS Polls: Three percent vote swing could tweak fate of 114 seats

Representational Picture

According to the Election Commission, 114 seats had witnessed victory margin of less than three percent in the 2009 Lok Sabha elections. Uttar Pradesh had topped the list, where 19 seats out 80 had registered three percent victory margin.

The Samajwadi Party (SP) and the Bahujan Samaj Party (BSP) had to suffer the most in these 19 seats. In fact, there were some seats in UP where victory margin was even less than one percent.

Senior BJP leader Murli Manohar Joshi had won against BSP leader Mukhtar Ansari from Varanasi in 2009 with a difference of less than three percent. Modi is contesting from this seat this time around and it could be a tricky affair for him.

The Amritsar seat in Punjab saw a similar trend and the victory margin was even less than one percent here. Senior BJP leader Arun Jaitley is contesting elections from the Amritsar constituency this time.

Madhya Pradesh had eight such seats which witnessed victory margin of less than three percent. Here BJP endured most of the sting, losing five of eight seats.

The provision of None Of The Above (NOTA) in the electronic voting machines (EVM) this time around could spell more trouble for all the candidates who are contesting from constituencies having the trend of victory margin less than three percent.

The assembly elections in four states last year saw a good number of people pressing the NOTA button on EVMs, but it would be for the first time that the common man would get a chance to reject all the candidates from their constituencies in the Lok Sabha elections.

Source: Lok Sabha Eletions 2014 News Headlines

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Indira, VP Singh and Atal has been defeated in Lok Sabha Election

आपातकाल के बाद 1977 में गांधी-नेहरू परिवार के गढ़ रायबरेली से राजनारायण के हाथों पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हार की चर्चा तो होती रहती है लेकिन यह सच भी कम लोगों को विदित है कि पूर्व प्रधानमंत्री व भारतीय जनता पार्टी के शिखर पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी को भी अपनी संसदीय यात्रा के शुरुआती दौर में तीन चुनावों में हार का मुंह देखना पड़ा। 1957 व 1962 के चुनावों में तो उन्हें सूबे की राजधानी लखनऊ में ही मुंह की खानी पड़ी। हालांकि इस क्षेत्र ने 1991 से लगातार पांच बार उन्हें अपने सिर-माथे बैठाया। 1957 के चुनाव में बलरामपुर से जीत दर्ज कराने वाले अटल 1962 में इस सीट पर कांग्रेस की सुभद्रा जोशी से पराजित हुए।

लोकसभा के चुनावी दंगल में शिकस्त खाने वाले दिग्गजों की फेहरिस्त में डॉ.राम मनोहर लोहिया, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और कांशीराम सरीखे तपे हुए विचारक भी रहे तो चौधरी चरण सिंह, विश्वनाथ प्रताप सिंह और चंद्रशेखर जैसे पूर्व प्रधानमंत्री भी। समाजवाद के प्रणोता डॉ.राम मनोहर लोहिया ने 1957 और 1962 में चंदौली के चुनावी दंगल में पटकनी खायी तो एकात्म मानववाद की लौ जलाने वाले दीनदयाल उपाध्याय 1963 में जौनपुर से उपचुनाव हारे।

जिन कांशीराम का आशीर्वाद लेकर मायावती ने चार में से तीन बार उप्र की सत्ता संभाली, वह खुद दो बार चुनावी दंगल में चित हुए। 1996 में फूलपुर में उन्हें उनके पुराने चेले रहे सपा के जंग बहादुर सिंह पटेल ने आसमान दिखाया तो 1998 के चुनाव में सूबे में चली भाजपा की आंधी में उन्हें सहारनपुर में हार मिली। किसानों की सियासत को नया आयाम देने वाले चौधरी चरण सिंह 1971 में जाट राजनीति के केंद्र मुजफ्फरनगर में मिली पराजय आजीवन नहीं भूल पाए। बागी बलिया से आठ चुनाव जीतकर अपराजेय समझे जाने वाले चंद्रशेखर को 1984 में इसी सीट पर मिली हार अखरती रही।

पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह को 1977 में अपने गृह जिले इलाहाबाद में पराजय का कड़वा स्वाद चखना पड़ा। 1989 में पहली बार बिजनौर से संसद की देहरी लांघने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती को 1991 की राम लहर से इसी सीट पर शिकस्त खानी पड़ी थी। कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी अविभाजित उप्र में नैनीताल सीट पर 1991 व 1998 में पराजित हुए तो एक और लोकप्रिय पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा को 1984 में इलाहाबाद में सिने स्टार अमिताभ बच्चन के हाथों करारी हार मिली। चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत संभालने वाले उनके पुत्र अजित सिंह ने बागपत सीट पर जीत की दो अलग हैट्रिक तो लगा ली, लेकिन उनकी डबल हैट्रिक में 1998 में भाजपा के सोमपाल शास्त्री रोड़ा बन गए।

कभी इंदिरा गांधी के राजनीतिक उत्तराधिकारी समझे जाने वाले संजय गांधी से आपातकाल की ज्यादतियों का हिसाब चुकता करते हुए अमेठी की जनता ने 1977 में उन्हें नकार दिया था तो उनके निधन के बाद उनकी पत्नी मेनका गांधी को 1984 में यहीं अपने जेठ राजीव गांधी से पराजित होना पड़ा। अपने सियासी जीवन में मेनका को दूसरी हार 1991 में पीलीभीत सीट पर मिली।

और भी धुरंधरों को मिली है शिकस्त

-राम नरेश यादव 1989 में बदायूं, 1984 व 1998 में आजमगढ़ से हारे।

- कल्पनाथ राय 1980 में घोसी से हारे।

- कृष्ण चंद्र पंत 1977 में नैनीताल से हारे।

-शरद यादव 1984 व 1991 में बदायूं से हारे।

- मुरली मनोहर जोशी-1980 व 1984 में अल्मोड़ा, 2004 में इलाहाबाद में हारे।

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Madhusudan Mistry will contest loksabha election against Modi in Vadodara

आखिरकार आदर्श घोटाले के आरोपी और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण को कांग्रेस ने चुनाव मैदान में उतार दिया। उन्हें नांदेड़ से टिकट मिला है। एक अन्य फैसले में नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से अब तक प्रत्याशी तय करने में नाकाम रही कांग्रेस ने वडोदरा से अपना उम्मीदवार बदल दिया है। सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी की चुनाव नहीं लड़ने की बात भी पार्टी ने मान ली है और लुधियाना से उनके स्थान पर रवनीत सिंह बिंट्टू को मैदान में उतारा है।

कांग्रेस ने बुधवार को 12 नामो की नई सूची जारी की है। पार्टी ने भाजपा प्रधानमंत्री पद उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को कड़ी टक्कर देने के लिए राहुल गांधी की महत्वाकांक्षी प्राइमरीज प्रक्रिया से चुने गए वडोदरा शहर अध्यक्ष का टिकट काट कर पार्टी महासचिव मधूसूदन मिस्त्री को नमो के मुकाबले उतारा है। बुधवार को सूची जारी होने के बाद मोदी के खिलाफ ताल ठोकते हुए मधूसूदन मिस्त्री ने कहा 'मुझे कब से इस दिन का इंतजार था। मैं मोदी के खिलाफ लड़ूंगा और उन्हें हराऊंगा।' कांग्रेस ने अहमदाबाद पूर्व से भाजपा के परेश रावल के मुकाबले हिम्मत सिंह पटेल को उतारा है। 

महाराष्ट्र के नांदेड़ से पार्टी ने आखिरी वक्त पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण को ही टिकट दे दिया है। नांदेड़ में नामांकन दाखिल करने का बुधवार को आखिरी दिन है। इसे देखते हुए चह्वाण ने अपनी पत्नी अमिता चह्वाण से नांदेड़ से मंगलवार को ही नामांकन दाखिल करा दिया था। मनीष तिवारी ने खराब स्वास्थ्य के चलते आलाकमान के सामने चुनाव लड़ने में असमर्थता जाहिर की थी। पार्टी ने पंजाब से एक ओर कद्दावर नेता पूर्व प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र सिंह केपी को उम्मीदवार बनाया है। उत्तर प्रदेश में पार्टी ने डुमरियागंज और चंदौली में प्रत्याशी बदले हैं। डुमरियागंज से पूर्व प्रत्याशी तरुण पटेल की जगह वसुंधरा कुमारी को उतारा है जबकि तरुण पटेल को चंदौली में पूर्व घोषित प्रत्याशी सतीश बिंद की जगह उतारा गया है।

वडोदरा से प्रत्याशी बदलना राहुल की हार: भाजपा
वडोदरा में प्रत्याशी बदले जाने पर भाजपा ने चुटकी ली। पार्टी प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने हार मान ली है। यही कारण है कि प्राइमरी माध्यम से चुने गए उम्मीदवार को इस डर से हटा दिया कि वह कमजोर है। जिसे नया प्रत्याशी बनाया गया है कि उसकी भी हार तय है, लेकिन असली हार राहुल की है। 

आरएसएस में रहे हैं मिस्त्री
वडोदरा से भाजपा प्रधानमंत्री पद उम्मीदवार का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मधूसूदन मिस्त्री कभी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का अंग हुआ करते थे। कर्नाटक की जीत के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष के बेहद करीब हो चुके मिस्त्री 1995 में शंकर सिंह वाघेला के भाजपा से बगावत कर नई पार्टी राष्ट्रीय जनता पार्टी के गठन करने के साथ भाजपा को छोड़ नई पार्टी में शामिल हो गए। बाद में वाघेला की पार्टी का विलय कांग्रेस में हो गया और मिस्त्री भी कांग्रेस पार्टी के सदस्य बन गए। 

भाजपा की नई सूची में विनोद खन्ना भी
भाजपा ने पंजाब के गुरुदासपुर से विनोद खन्ना को टिकट दिया है। खन्ना 2009 में इसी सीट से लोकसभा चुनाव हार गए थे। पार्टी ने हिमाचल के मंडी से रामस्वरूप शर्मा को मैदान में उतारा है। 

इनके अलावा पार्टी ने उत्तर प्रदेश की तीन सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। इनमें हाथरस से राजेश दिवाकर, फूलपुर से केशव मौर्य और संत कबीर नगर से शरद त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है। जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर से आरिफ मजीद पमपोरी भाजपा प्रत्याशी होंगे। इसके साथ ही पार्टी ने ओड़िशा की दो और सिक्किम की एक सीट पर उम्मीदवार का एलान कर दिया है।
अकबर बने भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता
तीन दिन पहले भाजपा में शामिल हुए वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर को पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया है। 1989 से 1991 तक बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद रहे अकबर को भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय प्रवक्ता घोषित किया। इनके साथ अरुण सिंह को ओड़िशा का प्रभारी बनाया गया है। ओड़िशा में लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव भी होने हैं। 

आप की 11वीं सूची में 11 नाम
आम आदमी पार्टी (आप) ने मंगलवार को लोकसभा उम्मीदवारों की 11वीं सूची जारी कर दी। सूची में पार्टी ने चार राज्यों के 11 प्रत्याशियों की घोषणा की है। इसके साथ ही पार्टी के लोकसभा उम्मीदवारों की संख्या 350 के करीब पहुंच गई। पार्टी ने सूची में राजस्थान के छह, महाराष्ट्र और पंजाब के दो-दो के अलावा बिहार के एक सीट पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है।

आप ने अमृतसर से डॉ. दलजीत सिंह को पार्टी का टिकट दिया है, जो भाजपा के अरुण जेटली और कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह को चुनौती देंगे। अजमेर से मौजूदा कांग्रेस सांसद और केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट के खिलाफ पार्टी ने अजय सोनामी को उतारा है। बिहार के आरा से भाजपा उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह के खिलाफ पार्टी ने डॉ. सुरेश कुमार को टिकट दिया है।

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Monday, March 24, 2014

Priyanka may contest from Varanasi loksabha seat?

बनारस में नरेन्द्र मोदी के सामने कांग्रेस से कौन? यह सवाल कांग्रेस से लेकर आमजन को भी परेशान किए है। दिग्गी राजा के बाद अब प्रियंका गांधी का भी नाम उछला है। प्रियंका पर सक्रिय राजनीति में भाग लेने व वाराणसी से चुनाव लड़ने का दवाब बढ़ता जा रहा है। हालांकि पार्टी स्थानीय स्तर पर भी किसी कद्दावर की तलाश में जुटी है, जो नमो को कड़ी टक्कर दे सके।

पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं का मानना है कि प्रियंका में वो सब सम्भावनाएं हैं जो एक पूर्ण राजनीतिज्ञ में होनी चाहिए और जनता भी उनमे दूसरी इंदिरा की छवि देख रही है। जनता में बढ़ती राजनैतिक अविश्वसनीयता के बीच अगर विश्वास का चेहरा दल अथवा दल के बाहर कोई देखा जा रहा है तो वह हैं प्रियंका गांधी। उधर, पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रियंका यूपी में कांग्रेस के खोए जनाधार को वापस लाने के लिए तैयार हैं। वह इस वक्त कांग्रेस का वार रूम संभाल रही है और राहुल गांधी के कार्यक्त्रमों के अलावा पार्टी को अपनी राय भी दे रही हैं। कांग्रेस के अधिकांश नेताओं का यह मानना है कि प्रियंका प्रचार करें व लोकसभा का चुनाव भी लड़ें जिससे कार्यकर्ताओं व नेताओं के डगमगाते आत्मविस्वास को फिर से हासिल किया जा सके। वहीं प्रियंका ने मोदी के खिलाफ उनके चुनाव लड़ने की बयानबाजी पर सख्त नाराजगी जताई है। बयानबाजी करने वालों को प्रियंका ने चेतावनी देते हुए कहा कि मोदी के खिलाफ कौन लड़े और कौन ना लड़े इसका फैसला कांग्रेस कार्यसमिति यानी सीडब्ल्यूसी पर छोड़ा जाय। उनका यह भी कहना हैकि इस तरह की बयानबाजी से जनता केबीच गलत संदेश जा रहा है। वो यह कि कांग्रेस असमंजस में है और उसके पास प्रत्याशी नहीं है। पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस 25 को होने वाली अरविंद केजरीवाल की रैली के बाद ही प्रत्याशी तय करेगी।


कांग्रेस के जोनल प्रवक्ता अनिल श्रीवास्तव की माने तो नमो के खिलाफ प्रियंका को लड़ाने की खबर यूं ही नहीं उछली है इसके पीछे ठोस तर्क हैं। पार्टी के शीर्ष नेताओं में एक वर्ग ऐसा है जिसका स्पष्ट मत है कि प्रियंका न सिर्फ नमो को जबर्दस्त टक्कर दे सकती हैं बल्कि यूपी में कांग्रेस के खोए जनाधार को भी वापस ला सकती हैं।

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Jaswant files nomination from barmer as Independent candidate today

बाड़मेर की सीट से टिकट न देने से नाराज भाजपा के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह सोमवार को कुछ खुलासे करने वाले हैं। इन खुलासों के सामने आने से पहले ही पार्टी में चिंता की लकीरें साफतौर पर देखी जा रही हैं। पार्टी फिलहाल इतना ही कह रही है कि यदि वह भाजपा छोड़कर जाते हैं तो यह दुखद होगा। आज ही जसवंत सिंह ने बाड़मेर सीट से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया।

दो दिन पहले ही उन्होंने जैसलमेर पहुंचने पर मीडिया से कहा था कि वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर बाड़मेर सीट से नामांकन भरने के लिए तैयार हैं। लेकिन वह इससे पहले कुछ खुलासे भी करेंगे। कल ही उन्होंने भाजपा के नेताओं पर अहंकारी होने का भी आरोप लगाया था। उन्होंने अमृतसर के प्रत्याशी अरुण जेटली के बयान के जवाब में कहा था कि वह कोई सामान नहीं है जिसको पार्टी को एडजेस्ट करना पड़ेगा।

गौरतलब है कि नौ बार से सांसद जसवंत सिंह मौजूदा समय में दार्जिलिंग से सांसद हैं। इस बार उन्होंने बाड़मेर सीट से टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने उन्हें नजरअंदाज कर कुछ दिन पहले पार्टी में शामिल हुए कर्नल सोनाराम को लोकसभा का टिकट दे दिया। इससे नाराज जसवंत ने अब बागी तेवर अपनाते हुए पार्टी को तिलांजली देने का भी मन बना लिया है।

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King at the doorstep of the people

कभी वे राजा थे लेकिन बदलते वक्त ने उन्हें लोकतंत्र में जनाधार की अहमियत का अहसास कराया। हुकूमत के आदी राजघरानों और रियासतों को जनबल का अहसास हुआ तो राजनीतिक दलों ने इस कुलीन तबके की चमक-धमक पर सियासत के दांव लगाने में कोताही नहीं बरती।

समय के साथ ऐसे 'हुक्मरान' सियासत के रंग में रंग गए। राजनीति की रपटीली राह पर कदम जमाने के लिए यदि उन्होंने सधी चाल चली तो अपने वजूद को लडख़ड़ाने से बचाने के लिए समय-समय पर नयी सियासी बैसाखियां भी आजमाई।

सियासत की राजशाही में एक नहीं कई नाम हैं और करीब सभी दलों के चुनावी रथ पर इनकी सवारी देखी जा सकती है। चुनाव के इस समर में इस बार अपनी विजय सुनिश्चित करने को वे जनता के घर दस्तक देने के लिए निकल भी पड़े हैं। कांग्रेस में अलबत्ता ऐसे 'राजाओं' की संख्या अधिक है लेकिन सपा और भाजपा ने भी इन पर दांव लगाया है।

कीर्ति वर्धन सिंह: गोंडा के मनकापुर राजघराने के उत्तराधिकारी कीर्ति वर्धन सिंह तीसरी बार लोकसभा की देहरी लांघने के लिए मतदाताओं की चौखट पर पहुंचे हैं। इसके लिए उन्होंने साइकिल की सवारी छोड़कर गोंडा में कमल का फूल खिलाने का संकल्प लिया है। यह बात दीगर है कि सपा से उनकी बगावत और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ उनके बागी सुरों के कारण अखिलेश सरकार में कृषि मंत्री रहे उनके पिता आनंद सिंह को मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा। कीर्ति वर्धन इससे पहले 1998 व 2004 में बतौर सपा उम्मीदवार गोंडा सीट फतह कर चुके हैं। इस सीट पर अपना दबदबा कायम रखने के लिए उन्होंने पिछली बार हाथी की सवारी की लेकिन कामयाब न मिलने पर वह फिर सपा में शामिल हो गए थे।

नूर बानो: रामपुर में कांग्रेस की गतिविधियों के केंद्र रहे नूर महल का तिलिस्म इस बार शहर-ए-जिगर मुरादाबाद में भी दिखेगा। नूर महल की अध्यासी और रामपुर के नवाब घराने की बेगम नूर बानो को कांग्रेस ने इस बार पीतल नगरी मुरादाबाद में पंजे की ताकत का लोहा मनवाने की जिम्मेदारी सौंपी है। लोकसभा में पांच बार रामपुर की नुमाइंदगी करने वाले अपने मरहूम शौहर नवाब सैयद जुल्फिकार अली खां के इंतिकाल के बाद उनकी सियासी विरासत संभालने वाली नूर बानो 1996 व 1999 में रामपुर से सांसद चुनी गई हैं। यह पहला मौका है जब चुनाव लड़ने के लिए उन्हें रामपुर से बाहर कदम रखने पड़े हैं।

काजिम अली खां: बेगम नूर बानो के पुत्र और रामपुर के नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां को कांग्रेस ने इस बार रामपुर से अपना उम्मीदवार बनाया है। काजिम अली खां 1996 में रामपुर की बिलासपुर और 2002 में स्वार टांडा सीट से बतौर कांग्रेस प्रत्याशी विधायक चुने गए लेकिन 2007 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर साइकिल की सवारी कर उन्होंने विरोधियों को शिकस्त दी। बाद में वह बसपा में शामिल हो गए लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव में वह फिर कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर स्वार टांडा से जीते।

रत्ना सिंह: प्रतापगढ़ के कालाकांकर राजघराने को भी सियासत सुहाती रही है। इस राजघराने की राजकुमारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री की बेटी रत्ना सिंह लोकसभा में अपनी चौथी पारी खेलने के लिए बतौर कांग्रेस प्रत्याशी एक बार फिर वोटरों के बीच हैं। वह 1996, 1998 और 2009 के चुनावों में जीत दर्ज कर लोकसभा में प्रतापगढ़ का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

रेवती रमण सिंह: इलाहाबाद के करछना क्षेत्र की बरांव रियासत की भी राजनीति में गहरी पैठ रही है। करछना से आठ बार विधायक और संगम नगरी से दो बार सांसद निर्वाचित होने के बाद बरांव रियासत के कुंवर रेवती रमण सिंह इलाहाबाद सीट पर अपनी हैट्रिक लगाने के लिए एक बार फिर साइकिल दौड़ा रहे हैं।

पक्षालिका सिंह: जालौन की रामपुरा रियासत की राजकुमारी से आगरा के भदावर राजघराने की रानी बनीं पक्षालिका सिंह को समाजवादी पार्टी ने फतेहपुर सीकरी सीट पर साइकिल की रफ्तार को बुलंदियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी है। 2012 के विधानसभा चुनाव में आगरा की खैरागढ़ सीट से सपा उम्मीदवार के तौर पर हारने के बावजूद पार्टी ने उन पर यूं ही नहीं भरोसा जताया है। भदावर राजघराने के वारिस उनके पति महेंद्र अरिदमन सिंह आगरा की बाह विधानसभा क्षेत्र से छह बार विधायक निर्वाचित हो चुके हैं और अखिलेश सरकार में स्टांप एवं पंजीयन मंत्री हैं। जाहिर है कि फतेहपुर सीकरी सीट पर महेंद्र अरिदमन सिंह की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है।

रतनजीत प्रताप नारायण सिंह: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और पडरौना की जगदीशगढ़ रियासत के कुंवर रतनजीत प्रताप नारायण सिंह एक बार फिर अपनी प्रतिष्ठा बरकरार रखने के लिए कुशीनगर से कांग्रेस उम्मीदवार हैं। तीन बार पडरौना से कांग्रेस विधायक रहे रतनजीत प्रताप नारायण सिंह ने पिछले लोकसभा चुनाव में कुशीनगर सीट फतह की थी।

अमीता सिंह: कभी बैडमिंटन कोर्ट पर प्रतिद्वंद्वियों को स्मैश से धराशाई करने वाली अमीता सिंह (तब अमीता कुलकर्णी) सुल्तानपुर से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में नेट पर कैसे खेलती हैं, यह देखने वाली बात होगी। अमीता ने अमेठी राजघराने के वारिस डॉ. संजय सिंह से विवाह के बाद राजनीति में पदार्पण किया। सुल्तानपुर से लोकसभा सदस्य रहे डॉ. संजय सिंह चूंकि असम से राज्य सभा पहुंच गए हैं, इसलिए कांग्रेस ने इस बार अमीता सिंह को वहां से टिकट दिया है। 2002 में अमीता पहली बार भाजपा के टिकट पर अमेठी सीट से विधायक चुनी गई लेकिन कमल से नाता तोड़कर उन्होंने 2004 के उप चुनाव में इसी सीट पर हाथ के पंजे का लोहा मनवाया। 2007 में वह फिर बतौर कांग्रेस उम्मीदवार यहां से निर्वाचित हुई लेकिन 2012 में उन्हें शिकस्त मिली।

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Friday, March 21, 2014

Narendra modi heard farmer problem

भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने चाय चर्चा के दौरान गुरुवार को राजधानी लखनऊ और आसपास के जिलों के किसानों से सीधा संवाद किया। इस दौरान मोदी ने अन्नदाताओं से कुछ अपनी बात कही और कुछ उनकी सुनी। किसानों के दुख दर्द के साथ उनकी बदहाली के कारण भी जानें और निराकरण का आश्वासन भी दिया। संवाद के दौरान कहीं-कहीं किसान भावुक भी हो उठे।

सीतापुर के महमूदाबाद क्षेत्र में तीन ही जगह पर चाय चौपाल का आयोजन हुआ। बाराबंकी के रामनगर में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी किसानों से मुखातिब हुए। सुल्लतानपुर के जयसिंहपुर ब्लाक के बरौसा व दूबेपुर विकास खंड मुख्यालय में कार्यक्रम हुआ। चाय चौपाल के तीसरे चरण में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए किसानों से खेती-किसानी की समस्याओं पर विचार विमर्श किया।

अंबेडकरनगर में नरेंद्र मोदी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए किसानों से रूबरू हुए। आलापुर विधानसभा क्षेत्र के इंदईपुर बाजार व कटेहरी विधानसभा क्षेत्र के केदारनगर बाजार में चौपाल आयोजित की गई। कांफ्रेंसिंग में मोदी ने आधुनिक खेती की आवश्यकता व उसे बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश व बिहार में गन्ना किसान सबसे ज्यादा परेशान है। सरकारी चीनी मिलों को पूंजीपतियों के हाथों बेच दिया गया।

गोंडा में कार्यक्रम के जरिए किसानों को सीधे मोदी से मुखातिब होने का सपना साकार नहीं हो सका। यहां वीडियो कांफ्रेसिंग संबधी तकनीकी दिक्कत के कारण यहां आए किसान टीवी के माध्यम से नरेंद्र मोदी की बात तो सुने, लेकिन बात नहीं कह सके। श्रावस्ती में जिला मुख्यालय भिनगा और इकौना में शाम चार से छह बजे कार्यक्रम हुआ।

वहीं लखीमपुर के नकहा पिपरी, रामापुर, फूलबेहड़ व सिसैया चौराहे पर किसान पंचायतें आयोजित की गईं, जिसमें किसानों ने नरेंद्र मोदी से सीधी वार्ता की। भाजपा के जिलाध्यक्ष विनोद मिश्रा ने बताया कि इन चारों पंचायतों में एलसीडी टीवी पर नरेंद्र मोदी ने मोबाइल फोन के माध्यम से किसानों से बातचीत की। बातचीत के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं रखते हुए कहा कि उन्हें गन्ने का बकाया नहीं मिल रहा है। मिलों पर उनकी गाडिय़ां खड़ी हुई हैं। महंगाई के चलते जीवन यापन मुश्किल है। किसानों ने डीजल की बढ़ती दरों से होने वाली दिक्कतें उन्हें बताईं। इस पर नरेंद्र मोदी ने किसानों से उनकी समस्याओं का समाधान दिलाने की बात कही।

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