Monday, March 31, 2014

Mukul returns AAP ticekt from Farrukhabad

बीमार होने के कारण चंडीगढ़ का रोड शो छोड़कर दिल्ली लौटे आप के संयोजक को फर्रुखाबाद में तगड़ा झटका लगा है। फर्रुखाबाद में इनके प्रत्याशी ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया है।

मुकुल त्रिपाठी के चुनाव लड़ने से मना कर देने से विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को भ्रष्टाचार के मामले में घेरने की अरविंद केजरीवाल की योजना पर पानी फिर गया है। केजरीवाल ने फर्रुखाबाद के बारे में विशेष योजना तैयार की थी और कई बार अपने साथ पार्टी के तमाम वरिष्ठ सहयोगियों को लेकर फर्रुखाबाद में चुनावी लड़ाई की जमीन तैयार की थी। विकलांग जनों को उपकरण वितरण में घोटालों के घेरे में आए सलमान खुर्शीद को विकलांग मुकुल त्रिपाठी के जरिए घेरने की केजरीवाल की उम्मीद टूटती नजर आ रही है।

मुकुल त्रिपाठी ने पार्टी पर अपनी उपेक्षा का आरोप लगाया है। मुकुल ने कहा कि चुनाव से पहले तो अरविंद केजरीवाल सहित आप के तमाम बड़े नेता फर्रुखाबाद में जमे रहते थे लेकिन जब वास्तव में जरूरत है तो सभी ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। पार्टी की इस उपेक्षा के कारण अब मेरा अकेले चुनाव लड़ना संभव नहीं हैं। इस कारण मैं पार्टी का टिकट लौटा रहा हूं।

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Intervention of political families

महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश की राजनीति में राजनीतिक परिवारों का निर्णायक दखल रहा है। केंद्र की राजनीति को भी ये रिमोट कंट्रोल के जरिये प्रभावित करते रहे हैं। वंशवृक्ष सीरीज की अंतिम कड़ी में अतुल चतुर्वेदी की एक नजर:

महाराष्ट्र

बाल ठाकरे (1926-2012)

शिव सेना के संस्थापक। पार्टी को राज्य की सत्ता तक पहुंचाया। रिमोट कंट्रोल के जरिये पार्टी और राज्य की सत्ता को चलाया। मराठी मानुष की राजनीति के पोषक। राजनीतिक विरासत सबसे छोटे पुत्र उद्धव ठाकरे को सौंपी। इसके चलते महत्वाकांक्षी भतीजे राज ठाकरे ने पार्टी छोड़ी। यह चुनाव उद्धव के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि पहली बार उनके नेतृत्व में शिव सेना लड़ रही है। इनके पुत्र आदित्य ठाकरे को शिव सेना के भविष्य के नेता के रूप में देखा जा रहा है। राज ठाकरे ने शिव सेना से अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) का गठन किया। राज्य में पार्टी की सियासी जमीन बढ़ रही है। भाजपा-शिवसेना गठबंधन चुनाव लड़ रहा है। मनसे ने चुनाव बाद नरेंद्र मोदी को समर्थन देने की घोषणा की है।

शरद पवार (1940)

मराठा राजनीति के क्षत्रप। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता। सियासी रुख को भांपने में माहिर खिलाड़ी। देश के कृषि मंत्री। एक जमाने में कांग्रेस के कद्दावर नेता। सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे को उठाते हुए पार्टी छोड़ी। ज्योति बसु ने बाद में कहा था कि यदि शरद पार्टी नहीं छोड़ते तो देश के प्रधानमंत्री बनते। कांग्रेस से अलग होने के बाद 1999 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन किया। इस बार चुनाव नहीं लड़ने का निश्चय किया है। बेटी सुप्रिया सुले भी बारामती से संसद सदस्य है। भतीजे अजीत पवार राज्य के कांग्रेस-राकांपा मंत्रिमंडल में ताकतवर सिंचाई मंत्री। माना जा रहा है कि राज्य में अपने वारिस के तौर पर अजीत को तैयार कर रहे हैं और राष्ट्रीय क्षितिज पर सुप्रिया पार्टी की बागडोर संभालेंगी।

आंध्र प्रदेश

एनटी रामाराव (1923-1996)

तेलुगु देसम के संस्थापक। राज्य के मुख्यमंत्री रहे। उनकी विरासत को दामाद एन चंद्रबाबू नायडू आगे बढ़ा रहे हैं। दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहने के बाद लगभग एक दशक से सत्ता से बाहर हैं। उनके लिए यह चुनाव बेहद अहमियत रखता है क्योंकि इसके नतीजों से उनके सियासी भविष्य का रास्ता तय होता है। एनटी रामाराव की पुत्री डी पुरंदेश्वरी केंद्र सरकार में वाणिज्य और उद्योग राज्यमंत्री थीं। सात मार्च को भाजपा में शामिल होकर अपनी परंपरागत विशाखापत्तनम सीट से चुनाव लड़ रही हैं।

वाइएस राजशेखर रेड्डी (1949-2009)

2004 में 10 वर्षो बाद कांग्रेस को आंध्र प्रदेश की सत्ता में लाने का श्रेय इन्हें जाता है। पेशे से डॉक्टर राज्य के ऐसे मुख्यमंत्री थे जो जनता के बीच बेहद लोकप्रिय थे। विमान दुर्घटना में निधन। पुत्र जगनमोहन ने मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने के कारण विरोध के चलते पार्टी छोड़कर वाइएसआर कांग्रेस का गठन किया। यह चुनाव उनके लिए अग्निपरीक्षा की घड़ी है। इसके नतीजे उनके सियासी भविष्य को तय करेंगे।

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Ex-corporator misbehaves with Joshi, expelled

कानपुर के आर्यनगर विधानसभा में भाजपा के कार्यकर्ता सम्मेलन में जमकर हंगामा हुआ। जिसमें पार्टी से लोकसभा प्रत्याशी और वरिष्ठ नेता डा. मुरली मनोहर जोशी के साथ पूर्व पार्षद ने अभद्रता कर डाली। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने मामला शांत कराने का प्रयास किया लेकिन मामला नहीं सुलझा। बाद में जिलाध्यक्ष ने उसे पार्टी से निष्कासित कर दिया।

महानगर अध्यक्ष सुरेन्द्र मैथानी के अनुसार सम्मेलन शुरू होने पर डॉ. जोशी ने मंच पर विराजमान लोगों का नाम बोलना शुरू किया तभी सामने से पूर्व पार्षद विकास जायसवाल की आवाज आई। बाबू जी खड़े होकर बोलिए आवाज नहीं आ रही'। इसके बाद बोले कि जब से आप आएं है तब से बैठे ही हैं। खड़े होकर नहीं मिलना था तो चुनाव में क्यों खड़े हो गए। कार्यकताओं ने पूर्व पार्षद को शांत कराने का प्रयास किया लेकिन उनके साथ कुछ और लोगों ने भी नारेबाजी शुरू कर दी।

उसने कुछ विधायकों पर भी आरोप लगाए। इस पर जिलाध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी ने सार्वजनिक रुप से पूर्व पार्षद को पार्टी से निष्कासित करने की घोषणा कर दी। तब जाकर मामला शांत हो सका। पूर्व पार्षद विकास जायसवाल ने कहा कि पार्टी का कार्यकर्ता यदि अपने सम्मेलन में बात नहीं कहेगा तो कहां कहेगा। यह वही पूर्व पार्षद हैं जिनका झगड़ा पूर्व एसएसपी यशस्वी यादव से हुआ था तो पूरी भाजपा इनके पक्ष में आ गई थी।

हंगामे के पीछे गुटबाजी तो नहींकार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान हुए हंगामे के पीछे शहर भाजपा में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी उभर कर सामने आ गई। चर्चा है कि टिकट की लाइन में लगे कुछ उम्मीदवार जो डा. जोशी के नाम को शहर में पसंद ही नहीं कर रहे थे। यह सब उन्होंने ही प्रायोजित किया हो। हालांकि सुरेन्द्र मैथानी ने इसका आरोप विरोधी पार्टियों के सिर मढ़ा है।

शहीद के घर पहुंचे जोशीलोकसभा प्रत्याशी मुरली मनोहर जोशी कल शहीद आशीष यादव के घर पहुंचे। उन्होंने दुखी परिवारवालों को सांत्वना देने के साथ ही हर सुख दुख में साथ रहने का वादा किया। दो दिन पूर्व ग्वालियर के पास हुए हरक्युलिस विमान हादसे में मंगला विहार निवासी एयरफोर्स पायलट आशीष यादव शहीद हो गए थे। शनिवार को उनका अंतिम संस्कार हुआ था। रविवार को उनके आवास पर मुरली मनोहर जोशी पहुंचे। उन्होंने परिवारवालों के साथ घर पर आधा घंटा बिताया।

भाजपाइयों ने किया पुतला दहन

शहर में भाजपा का बाहरी प्रत्याशी बर्दाश्त नहीं होगा। महालक्ष्मी गेस्ट हाउस में रविवार को हुई बैठक के बाद कार्यकर्ताओं ने यह फैसला लिया व जाजमऊ चौराहे पर डा. जोशी का पुतला दहन कर दिया।

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Sonia Gandhi attacks on BJP during Delhi Election Rally for "talking big"

77 के आम चुनाव में कांग्रेस के सफाए के दो साल बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की रैली दिल्ली के अजमल खां पार्क में हुई थी। कांग्रेसी दावा करते हैं कि उसी के बाद कांग्रेस की वापसी शुरू हुई। करीब 35 साल बाद रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उसी पार्क में पार्टी के पस्त सूरमाओं में जोश फूंकने पहुंचीं।

चुनावी थकान के बावजूद तल्ख तेवरों में सोनिया ने नाम लिए बगैर भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा तो दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर भी मैदान छोड़कर भागने का आरोप लगाने से नहीं चूकीं। बोलीं, सरकार चलाना कोई बच्चों का खेल नहीं है। दिल्ली में सरकार तो बना ली लेकिन बाद में मैदान छोड़कर भाग खड़े हुए। सोनिया ने साफ कर दिया कि सरकार बनाना और चलाना कांग्रेस के लिए कोई नई बात नहीं है। लेकिन यह चुनाव विचारधारा की लड़ाई है। एक ओर कट्टरता, बांटने वाली, भाई-भाई में भेद करने वाली विचारधारा है तो दूसरी ओर कांग्रेस की विचारधारा है जो पूरे समाज को जोड़ने वाली और विपक्षियों से भी सद्भावना रखने वाली है। उन्होंने कहा कि जो बलिदान की बातें करते हैं, उन्हें इसके बारे में कुछ नहीं पता। कांग्रेस ने ही देश की गंगा-जमुनी तहजीब को जिंदा रखा है।

इससे पहले असम के लखीमपुर जिले में आयोजित रैली में संप्रग अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा देश में नफरत की राजनीति फैला रही है। उन्होंने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि वे देश भर में बड़ी-बड़ी बातें कर जनता को बहला रहे हैं। लेकिन जब केंद्र में उनकी सरकार थी तो उन्होंने कुछ नहीं किया। बोलीं, संप्रग झूठा वादा नहीं करती, जो भी कहा देश के सामने पूरा किया। 'हर हाथ शक्ति, हर हाथ तरक्की' का नारा देते हुए कहा कि कांग्रेस इस तरह की राजनीति में विश्वास करती है। उसके नेताओं ने देश के लिए अपना खून बहाया है। आजादी से पहले और उसके बाद विपक्ष का कहीं कोई नामोनिशान नहीं था। अब वे देश को बांटने में लगे हैं।

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Loksabha election:life of sabar tribe

भारत की आजादी के बाद से चुनाव अपने नियत समय पर हमेशा आते हैं लेकिन अफसोस कि गली-नुक्कड़ तक वोटरों को लुभाने का राग अलापने वाले नेता भी उपेक्षित जगहों पर नहीं जाना चाहते। सरकार कहती है झारखंड की सबर जनजाति लुप्तप्राय है। उसकी इन बातों को सबसे बड़ा बल यहां आकर मिलता है। सच में, पर्याप्त पानी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ये जनजाति जल्द लुप्त होने की कगार पर है। करीब 115 लोगों की जनसंख्या वाले क्षेत्र खडि़याकोचा में आजादी के बाद से न कोई विधायक आया न सांसद।

जमशेदपुर संसदीय क्षेत्र के पोटका प्रखंड मुख्यालय से महज 25 किलोमीटर दूर खड़ियाकोचा में घुसते ही दो सबर महिलाओं से भेंट होती है। बंगरी सबर और पारो सबर। उम्र 40 से ऊपर। दोनों लकड़ी काटने जा रही हैं। वोटर कार्ड के बारे में पूछने पर चौंककर बोली चुनाव आ गया क्या? बोलीं, गांव वालों को तो चुनाव के बारे में कुछ पता ही नहीं। यहां कोई वोटर कार्ड बनाने वाला भी नहीं आया। गांव में लगभग 50 मतदाता हैं, उनमें से महज 19 लोगों के पास वोटर कार्ड है। यहां के वृद्धों व विधवाओं को कोई पेंशन नहीं मिलती। सरकारी सुविधा नदारद, गांव में सब भूखे-नंगे। बीमार हुए तो भगवान सहारा। गांव में सड़क नहीं है। जंगल झाड़ियों को काटकर रास्ता बनाया है। बिजली की बात छोड़िए, ढिबरी- लालटेन के लिए केरोसिन मिल जाए तो रात कटती है। पानी नहीं है, आसपास के तालाब-गड्ढों से प्यास बुझती है। प्रशासन के किसी अधिकारी ने भी इस ओर रुख नहीं किया। गांव में कुल 22 घर हैं जिनमें 115 लोग रहते हैं।

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Jaswant singh attacks on BJP

भाजपा से निष्कासित किए गए वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह ने रविवार को नरेंद्र मोदी और उनके इर्द-गिर्द केंद्रित प्रचार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा अपनी विचारधारा से दूर होती जा रही है। पार्टी में पुराने नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है। यहां व्यक्ति पूजा शुरू हो गई है। क्षणिक लाभ के लिए किसी राजनीतिक दल को एक व्यक्ति का गुलाम नहीं होना चाहिए।

न्यूज एजेंसी पीटीआइ को दिए गए विशेष साक्षात्कार में 76 वर्षीय जसवंत सिंह ने भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह पर भी निशाना साधा। कहा- 'मैंने पार्टी को उनके अध्यक्ष बनने को लेकर चेतावनी दी थी और यह भी कहा था कि भाजपा को उनके निर्णय का खामियाजा उठाना पड़ेगा।' भाजपा के संस्थापक सदस्य रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और भैरोसिंह शेखावत ने जो मूल्य स्थापित किए थे, पार्टी अब पूरी तरह उससे विमुख हो गई है। अब यहां सफलता पाने के लिए न स्वीकार किए जा सकने वाले शॉर्ट कट अपनाए जा रहे हैं।

पढ़ें: भाजपा ने नहीं साधा संपर्क, डटे रहेंगे जसवंत

भाजपा द्वारा नमो मंत्र गढ़ने और पार्टी के ऊपर व्यक्तियों की स्तुति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जसवंत सिंह ने कहा कि 'हमें इसका सार समझना चाहिए। व्यक्ति अस्थाई होते हैं। ऐसे राजनीतिक दल, जिनकी इच्छा देश की सेवा करना है, को व्यक्तियों का दास नहीं बनना चाहिए।' इस सवाल पर कि क्या भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री उम्मीदवार की घोषणा चुनाव से पहले ही कर देना अच्छा फैसला था, उन्होंने कहा कि यह समय बताएगा और भारत भुगतेगा। ज्ञात हो कि जसवंत सिंह को शनिवार देर रात भाजपा से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था। बाड़मेर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना नाम वापस लेने से इन्कार करने पर उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई। भाजपा ने यहां से सोनाराम चौधरी को टिकट दे दिया है।

मिला मुलायम का सहारा

जयपुर। भाजपा से निकाले जाने के बाद जसवंत सिंह को सपा मुखिया मुलायम सिंह का सहारा मिल गया है। मुलायम ने उनसे फोन पर बातचीत कर चुनाव में समर्थन का आश्वासन दिया है। सपा की राजस्थान इकाई को भी जसवंत की मदद करने के लिए कहा गया है। मुलायम सिंह उनके चुनाव प्रचार के लिए राजस्थान भी आ सकते हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भी उनके समर्थन में यहां आने की चर्चा है। इस बीच भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। वह भी सीकर लोकसभा क्षेत्र से टिकट न मिलने पर नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे।

यह मोदी का विध्वंसकारी प्रभाव : कांग्रेस

दिल्ली। कांग्रेस ने जसवंत सिंह को भाजपा से निकाले जाने की घटना को नरेंद्र मोदी के विध्वंसक प्रभाव का संकेत करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अभी आगे मोदी की वजह से भाजपा में और टूट-फूट होगी। पहली झलक तो दिख ही गई है।

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UPA empty hand on economic front in the time of election

कहते हैं अंत भला तो सब भला, लेकिन संप्रग सरकार का अंतिम वर्ष अर्थव्यवस्था के लिए कुछ बेहतर साबित नहीं हुआ है। देश की आर्थिक स्थिति आज खस्ताहाल है। सोमवार को समाप्त हो रहा संप्रग-दो का आखिरी वित्तीय वर्ष, संप्रग-एक और राजग के आखिरी साल की तुलना में बेहद खराब रहा है। हालत यह है कि चुनावी मैदान में आर्थिक मोर्चे पर दिखाने के लिए सरकार के पास कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है।

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अर्थव्यवस्था की स्थिति ऐसी है कि वित्त वर्ष 2013-14 में विकास दर घटकर पांच प्रतिशत से नीचे रहने का अनुमान है जो पिछले दस साल में न्यूनतम स्तर होगा। आंकड़ों में थोक महंगाई दर मामूली रूप से घटकर फरवरी में 4.68 प्रतिशत पर जरूर आ गयी है, लेकिन खुदरा महंगाई दर भी अब भी दहाई के अंक की दहलीज पर खड़ी है। पता नहीं यह कब दहाई के अंक को पार कर जाये। रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम आसमान पर हैं। यही वजह है कि रिजर्व बैंक भी ब्याज दरों में कटौती से कतरा रहा है। बेरोजगारी भी चरम पर है। केंद्रीय श्रम मंत्रालय के मुताबिक 15 से 29 वर्ष के युवाओं में बेरोजगारी दर 13 प्रतिशत से अधिक है। सोने के आयात पर कड़ाई के चलते चालू खाते के घाटे में गिरावट जरूर आयी है, लेकिन यह स्थायी नहीं है। चुनाव के बाद नई सरकार बनने पर चालू खाते का घाटा फिर ऊपर जा सकता है। सबसे बड़ी चुनौती रुकी हुई महा परियोजनाएं हैं। फरवरी महीने तक करीब 500 अरब रुपये की परियोजनाएं फसीं हुई थीं। रुपये के मुकाबले डालर का मूल्य भी 60 रुपये पर बना हुआ है जो कि संप्रग-एक के आखिरी वर्ष में लगभग 46 रुपये था। संप्रग-एक के आखिरी वर्ष में विकास दर थोड़ी बेहतर 6.7 प्रतिशत थी। हालांकि, महंगाई दर आठ प्रतिशत से ऊपर थी। वैसे, राजग के आखिरी वर्ष में अर्थव्यवस्था के स्तंभ संप्रग-एक और संप्रग-दो के मुकाबले मजबूत थे। वित्त वर्ष 2003-04 में विकास दर 8 प्रतिशत से अधिक थी जबकि महंगाई दर 5.5 प्रतिशत के निम्न स्तर पर थी। उस समय चालू खाते का घाटा भी एक प्रतिशत के आस-पास था।

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EC not to ban opinion polls; wants Centre to make law

ओपीनियन पोल यानी जनमत सर्वेक्षणों को प्रतिबंधित करने के सवाल पर चुनाव आयोग ने मनमोहन सरकार को करारा झटका दिया है। आयोग ने कानून मंत्रालय को टका सा जवाब दिया है कि वह संविधान के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर सर्वेक्षणों पर रोक नहीं लगाएगी। उसने गेंद सरकार के पाले में डाल दी है। आयोग का कहना है कि सरकार ही कानून बनाकर जनमत सर्वेक्षणों को प्रतिबंधित करे।

कुछ दिनों पहले कानून मंत्रालय ने सुझाव दिया था कि आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत प्रदत्त शक्तियों को इस्तेमाल करते हुए ओपीनियन पोल पर रोक लगाए। सूत्रों के अनुसार आयोग ने मंत्रालय के इस सुझाव पर हाल ही में अपना जवाब भेज दिया है। आयोग ने कहा कि इस मामले में सरकार ही कोई कानून बनाए। यही बेहतर विकल्प होगा। आयोग के मुताबिक, 'सर्वेक्षणों पर रोक लगाने के लिए अनुच्छेद 324 के इस्तेमाल विधि सम्मत नहीं होगा। पूर्व में सरकार ने जैसे कानून बनाकर एग्जिट पोल पर रोक लगा दिया। इस मामले में भी वह ऐसा ही कदम उठाए।' आयोग ने पहले प्रस्तावित किया था कि लोकसभा एवं विधानसभाओं के चुनाव की अधिसूचना जारी होने से लेकर अंतिम चरण का मतदान होने तक जनमत सर्वेक्षणों के परिणाम के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगाई जाए। इस वर्ष के शुरू में अटार्नी जनरल जीई वाहनवती ने भी अपनी रजामंदी दे दी थी। लेकिन कानून मंत्रालय चाहता था कि इस बारे में अंतिम फैसला चुनाव आयोग ही करे। ध्यान रहे कि पिछले वर्ष हुए पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव से पूर्व ओपीनियन पोल पर रोक को लेकर भाजपा और कांग्रेस आपस में भिड़ गई थी। सर्वेक्षणों में पिछड़ती दिख रही कांग्रेस ने जहां इन्हें प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव किया, वहीं भाजपा समेत अन्य विपक्षी दलों ने इस तरह की किसी भी कोशिश का विरोध किया। बहरहाल इस मामले में सरकार ही हीलाहवाली करती रही। 28 फरवरी को आयोग ने सरकार को पत्र लिखकर कहा कि कानून में संशोधन कर चुनावों के दौरान सर्वेक्षणों को प्रतिबंधित करने के उसके प्रस्ताव पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया।

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Saturday, March 29, 2014

Analysis election crop gory in green revolution states

जिस पूर्वी क्षेत्र की दूसरी हरित क्रांति से देश खाद्यान्न के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गया, राजनीतिक रूप से भी अति उर्वरा इस जमीन पर अब वोटों की खेती शुरू हो गई है। लोकसभा की चुनावी जंग में सत्ता की कुंजी भी उसी के हाथ लगने वाली है, जिसके कब्जे में यहां की राजनीतिक जमीन होगी। इसी मकसद से भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और सपा प्रमुख मुलायम सिंह ने अपनी भी यहीं से ताल ठोंकी है।

हरितक्रांति की दूसरी अलख जगाने वाले पूर्वी क्षेत्र में लगभग पौने दो सौ संसदीय सीटें आती हैं। इसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में राजनीतिक दलों के बीच कड़ा संघर्ष है। केंद्र में सरकार बनाने में इस पूर्वी क्षेत्र की भूमिका अहम हो गई है। जाति व वर्गो में बंटे इस इलाके में गरीबी और बेरोजगारी की खाद ने राजनीतिक जमीन को और भी उर्वरा बना दिया है।

संप्रग के दूसरे कार्यकाल में यहां की उत्पादकता को दोगुना करने के मकसद से दूसरी हरितक्रांति की शुरुआत की गई थी, जिसे शत प्रतिशत सफलता मिली। खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। लिहाजा हरितक्रांति की योजना जारी है। दूसरी हरितक्रांति वाले पूर्वी क्षेत्र की इस धरती में अब सत्ता पर काबिज होने के लिए राजनीतिक दल वोट उगाने में जुट गए हैं।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में 32 संसदीय सीटों का जातीय समीकरण राजनीतिक दलों को लुभाने लगा है। 20 फीसद के आसपास यहां मुस्लिम मतदाता है, जो गैर भाजपा दलों के लिए बड़ा आकर्षण है। यही वजह है कि यहां की माटी में बसपा और समाजवादी पार्टी खूब फूल और फल रही है। दलित मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है जो बहुजन समाज पार्टी का बड़ा वोट बैंक है। पिछड़ी जातियों में मुलायम सिंह की जाति वाले मतदाताओं की संख्या भी खूब है, जिससे उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग का फायदा मिलता है।

लोकसभा चुनाव में भाजपा नरेंद्र मोदी को आगे कर जहां हिंदू व मुस्लिम ध्रुवीकरण का लाभ चाह रही है, वहीं मोदी के पिछड़ा होने का लाभ भी लेने का दांव चल दिया है। दूसरी ओर मुस्लिमों के सबसे बड़े खैरख्वाह और पिछड़े वोटों पर परंपरागत अपना अधिकार समझने वाले मुलायम को यह नागवार गुजरा, इसीलिए अपना गढ़ बचाने के लिए खुद आजमगढ़ से चुनाव मैदान में कूद पड़े।

पूर्वी राज्यों में बिहार में 40 सीट, झारखंड में 14, असम में 14, छत्तीसगढ़ में 11, ओड़िशा में 21 और पश्चिम बंगाल में 42 संसदीय सीटें हैं, जिसके लिए सबसे अधिक मारामारी है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस जहां एकतरफा चुनाव लड़ती दिख रही है, वहीं ओड़िशा में नवीन पटनायक सभी दलों पर भारी पड़ रहे हैं। बनारस से मोदी के चुनाव लड़ने से बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा की लहर से इन्कार नहीं किया जा सकता है।

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Analysis cast base politics starts in bihar

जाति आधारित राजनीति की जमीन रहे बिहार में एक बार फिर लोकसभा चुनाव के लिए नेता जातीय समीकरण बनाने की कोशिश में हैं। शुरू में विकास के नाम और दुहाई पर वोट मांगने वालों की राग अब जातीय हो गई है।

प्रत्येक सीट पर उतारे गए उम्मीदवारों के नाम पढ़कर भी इस समीकरण का एक खाका आसानी से दिखाई देता है। यहां जातियों को लेकर 'माई' (मुस्लिम -यादव), 'लव-कुश' (कुर्मी-कुशवाहा), 'डीएम' (दलित-मुस्लिम), एसडीएमवीएस (सवर्ण, दलित, मुस्लिम, वंचित समाज), महादलित जैसे समीकरण भी बनाए गए।

प्रदेश में जातीय विकास की राजनीति इस कदर हावी है कि शुक्रवार को कभी बिहार के पांच दिन के मुख्यमंत्री रहे सतीश प्रसाद सिंह ने यह कहते हुए भाजपा से इस्तीफा दे दिया कि पार्टी ने वायदे के मुताबिक कुशवाहा समाज के लोगों को टिकट नहीं दिया। कुछ दिन पहले जदयू छोड़ने वाले साबिर अली (राज्यसभा सदस्य) ने कहा था कि पार्टी ने उन्हें इसलिए टिकट नहीं दिया कि वो मुसलमान हैं। कुर्मी होते तो ऐसा नहीं होता।

जाति आधारित राजनीति के पुराने खिलाड़ी राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद सबको 'अहीर मरोड़' का दांव बता और समझा रहे हैं। कुर्मी बहुल इलाकों में उनकी सफाई होती है-'कुर्मी भाइयों, मैं हमेशा आपके दिल में रहा हूं। कुछ लोगों ने साजिश कर आपको मुझसे दूर करने की कोशिश की है।' सवर्ण जातियों को लेकर लालू आजकल कुछ ज्यादा आग्रही हैं। उनका कहना है कि 'मैंने कभी नहीं कहा कि भूरा बाल (भूमिहार, राजपूत, ब्राह्माण, लाला) को साफ करो।'

दरअसल, नेता जातीय बयानों की आड़ में अपने काम और वादे को छुपा लेते हैं। जातीय संगठन टिकट के लिए पार्टियों पर दबाव बनाने का चरण पूरा कर चुके हैं। अब फतवा का दौर चल रहा है जिसमें 'जाति तोड़ो-जनेऊ तोड़ो' जैसे नारों से हवा बनाने की कोशिश हो रही है।

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I am stumbling block for narendra modi nitish kumar

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी उन्हें अपनी राह का सबसे बड़ा रोड़ा मानते हैं। पटना में चुनाव प्रचार के दौरान शनिवार को नीतीश ने कहा कि लोग बेबुनियाद और मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं। इससे पहले राज्य के मुख्यमंत्री ने कल भी गया के इमामगंज और बेलागंज क्षेत्र में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए भी मोदी पर जमकर निशाना साधा था।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद को लोग अलग-अलग चश्मे से देख रहे हैं। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा कि लोगों को पूरे देश में दो ही दुश्मन नजर आ रहे हैं, एक भारत का मुसलमान और दूसरा नीतीश कुमार। गौरतलब है कि मोदी ने दो दिन पूर्व सासाराम और गया में रैली को संबोधित करते हुए नीतीश सरकार पर राज्य में आतंकवाद, बिजली और सिंचाई की समस्या को लेकर जमकर निशाना साधा था।

गौरतलब है कि जनता दल युनाइटेड [जदयू] पिछले वर्ष भाजपा से 17 वर्ष पुराना अपना गठबंधन तोड़ कर अलग हो गया था। इस बार लोकसभा चुनाव में दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने रामविलास पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी और उपेन्द्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के साथ इस बार गठबंधन किया है।

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Now sp leader comments on bsp supremo mayawati

अभी सहारनपुर में कांग्रेस प्रत्योशी इमरान मसूद द्वारा नरेन्द्र मोदी के खिलाफ जहर उगलने का मामला थमा भी नहीं था कि शामली में एक सभा को संबोधित करते हुए सपा के कैराना लोकसभा प्रत्यासी नाहिद हसन ने मायावती के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी कर बखेड़ा खड़ा कर दिया।

नाहिद ने बसपा सुप्रीमो मायावती पर निशाना साधते हुए कहा कि मायावती भाजपा नेता नरेन्द्र मोदी की गोद में तीन बार बैठ चुकी हैं। इसके आगे उन्होंने माया और मोदी को अविवाहित बताते हुए ऐसी आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके लिए आम बोलचाल की भाषा में भी कोई जगह नहीं है। कहा कि पहले मायावती को उनके बाबा ने हराया था, उसके बाद में उनके पिता से एक बार उनका पाला पड़ा था और अब यदि उनसे उसका पाला पड़ा तो आप खुद ही देख लो। उनका मतलब था के 1984 के लोकसभा चुनाव में उनके बाबा अख्तर हसन ने मायावती को हराया था। उसके बाद लखनउ में गेस्ट हाउस कांड उनके पिता मुनव्वर हसन का नाम भी उछला था। अब यदि मायावती उनके सामने प्रचार करने आती है तो वो भी उसे देख लेंगे। साथ ही नाहिद ने कहा कि मायावती का पागल हाथी शामली व कैराना में नही घुस पायेगा। गौरतलब है उनकी मां तबस्सुम हसन ने 2009 में कैराना से लोकसभा सीट से बसपा के ही टिकट पर चुनाव लड़कर संसद पहुंची थी। नाहिद की इस टिप्पंणी के बाद जिले का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। तमाम दलों ने इसकी निंदा की है।

वहीं, दूसरी ओर पुलिस प्रशासन का हाल यह है जो वीडियो दर्जनों हाथों में पहुंच चुका है उसे हासिल करने में पुलिस प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं। इस संबंध में जब पुलिस प्रशासन से बात की गई तो अधिकारियों ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि वीडियो क्लिप एकत्र करने के प्रयास किए जा रहे हें। माना जा रहा है पुलिस प्रशासन पर सत्तारूढ़ पार्टी का दबाव है और इसी कारण मामले में लीपा पोती के प्रयास किए जा रहे हैं। पूरे प्रकरण के मामले में नाहिद हसन से बात करने का कई बार प्रयास किया गया लेकिन वे उपलब्ध नहीं हो सके।

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Development model is better than gujarat akhilesh

सिकंदराबाद में आयोजित चुनावी रैली में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दावा किया कि जितना विकास सपा सरकार ने उत्तर प्रदेश में कराया है, कम समय में उतना रिकार्ड विकास किसी और ने नहीं कराया है।

रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग गुजरात के विकास मॉडल की बात कर रहे हैं, वे भ्रमित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विकास का मॉडल गुजरात से बेहतर है। अपने 20 मिनट के संबोधन के दौरान उन्होंने किसी भी पार्टी का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया। लेकिन प्रकारांतर से मोदी पर निशाना साधा। अखिलेश यादव हेलीकाप्टर से करीब 12.16 बजे सिकंदराबाद पहुंचे थे। संबोधन समाप्त करने के बाद वह बड़ौत के लिए रवाना हो गए।

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Sabir alis bjp membership may be cancelled

जदयू से निकाले जाने के बाद भाजपा में शामिल हुए साबिर अली की सदस्यता शनिवार को रद्द कर दी गई। गौरतलब है कि भाजपा के पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी की तारीफ करने के बाद जेडीयू से निकाले गए साबिर अली को भाजपा में शामिल करने के बाद तूफान मच गया था। मुख्तार अब्बास नकवी समेत भाजपा के कई बड़े नेताओं ने इस फैसले का खुलकर विरोध किया। इसके अलावा आरएसएस ने भी पार्टी नेतृत्व से कह दिया है कि साबिर अली की सदस्यता रद की जाए।

साबिर अली ने भी भाजपा की सदस्यता हासिल करने के बाद उठे विवादों के बाद बिहार के भाजपा प्रभारी धमर्ेंद्र प्रधान को खत लिखकर आग्रह किया था कि उनकी सदस्यता फिलहाल होल्ड पर रखी जाए। साबिर ने कहा कि एक कमेटी बनाकर उनकी जांच करा ली जाए और वह बेदाग साबित होने तक इंतजार करेंगे। साबिर अली ने यह भी कहा है कि अगर वे दोषी पाए गए तो राजनीति से ही संन्यास ले लेंगे। उधर मुख्तार अब्बास नकवी ने अपने जिस ट्वीट में साबिर अली को भटकल का दोस्त बताया था, उसे हटा लिया है।

कर्नाटक में श्रीराम सेना के विवादित नेता प्रमोद मुथालिक को शामिल कराकर फजीहत झेल चुकी पार्टी साबिर अली को लेकर घिर गई थी। पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने सार्वजनिक विरोध जताते हुए स्पष्ट कर दिया कि साबिर को बाहर का रास्ता दिखाना ही पड़ेगा। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि आतंकी भटकल और दाऊद इब्राहिम से उसके रिश्ते रहे हैं।

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Aap got 1 million of donation in a day

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ काशी से चुनाव लड़ने का मन बना चुके आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जब चुनाव लड़ने के लिए लोगों से दान मांगा तो पार्टी को एक ही दिन में एक करोड़ रुपये चंदे के रूप में मिले हैं। हालांकि लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ने 200 करोड़ रुपये चंदे के रूप में एकत्रित होने का अनुमान लगाया था। मगर बृहस्पतिवार शाम छह बजे तक पार्टी की झोली में कुल चंदा 17,41,74,117 रुपये ही आया है।

पार्टी के नेता पंकज गुप्ता के अनुसार बुधवार और बृहस्पतिवार शाम तक के समय को मिलाकर पार्टी के पास एक करोड़ रुपये का चंदा आ गया है। इसमें हांगकांग निवासी गणेश रमानी ने पार्टी को सबसे बड़ी रकम 62.03 लाख रुपये चंदे के रूप में दी है। गुप्ता की मानें तो यह आप समर्थकों का मोदी का जवाब है।

बृहस्पतिवार शाम छह बजे तक चंदे के रूप में 33,20,126 रुपये आए हैं। यह 892 लोगों ने दिए हैं। एक दिन में मिले कुल चंदे में दिल्ली का हिस्सा देखते हुए पता चलता है कि दिल्ली में आप पार्टी के भले ही अधिक समर्थक हैं, लेकिन चंदा सबसे अधिक महाराष्ट्र के लोगों से मिला है। पार्टी को मिले इस चंदे में सबसे ज्यादा 21.5 फीसद महाराष्ट्र से है। दूसरे नंबर पर दिल्ली है, जहां से 21.3 फीसद चंदा आया है।

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Friday, March 28, 2014

AAP got 1 Million of donation in a day

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ काशी से चुनाव लड़ने का मन बना चुके आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जब चुनाव लड़ने के लिए लोगों से दान मांगा तो पार्टी को एक ही दिन में एक करोड़ रुपये चंदे के रूप में मिले हैं। हालांकि लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ने 200 करोड़ रुपये चंदे के रूप में एकत्रित होने का अनुमान लगाया था। मगर बृहस्पतिवार शाम छह बजे तक पार्टी की झोली में कुल चंदा 17,41,74,117 रुपये ही आया है।

पार्टी के नेता पंकज गुप्ता के अनुसार बुधवार और बृहस्पतिवार शाम तक के समय को मिलाकर पार्टी के पास एक करोड़ रुपये का चंदा आ गया है। इसमें हांगकांग निवासी गणेश रमानी ने पार्टी को सबसे बड़ी रकम 62.03 लाख रुपये चंदे के रूप में दी है। गुप्ता की मानें तो यह आप समर्थकों का मोदी का जवाब है।

बृहस्पतिवार शाम छह बजे तक चंदे के रूप में 33,20,126 रुपये आए हैं। यह 892 लोगों ने दिए हैं। एक दिन में मिले कुल चंदे में दिल्ली का हिस्सा देखते हुए पता चलता है कि दिल्ली में आप पार्टी के भले ही अधिक समर्थक हैं, लेकिन चंदा सबसे अधिक महाराष्ट्र के लोगों से मिला है। पार्टी को मिले इस चंदे में सबसे ज्यादा 21.5 फीसद महाराष्ट्र से है। दूसरे नंबर पर दिल्ली है, जहां से 21.3 फीसद चंदा आया है।

Source: Lok Sabha Elections 2014 Schedule

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Ashwani kumar exclusive interview

संप्रग सरकार के दस सालों में अश्विनी कुमार एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने करीब आधा दर्जन मंत्री पद संभाले तो वहीं आरोपों व मीडिया के दबाव के बाद इस्तीफा देकर सरकार से बाहर हुए। सरकार के भीतर व संगठन के साथ नजदीक से काम करने का अनुभव रखने वाले कुमार को कसक है कि आरोपों की सियासत ने संप्रग सरकार को उस कगार पर ला दिया जहां उसके कामों के मुकाबले इल्जामों का बोझ ज्यादा हो गया है। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री और सरकार को कमजोर बताने और जताने की कवायद में विपक्ष जिम्मेदार है तो साथ ही कई अपनों का दामन भी बेदाग नहीं है। 'दैनिक जागरण' के विशेष संवाददाता प्रणय उपाध्याय से बातचीत में पूर्व कानून मंत्री ने कहा कि सरकार के भीतर से उठे कई मंत्रियों के विरोधाभासी सुरों और प्रचार ने भी कमजोर नेतृत्व की छवि बनाने में योगदान दिया।

आम चुनाव में संप्रग सरकार के एक दशक की समीक्षा हो रही है। आपकी नजर में सरकार कहां नाकाम रही और प्रधानमंत्री को क्यों कहना पड़ा कि अब उन्हें इतिहास से ही न्याय की उम्मीद है?

-मेरी नजर में संप्रग सरकार आजाद भारत में गरीबों व वंचितों के लिए सर्वाधिक योजनाएं बनाने और उनके क्रियान्वयन को धन आवंटन देने वाली सरकार रही। लेकिन, बीते 2-3 सालों में कुछ ऐसा माहौल बना कि आरोप-प्रत्यारोप का शोर बढ़ता गया और सरकार अपने अच्छे कामों पर चर्चा को जनता के बीच ले जाने में नाकाम रही। प्रधानमंत्री का यह कहना बेहद पीड़ादायक है कि अब इतिहास ही उनका आकलन करेगा। मेरी नजर में देश का इतिहास मनमोहन सिंह का आकलन कहीं अधिक समग्रता और सच्चाई से करेगा।

.लेकिन पीएम की छवि कमजोर दिखाने में पार्टी और सरकार के भीतरी तत्वों को कितना दोष देंगे?

-संप्रग सरकार एक दशक चली। इसमें बड़ा योगदान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पीएम के बीच बेहतरीन तालमेल का है। कांग्रेस अध्यक्ष ने पूरी मजबूती के साथ मनमोहन सिंह को समर्थन दिया। पीएम स्वभाव से विनम्र हैं। कई बार उनकी विनम्रता को भी कमजोरी मान लिया जाता है। विपक्ष इसी को दुष्प्रचार का साधन बनाता रहा। परमाणु करार या अन्य कई आर्थिक फैसलों पर देखा जा सकता है कि उन्होंने दृढ़ता के साथ निर्णय लिया।

हां, इतना जरूर मानूंगा कि समय-समय पर मंत्रिमंडल के भीतर से भी पीएम और सरकार के फैसलों के खिलाफ विरोध के ऐसे सुर उठते रहे जो नहीं उठने चाहिए थे। सामूहिक जिम्मेदारी से बंधे इन मंत्रियों के व्यवहार से नुकसान हुआ। यह जरूरी था कि उन्हें अनुशासित किया जाता।

कांग्रेस अध्यक्ष का पूरा समर्थन होने के बावजूद ऐसा होता रहा तो इसके पीछे क्या व्यक्तिगत हित जिम्मेदार थे?

-अब इसके सही कारण क्या थे इसकी किसी वक्त पर समीक्षा करनी होगी। हालांकि अभी मैं किसी निष्कर्ष पर टिप्पणी नहीं करूंगा।

भ्रष्टाचार अहम मुद्दा रहा जिसपर विपक्ष आरोप लगाता रहा। सरकार ने भी कई मंत्रियों के इस्तीफे कराए। आपको भी सीबीआइ जांच रिपोर्ट देखने को लेकर उठे विवाद के बाद पद छोड़ना पड़ा। इस पर क्या कहेंगे?

-देखिए, भ्रष्टाचार एक मुद्दा है इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता। पूरे समाज में इसका विस्तार है और इसके खिलाफ व्यापक स्तर पर लड़ाई जरूरी है। लेकिन, महज आरोप काफी नहीं है। न्याय का नैसर्गिक सिद्धांत है कि कानून प्रक्रिया से सिद्ध न होने तक हर व्यक्ति मासूम है। दुर्भाग्यवश बीते कुछ सालों में आरोपों का शोर और उन्हें लेकर मीडिया का दबाव भी इस कदर बढ़ा कि सरकार के फैसले भी प्रभावित हुए।

अपने मामले में स्पष्ट कर दूं कि मेरे खिलाफ न तो कोई आरोप है और न ही सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी। मुझे इस्तीफे का कोई मलाल नहीं क्योंकि संसदीय व राजनीतिक मर्यादा के चलते मैंने त्यागपत्र दिया और पार्टी व जनता दोनों से मुझे इसके बाद भरपूर स्नेह मिलता रहा।

यानी आप कहेंगे कि केवल मीडिया के दबाव में आपका इस्तीफा हुआ?

-जरूर। मीडिया के दबाव में ही पवन बंसल और अशोक चह्वाण के भी इस्तीफे हुए। उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने का फैसला इसकी तस्दीक करता है। सिंहावलोकन करें तो लगता है कि दबाव में सरकार ने कई अतिवादी निर्णय भी कर दिए। उदाहरण के लिए दिल्ली दुष्कर्म कांड के बाद बने एंटी-रेप कानून में कई ऐसे प्रावधान हैं जिनका गलत इस्तेमाल संभव है। एक वकील होने के नाते मुझे लगता है कि इसमें जल्द से जल्द संशोधन की जरूरत है ताकि इसका दुरुपयोग न हो।

चुनावी परीक्षा से पहले क्या मानेंगे संप्रग सरकार के कौन से विषय कमजोर रह गए?

-बीते कुछ समय में हम जनता की नब्ज पढ़ने में नाकाम हुए और लोगों से हमारा संवाद कमजोर हुआ। राज्यों में हम अपने संगठन को मजबूत करने में भी कामयाब नहीं हुए। जिसके कारण लोगों के बीच हमारे अच्छे कामों का भी सही आकलन नहीं हो पा रहा।

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SP supporters organized dance program at the school in up

जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे प्रत्याशी तथा उनके समर्थक वोटरों को लुभाने के लिए अपनी भी चाल चल रहे हैं। इसमें सबसे सुलभ हो रहा है डांस कार्यक्रम। इन कार्यक्रमों में बार बालाओं के ठुमकों पर जमकर नोट की बारिश भी हो रहे हैं। इन डांसों के आयोजन में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी सबसे आगे हैं।

समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों ने कल इलाहाबाद तथा मेरठ में डांस कार्यक्रमों का आयोजन किया। जिनमें लोगों ने अश्लील डांस का जमकर लुत्फ उठाया। इलाहाबाद में यह कार्यक्रम एक जूनियर हाईस्कूल एवं प्राइमरी स्कूल में कराया गया। मेरठ के दौराला क्षेत्र के दादरी गांव में आयोजित जनसभा में दो मंच बनाए गए। एक मंच पर रागिनी कलाकारों ने भीड़ जुटाने को जमकर ठुमके लगाए।

इलाहाबाद में होली मिलन के नाम पर बार डांसर का नाच कराकर सपा के नेता फंस गए हैं। आयोजक के खिलाफ एसडीएम ने कार्रवाई की संस्तुति की है। इस दौरान बीज विकास निगम के अध्यक्ष उज्जवल रमण सिंह व सपा के अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। बसपा ने मामले की शिकायत चुनाव आयोग से की थी। इस मामले में अब दोनों स्कूलों के प्रधानाध्यापकों पर भी गाज गिरने की संभावना बढ़ गई है। शंकरगढ़ के करियाखुर्द गांव में प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय परिसर में 26 मार्च को की दोपहर होली मिलन समारोह धूमधाम से मनाया गया। बसपा का आरोप है कि इसके लिए विद्यालयों को अचानक बंद कर दिया गया। समाचार पत्रों में यह खबर प्रकाशित हुई, तो पूरा मामला विवाद में आ गया। बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष लाला प्रसाद विद्यार्थी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और जिला निर्वाचन अधिकारी से शिकायत की। इसकी तत्काल जांच के निर्देश दे दिये गए। एडीएम सिटी अशोक कुमार के मुताबिक बारा के एआरओ द्वारा की गई जांच में आयोजक दोषी मिले हैं।

Source: News Headlines on LS Polls 2014

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Modi in rush to take over PM's post, says Pawar

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए कहा है कि वह प्रधानमंत्री बनने की जल्दी में हैं।

नासिक में कांग्रेस और एनसीपी की संयुक्त रैली को संबोधित करते हुए शरद पवार ने कहा कि भाजपा को छोड़ कर किसी दल ने चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया है। हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ऐसी परंपरा नहीं रही है। भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किए जाने के बावजूद मोदी पीएम बनने की जल्दी में हैं।

मोदी के विकास के दावों की आलोचना करते हुए पवार ने कहा कि गुजरात के विकास का दावा झूठा है। इसके लिए आंकड़ों को गलत तरीके से पेश किया गया है। पवार ने कहा कि यूपीए सरकार को जनता का समर्थन हासिल है। उन्होंने कहा कि हर आपदा के समय हम किसानों सहित जनता के साथ खड़े रहे हैं और उनकी हर तरह से मदद की है।

गौरतलब है कि पवार का मोदी पर स्टैंड समय समय पर बदलता रहता है। कभी वह मोदी की प्रसंशा करते हैं तो कभी उनकी आलोचना। इस वजह से वह अपने विरोधियों के निशाने पर भी रहे हैं। 

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Bihar Bjp trying to persuade Chaubey

बिहार में बक्सर से तीन बार सांसद रह चुके लालमुनि चौबे भाजपा छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ने के फैसले से अब पीछे हट गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार उनको मना लिया गया है। टिकट नहीं मिलने से नराज चौबे को बिहार प्रदेश इकाई मनाने में जुटी थी। भाजपा के पीएम प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने भी उनसे करीब 15 मिनट तक बातचीत की थी।

भाजपा इस बार नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के मिशन को पूरा करने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रही, लेकिन उसके कद्दावर नेता ही एक-एक करके उससे छिटक दूर होते जा रहे हैं। राजस्थान में जसवंत सिंह और बिहार में लालमुनि चौबे पर भाजपा ने दांव नहीं खेला। भाजपा को अपना मिशन पूरा करना था, इसलिए उसने जसवंत सिंह की जगह कांग्रेस से आए उम्मीदवार पर ही दांव खेला और बक्सर से पार्टी के वरिष्ठ नेता लालमुनि चौबे की जगह पर पार्टी के पूर्व मंत्री अश्विनी चौबे को अपना उम्मीदवार बनाया।

भाजपा ने जहां जसवंत सिंह को मनाने में कोई रुचि नहीं दिखाई वहीं, लालमुनि चौबे को मनाने के लिए खुद नरेंद्र मोदी ने फोन पर उनसे काफी देर तक बात की । बताया गया है कि लालमुनि चौबे का गुस्सा शांत हो गया है और अब वे चुनाव नहीं लड़ेंगे और पार्टी द्वारा तय प्रत्याशी और अपने ही चेले अश्विनी चौबे के पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगे।

राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं लालमुनि

लाल बाबा भी राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं और उन्हें राजनीति की नब्ज को अच्छी तरह जांचना और परखना आता है। राजनीति में अपना कद दर्शाने के लिए उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर दिया।

उनके निर्दलीय चुनाव लड़ने के फैसले के बाद बिहार भाजपा को अपनी एक सीट पर खतरे के बादल मंडराते दिखने लगे। जिससे खुद नरेंद्र मोदी को उनको मनाने के लिए फोन पर बात करनी पड़ी।

उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाया। लाल मुनि ने कहा कि तीन सौ किलोमीटर दूर के व्यक्ति को बक्सर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाने का कोई औचित्य नहीं है। चौबे ने पार्टी में बुजुर्गो की उपेक्षा व अपमान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बनारस से पार्टी के उम्मीदवार और भाजपा के पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रचार करने का एलान भी किया। चौबे बक्सर से चुनाव लड़ना चाह रहे थे। चौबे ने किसी भी पद की लालसा से भी पूरी तरह इन्कार किया। कहा कि उन्हें राज्यपाल बनने की लालसा नहीं है। लाल मुनि चौबे ने स्थानीय व्यक्ति को टिकट न दिए जाने को पूरे शाहाबाद का अपमान बताया। उन्होंने नेतृत्व से सवाल किया कि क्या पूरे इलाके में एक भी काबिल युवा नहीं था जिसे पार्टी अपना उम्मीदवार घोषित करती। चौबे ने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा को भी मुद्दा बनाया था।

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Uma bharti not to contest against sonia

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की फायर ब्रांड नेता उमा भारती कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेंगी। उमा झांसी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। भाजपा की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि उमा झांसी से ही चुनाव लड़ेंगी। रायबरेली और अमेठी से चुनाव लड़ने वाले पार्टी उम्मीदवारों की घोषणा जल्द ही की जाएगी। भाजपा पहले ही कह चुकी है कि वह उत्तर प्रदेश में रायबरेली और अमेठी में सोनिया व राहुल के खिलाफ मजबूत उम्मीदवार उतारने जा रही है।

Source: Lok Sabha Elections 2014 Candidates

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Sabir ali join bjp

जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से निष्कासित साबिर अली भी शुक्रवार को भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा का हाथ थामने के बाद साबिर अली ने कहा कि वह जिस पार्टी के साथ रहे हैं पूरी ईमानदारी से रहे हैं।

गौरतलब है कि साबिर अली जदयू के सबसे प्रभावशाली नेता थे। साबिर अली नीतीश कुमार के काफी करीबी भी माने जाते थे। भाजपा के पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी की प्रसंशा करने की वजह से उन्हें जदयू से निकाल दिया गया था। इस बात को लेकर पार्टी उनसे इतनी नाराज थी कि उन्हें हमेशा के लिए पार्टी से निकाल दिया, जबकि आम तौर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के तौर पर नेताओं को छह साल के लिए पार्टी से निकाला जाता है।

Source: Lok Sabha Elections 2014 Schedule

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Thursday, March 27, 2014

LIVE Narendra Modi Criticises Congress Manifesto

लोहरदगा/सासाराम/ गया। बिहार के गया में नरेंद्र मोदी की रैली में हंगामा हो गया। मोदी को देखने के लिए लोगों की भीड़ बेकाबू हो गई। इस अफरा तफरी में कई लोगों को चोटें भी आई। स्थिति पर नियंत्रण के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। लोगों का आरोप हैं कि सुरक्षा इंतजाम पुख्ता नहीं थे इस लिए ऐसी घटना हुई।

यहां नक्सलियों की चेतावनी के बावजूद भारी संख्या में लोग मोदी को सुनने पहुंचे थे। पूरा मैदान लोगों से खचाखच भरा हुआ था। यहां मोदी को देखने-सुनने के लिए बड़ी तादाद में लोग जुटे हुए थे। नरेंद्र मोदी जैसे ही मंच पर पहुंचे उन्हें देखने के लिए रैली स्थल पर अव्यवस्था फैलनी शुरू हो गई। कुछ लोग मंच की ओर बढ़े, तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिस के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण कुछ ही देर में आमतौर पर मोदी की रैली में संयमित दिखने वाली यह भीड़ हुड़दंग पर उतर आई।

पुलिस को धकेलते हुए भीड़ मीडिया वाले सुरक्षित क्षेत्र की ओर बढ़ने लगी। पुलिस ने इस दौरान हल्का लाठीचार्ज किया, तो भीड़ ने पथराव कर दिया। लोगों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और बांस इधर-उधर फेंकने लगे। यह हंगामा जब हो रहा था मोदी मंच पर मौजूद सब देख रहे थे। उनके साथ मंच पर मौजूद सुशील मोदी लोगों से शांत होने की अपील करते रहे, लेकिन हुड़दंग जारी रहा। 20 मिनट बाद हालात काबू में आए। इसके बाद ही मोदी ने अपना भाषण शुरू किया।

अपने अंदाज में मोदी ने रैली को संबोधित करते हुए केंद्र और प्रदेश सरकार पर हमला जारी रखा। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को सिर्फ कुर्सी की चिंता है। ये लोग कुर्सी से चिपके रहना चाहते हैं लेकिन अब इन्हें उखाड़ फेंकने का समय आ गया है।

मोदी ने कहा कि प्रदेश सरकार की अकर्मण्यता की वजह से गया में आतंकियों ने ब्लास्ट किए। इसका असर यहां के पर्यटन पर पड़ा है। जिसका खामियाजा इससे जुड़े लोगों को उठाना पड़ रहा है। मोदी ने कहा कि गया की भूमि तोड़ने की नहीं जोड़ने की है। विश्वविख्यात पर्यटक स्थल होने के बावजूद केंद्र और राज्य सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही।

इससे पहले सासाराम में एक बड़ी रैली को संबोधित करते हुए भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को केंद्र के साथ प्रदेश सरकार पर भी जम कर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यहां से इतने बड़े बड़े नेता हुए हैं तब भी यह क्षेत्र इतना पिछड़ा है। लोकसभा की अध्यक्ष मीरा कुमार इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं लेकिन उनके पिता जगजीवन राम का सपना आज भी अधूरा है। मोदी ने कहा कि सभी समस्या का एक ही हल है : विकास। उन्होंने कहा कि सासाराम पर बड़े नेताओं का बोझ है।

मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोलते उन्हें बिहार के लिए ग्रहण करार दिया। मोदी ने कहा कि नीतीश बिहार के विकास में ग्रहण हैं। जब वे हट जाएंगे तो बिहार का विकास शुरू होगा। बिहार में बिजली की कमी पर भी कटाक्ष करते हुए मोदी ने राज्य सरकार पर निशाना साधा और कहा कि अगर गुजरात में दो मिनट भी बिजली गुल हो जाती है तो खबर बन जाती है।

इसके अलावा मोदी ने केंद्र की यूपीए सरकार हमला करते हुए कहा कि दिल्ली की सरकार भरोसे लायक नहीं है। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस से संबंध विच्छेद करने का समय आ गया है। इससे पहले मोदी ने झारखंड में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि विकास का रास्ता बंदूक से नहीं, हल से आता है। भारत विजय रैली में मोदी ने झारखंड को लेकर पंडित जवाहर लाल नेहरू की सोच पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पंडित नेहरू ने झारखंड की मांग का मजाक उड़ाया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कार्यकाल में झारखंड को बनवाया था। यदि वह नहीं होते तो झारखंड का जन्म नहीं होता, इसके लिए हमें वाजपेयी का आभारी होना चाहिए।

मोदी ने कांग्रेस के घोषणापत्र पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यह झूठ का पिटारा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राज में महंगाई और भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है, जिससे आज आम आदमी परेशान है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने पहले के चुनावी वादों को पूरा नहीं किया है। कांग्रेस ने झारखंड की संपदा को लूटा है, जिससे यहां का विकास अवरूद्ध हुआ है। कांग्रेस ने आदिवासियों के लिए कुछ नहीं किया। अगर आदिवासियों का कोई भला कर सकती है तो वह भाजपा है।

उन्होंने अपने संबोधन में झारखंड के महापुरुषों का नाम लेते हुए इसे वीरों और बलिदानियों की भूमि कहा। यहां की खनिज संपदा की तारीफ की और कहा कि झारखंड अमीर है पर लोग गरीब हैं। नक्सली बंद पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि आज माओवादियों ने लोकतंत्र को ललकारा है। उन्होंने कहा कि विकास का रास्ता बंदूक से नहीं, हल से निकलता है।

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Congress Candidate Arrested for Violation of Model Code of Conduct

कांग्रेस के इलाहाबाद से लोकसभा उम्मीदवार नंद गोपाल गुप्ता को [नंदी] 2012 के लोकल चुनाव मे ं अचार संहिता उल्लंघन मामले में कुछ दिनों के लिए जेल भेजा गया है। पिछले दिनों जब उत्तर प्रदेश में मायावती की सरकार थी और वे मंत्री थे तो काफी चर्चा में रहे थे। इस हफ्ते उनके खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि उन्होंने पाला बदलते हुए बासपा का दामन छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं और इलाहाबाद संसदीय सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी है।

न्यायिक दंडाधिकारी ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने 2012 के चुनाव स्थानीय निकाय से बिना अनुमति लिए प्रदर्शन करने पर नंदी के पत्नी को एक हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया है। नंदी की पत्नी अभिलाषा मेयर भी हैं। कोर्ट द्वारा दोषी सिद्ध होने के बाद बसपा ने पिछले दिनों नंदी और अभिलाषा को पार्टी से निकाल दिया था।

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Rajasthan is luckey for parachute candidate

राजस्थान की बंजर भूमि बाहर से आने वाले पैराशूट उम्मीदवारों के लिए काफी उपजाऊ रही है। राजस्थान में आकर चुनाव जीतने वाले नेता उप प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री तक के पद पर पहुंचते रहे हैं। इन हस्तियों में चौधरी देवीलाल, बूटा सिंह, बलराम जाखड़ और राजेश पायलट शामिल है। इस बार भी टोंक -सवाईमाधोपुर सीट पर तीन बाहरी प्रत्याशी हैं।

1989 में जनता दल से चौधरी देवीलाल राजस्थान की सीकर सीट से लोकसभा पहुंचे थे तो सरकार में सीधे नंबर दो बन गए थे। हालांकि एक वक्त पर उनके प्रधानमंत्री बनने की भी संभावना हो गई थी। वीपी सिंह सरकार में वह उप प्रधानमंत्री बनाए गए थे। राजेश पायलट और बूटा सिंह भी केंद्र सरकार में सिरमौर बने रहे। पायलट उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के वेदपुरा गांव में जन्मे थे। 1980 में वह भरतपुर से सांसद चुने गए। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के मित्र रहे पायलट 1984, 1991, 1996, 1998 और 1999 में दौसा लोकसभा सीट से चुनाव जीते और केंद्र में अहम मंत्रालयों का जिम्मा संभाला। उनके पुत्र सचिन पायलट को अब तो बाहरी नहीं कहा जा सकता है लेकिन उनकी भी केंद्र में रसूख रही है। केंद्र में मंत्री, राज्यपाल, आयोग के अध्यक्ष जैसे अहम पदों पर रहे बूटा सिंह ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद ही राजस्थान आ गए थे। वह 1984 में जालोर से सांसद चुने गए और केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री बने। इस बार फिर से बूटा सिंह मैदान में हैं।

पंजाब के फाजिल्का जिले के रहने वाले बलराम जाखड़ को भी राजस्थान की भूमि ही रास आई। 1984 में वह सीकर से जीते थे। उन्हें लोकसभा अध्यक्ष जैसा संवैधानिक पद मिला था।

भाजपा में बतौर अध्यक्ष विवादित रहे बंगारू लक्ष्मण हैदराबाद से राजस्थान आकर जालौर से लड़े थे। यह और बात थी कि वह जीत नहीं पाए थे। उसके बाद ही वह एक स्टिंग ऑपरेशन का शिकार हो गए थे। भाजपा ने उनकी पत्नी सुशीला बंगारू लक्ष्मण को जालोर सीट से 2004 में टिकट दिया था और वह बूटा सिंह को हराकर अपने पति की हार का बदला लेने में कामयाब रही थीं। यह तो बात राजनीतिज्ञों की थी। वह सफल भी रहे। लेकिन बीकानेर से चुनाव जीतने वाले धर्मेद्र बुरी तरह फ्लाप रहे। उन्होंने दूसरी बार चुनाव की बात भी नहीं सोची। इस बार कांग्रेस ने क्रिकेटर अजहरूद्दीन तो भाजपा ने दिल्ली के सुखवीर सिंह जौनपुरिया को और समाजवादी पार्टी ने कश्मीर के कमर रब्बानी चेची को टोंक सवाईमाधोपुर सीट से उम्मीदवार बनाया है।

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Survey: modi's big lead on rahul gandhi

भाजपा की तरह संघ ने भी इस बार चुनाव में अपने सारे संसाधन झोंक दिए हैं। संघ के मुखपत्र पांचजन्य ने बाकायदा सर्वे कराकर देश की जनता की नब्ज टटोलने की कोशिश की है। 300 लोकसभा सीटों पर किए सर्वे में 43 फीसद लोग नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। सर्वे के अनुसार ग्रामीण, शहरी, महिला, पुरुष, युवा, बुजुर्ग सभी वर्गो में नरेंद्र मोदी अपने विरोधियों पर भारी दिख रहे हैं। लेकिन सर्वे में इस समर्थन के साथ मिलने वाली सीटों का अनुमान नहीं लगाया गया है।

मजेदार बात यह है कि सर्वे में संघ के पुराने मुद्दे रामजन्मभूमि, धारा-370 और समान नागरिक संहिता सिरे से गायब हैं। इसके बजाय बिजली, सड़क, पानी, रोजगार जैसे विकास से जुड़े मुद्दे पर जनता की राय जानने की कोशिश की गई है। सर्वे में युवाओं का मन टटोलने की विशेष कोशिश की गई है। सभी क्षेत्रों में अधिकतर लोगों ने रोजगार के बेहतर अवसर, विद्युत आपूर्ति में सुधार, बेहतर सड़कें, बेहतर अस्पताल और पेयजल को प्रमुख चुनावी मुद्दा बताया है। ध्यान देने की बात है कि भाजपा भी चुनाव प्रचार में इन्हीं मुद्दों को आगे रख रही है।

पांचजन्य और आर्गेनाइजर के ताजा अंक में प्रकाशित सर्वे के अनुसार लोकसभा में सबसे अधिक 162 सीटें देने वाले उत्तर भारत में 48.6 फीसद लोग मोदी को प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं। जबकि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी केवल 27 फीसद लोगों की पसंद हैं। उत्तरी भारत में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश और बिहार शामिल हैं। पिछली बार इस क्षेत्र से भाजपा को महज 34 सीटें मिली थीं। इस बार भाजपा सबसे अधिक सीटें यहीं जीतने की उम्मीद कर रही है।

केवल दक्षिण भारत में राहुल गांधी नरेंद्र मोदी पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। लोकसभा में 132 सांसद भेजने वाले दक्षिण भारत में प्रधानमंत्री के रूप में 35.8 फीसद लोग राहुल गांधी और 33.3 फीसद लोग नरेंद्र मोदी को पसंद कर रहे हैं। आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल वाले दक्षिण भारत में 2009 में भाजपा को केवल 20 सीटों से संतोष करना पड़ा था। जबकि 83 सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा किया था। राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ वाले मध्य भारत में मोदी 45.4 तो राहुल गांधी 29 फीसद लोगों की पसंद हैं। इसी क्षेत्र में अरविंद केजरीवाल भी 14.3 फीसद लोगों की पसंद के रूप में उभरे हैं।

नरेंद्र मोदी को सबसे अधिक समर्थन गुजरात और महाराष्ट्र वाले पश्चिमी भारत में मिल रहा है। 78 सीटों वाले इस क्षेत्र में नरेंद्र मोदी 57 फीसद लोगों की पसंद हैं। जबकि राहुल गांधी को उनके आधे से कम 24.4 फीसद लोग पसंद कर रहे हैं। इसी तरह 88 सीटों वाले पूर्वी भारत में भी मोदी ने विरोधियों पर बढ़त बना ली है। यहां मोदी 34.3 और राहुल गांधी 31.1 फीसद लोगों की पसंद है।

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SP, BSP, Cong will be losers as Kejriwal takes on Modi

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भाजपा के पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी और आप के अरविंद केजरीवाल के बीच होने जा रहे मुकाबले पर पूरे देश की नजर है। हालांकि यहां से चुनाव लड़ने जा रहे अन्य दलों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इस मुकाबले की वजह से समाजवादी पार्टी, बसपा और कांग्रेस की हार पहले ही तय हो गई है।

गौरतलब है कि इस मुकाबले की वजह से मतों का जबरदस्त तरीके से ध्रुवीकरण होगा। मुसलिम मतदाताओं का झुकाव उस दल के साथ होगा जो मोदी को सबसे जोरदार तरीके से टक्कर देने में सक्षम होगा। आप के सूत्रों के मुताबिक इस मुकाबले की वजह से उत्तर प्रदेश की सबसे मजबूत दो पार्टियां सपा और बसपा सहित कांग्रेस की हार पहले से ही तय हो गई है।

आप का मानना है कि मुजफ्फरनगर दंगे का भी इसपर काफी असर होगा। अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का समर्थन आप को मिलेगा। उधर, भाजपा भी जानती है कि लोकसभा की सबसे अधिक सीटें उत्तर प्रदेश में है, अगर पार्टी को यहां से अधिक से अधिक सीटें जीतनी है तो मोदी को प्रदेश में किसी सीट से लड़ना होगा, इसका जनता में सकारात्मक संदेश जाएगा। साथ ही पड़ोसी राज्य की सीटों पर भी इसका व्यापक असर होगा।

उधर, आप की नजर भी प्रदेश में वोट के बड़े हिस्से पर है। केजरीवाल के मोदी से मुकाबले से आप को इसका फायदा होगा। अल्पसंख्यक समुदाय का झुकाव आप की तरफ होगा। आप का मानना है कि पार्टी की इस कदम का फायदा उन्हें अन्य राज्यों में भी मिलेगा जैसे दिल्ली, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में जहां आप का काफी प्रभाव है।

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Wednesday, March 26, 2014

LS Polls: Three percent vote swing could tweak fate of 114 seats

Representational Picture

According to the Election Commission, 114 seats had witnessed victory margin of less than three percent in the 2009 Lok Sabha elections. Uttar Pradesh had topped the list, where 19 seats out 80 had registered three percent victory margin.

The Samajwadi Party (SP) and the Bahujan Samaj Party (BSP) had to suffer the most in these 19 seats. In fact, there were some seats in UP where victory margin was even less than one percent.

Senior BJP leader Murli Manohar Joshi had won against BSP leader Mukhtar Ansari from Varanasi in 2009 with a difference of less than three percent. Modi is contesting from this seat this time around and it could be a tricky affair for him.

The Amritsar seat in Punjab saw a similar trend and the victory margin was even less than one percent here. Senior BJP leader Arun Jaitley is contesting elections from the Amritsar constituency this time.

Madhya Pradesh had eight such seats which witnessed victory margin of less than three percent. Here BJP endured most of the sting, losing five of eight seats.

The provision of None Of The Above (NOTA) in the electronic voting machines (EVM) this time around could spell more trouble for all the candidates who are contesting from constituencies having the trend of victory margin less than three percent.

The assembly elections in four states last year saw a good number of people pressing the NOTA button on EVMs, but it would be for the first time that the common man would get a chance to reject all the candidates from their constituencies in the Lok Sabha elections.

Source: Lok Sabha Eletions 2014 News Headlines

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Indira, VP Singh and Atal has been defeated in Lok Sabha Election

आपातकाल के बाद 1977 में गांधी-नेहरू परिवार के गढ़ रायबरेली से राजनारायण के हाथों पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हार की चर्चा तो होती रहती है लेकिन यह सच भी कम लोगों को विदित है कि पूर्व प्रधानमंत्री व भारतीय जनता पार्टी के शिखर पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी को भी अपनी संसदीय यात्रा के शुरुआती दौर में तीन चुनावों में हार का मुंह देखना पड़ा। 1957 व 1962 के चुनावों में तो उन्हें सूबे की राजधानी लखनऊ में ही मुंह की खानी पड़ी। हालांकि इस क्षेत्र ने 1991 से लगातार पांच बार उन्हें अपने सिर-माथे बैठाया। 1957 के चुनाव में बलरामपुर से जीत दर्ज कराने वाले अटल 1962 में इस सीट पर कांग्रेस की सुभद्रा जोशी से पराजित हुए।

लोकसभा के चुनावी दंगल में शिकस्त खाने वाले दिग्गजों की फेहरिस्त में डॉ.राम मनोहर लोहिया, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और कांशीराम सरीखे तपे हुए विचारक भी रहे तो चौधरी चरण सिंह, विश्वनाथ प्रताप सिंह और चंद्रशेखर जैसे पूर्व प्रधानमंत्री भी। समाजवाद के प्रणोता डॉ.राम मनोहर लोहिया ने 1957 और 1962 में चंदौली के चुनावी दंगल में पटकनी खायी तो एकात्म मानववाद की लौ जलाने वाले दीनदयाल उपाध्याय 1963 में जौनपुर से उपचुनाव हारे।

जिन कांशीराम का आशीर्वाद लेकर मायावती ने चार में से तीन बार उप्र की सत्ता संभाली, वह खुद दो बार चुनावी दंगल में चित हुए। 1996 में फूलपुर में उन्हें उनके पुराने चेले रहे सपा के जंग बहादुर सिंह पटेल ने आसमान दिखाया तो 1998 के चुनाव में सूबे में चली भाजपा की आंधी में उन्हें सहारनपुर में हार मिली। किसानों की सियासत को नया आयाम देने वाले चौधरी चरण सिंह 1971 में जाट राजनीति के केंद्र मुजफ्फरनगर में मिली पराजय आजीवन नहीं भूल पाए। बागी बलिया से आठ चुनाव जीतकर अपराजेय समझे जाने वाले चंद्रशेखर को 1984 में इसी सीट पर मिली हार अखरती रही।

पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह को 1977 में अपने गृह जिले इलाहाबाद में पराजय का कड़वा स्वाद चखना पड़ा। 1989 में पहली बार बिजनौर से संसद की देहरी लांघने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती को 1991 की राम लहर से इसी सीट पर शिकस्त खानी पड़ी थी। कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी अविभाजित उप्र में नैनीताल सीट पर 1991 व 1998 में पराजित हुए तो एक और लोकप्रिय पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा को 1984 में इलाहाबाद में सिने स्टार अमिताभ बच्चन के हाथों करारी हार मिली। चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत संभालने वाले उनके पुत्र अजित सिंह ने बागपत सीट पर जीत की दो अलग हैट्रिक तो लगा ली, लेकिन उनकी डबल हैट्रिक में 1998 में भाजपा के सोमपाल शास्त्री रोड़ा बन गए।

कभी इंदिरा गांधी के राजनीतिक उत्तराधिकारी समझे जाने वाले संजय गांधी से आपातकाल की ज्यादतियों का हिसाब चुकता करते हुए अमेठी की जनता ने 1977 में उन्हें नकार दिया था तो उनके निधन के बाद उनकी पत्नी मेनका गांधी को 1984 में यहीं अपने जेठ राजीव गांधी से पराजित होना पड़ा। अपने सियासी जीवन में मेनका को दूसरी हार 1991 में पीलीभीत सीट पर मिली।

और भी धुरंधरों को मिली है शिकस्त

-राम नरेश यादव 1989 में बदायूं, 1984 व 1998 में आजमगढ़ से हारे।

- कल्पनाथ राय 1980 में घोसी से हारे।

- कृष्ण चंद्र पंत 1977 में नैनीताल से हारे।

-शरद यादव 1984 व 1991 में बदायूं से हारे।

- मुरली मनोहर जोशी-1980 व 1984 में अल्मोड़ा, 2004 में इलाहाबाद में हारे।

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Interesting contest will be seen in Delhi loksabha election

सियासी रणभेरी बजने के बाद सूबे के चुनावी मैदान में विभिन्न दलों के सूरमा अब आमने-सामने आ चुके हैं। कौन किसके खिलाफ लड़ेगा यह तय हो चुका है। तमाम दिग्गजों ने ताल भी ठोक दी है। दिल्ली का यह सियासी मुकाबला बेहद दिलचस्प और यादगार होने की उम्मीद है। दिल्ली के चुनावी मुकाबले का सबसे खास पहलू यह है कि पहली बार शहर में त्रिकोणीय मुकाबला होगा। अब तक कांग्रेस व भाजपा के बीच होती रही आमने-सामने की टक्कर में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी (आप) भी शामिल हो चुकी है। सियासी जानकारों के अनुसार आप के आने से शहर की सभी सातों सीटों पर हार-जीत का समीकरण उलझ गया है।

पूर्वी दिल्ली संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी संदीप दीक्षित जीत की हैट्रिक लगाने के लिए चुनाव मैदान में उतरे हैं तो भाजपा के महेश गिरी और आप प्रत्याशी व महात्मा गांधी के पौत्र राजमोहन गांधी पहली बार संसद पहुंचने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली सीट पर और भी जोरदार घमासान है। दिल्ली के पुराने कांग्रेसी नेता जयप्रकाश अग्रवाल को इस बार भोजपुरी फिल्मों के गायक व अभिनेता मनोज तिवारी से कड़ी टक्कर मिलने का अनुमान है। भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे तिवारी धुआंधार चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। इन दोनों नेताओं के बीच आप प्रत्याशी प्रोफेसर आनंद कुमार भी पहली बार अपनी सियासी किस्मत आजमा रहे हैं। उत्तर-पश्चिमी सीट पर भाजपा ने दलित नेता उदित राज को टिकट दिया है। कांग्रेस की ओर से केंद्रीय मंत्री कृष्णा तीरथ एक बार फिर यहां से सांसद बनने की जुगत में हैं। लेकिन इन दोनों प्रत्याशियों को अब आप की नेता व दिल्ली सरकार में मंत्री रहीं राखी बिड़ला की चुनौती से निपटना होगा। चांदनी चौक में कई दिग्गज चुनावी अखाड़े में हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. हर्षवर्धन दिल्ली की स्थानीय सियासत से निकलकर संसद पहुंचने की आस में यहां से चुनाव मैदान में उतरे हैं। दूसरी ओर देश के नामी वकील और केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल हैट्रिक बनाने के लिए यहां से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने पत्रकार आशुतोष को इस सीट से उम्मीदवार बनाया है।

नई दिल्ली में कांग्रेस महासचिव अजय माकन और मीनाक्षी लेखी के बीच मुकाबला हो रहा है। यहां आप के आशीष खेतान भी चुनाव मैदान में हैं। पश्चिम व दक्षिण दिल्ली संसदीय सीटों पर भी कड़ी टक्कर होगी। पश्चिम दिल्ली में कांग्रेस सांसद महाबल मिश्र की प्रतिष्ठा दांव पर है। उन्हें भाजपा के जाट नेता प्रवेश वर्मा और आप प्रत्याशी जरनैल सिंह से जोरदार चुनौती मिलने के कयास लगाए जा रहे हैं। उधर, दक्षिण दिल्ली में रमेश कुमार के बहाने कांग्रेस के चर्चित जाट नेता सज्जन कुमार की भी प्रतिष्ठा दांव पर है। इस सीट पर भाजपा की ओर से विधायक रमेश बिधूड़ी दूसरी बार अपनी सियासी किस्मत आजमाने उतरे हैं। आप ने यहां से देवेंद्र सहरावत को अपना प्रत्याशी बनाया है।

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Lok Sabha Elections 2014 - Think different, Kejriwal from Kashi against Modi!

काशी से भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के सामने चुनावी रण में उतरने का मन बना रहे आप नेता अरविंद केजरीवाल के लिए यहां की राह कुछ मुश्किलों भरी हो सकती है। ऐसा इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यहां के लोगों का मिजाज केजरीवाल से मेल नहीं खाता है। 

दिल्ली में केजरीवाल की सफलता में तीन कारण अहम थे। पहला, वह लगातार चर्चा में थे और हर घर में केबल टीवी की पहुंच वाले घरों में आप लगातार चर्चा में रही। दूसरा, दिल्ली में पार्टी का संगठन खड़ा हो चुका था और 15 साल के कांग्रेस के शासन व भाजपा के स्थानीय नेतृत्व की विश्वसनीयता के अभाव में केजरीवाल ने चमत्कार कर दिया। तीसरा सबसे अहम कारण था, दिल्ली में जनता की बहस-मुबाहिस टीवी चैनलों और अखबारों तक ही ज्यादा सीमित रही। 

लेकिन, बनारस में लोगों के पास सियासत से लेकर साहित्य तक हर मुद्दे पर चर्चा का खूब समय और ज्ञान भी है। मोदी और राहुल के इतिहास से लेकर केजरीवाल का भी पूरा जीवन चरित सबको पता है। भाजपा उसे अपने तरीके से पेश कर केजरी को जरा भी मौका नहीं दे रही। 

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Modi will do average four rally per day

'चाय पर चर्चा' जैसे कार्यक्रमों के जरिए वोटरों से सीधा संपर्क बनाने में जुटे भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी अपनी रैलियों में भी कुछ ऐसा ही करेंगे। रैलियों के लिए खुद ही मतदाताओं को लिखित निमंत्रण भेजेंगे और साथ ही भाजपा की सरकार बनने पर साठ महीने में निराशा को आशा में तब्दील करने का वादा करेंगे। मोदी हर रोज औसतन चार रैलियां करेंगे। वह 46 दिनों में 185 रैलियां करेंगे।

लगभग हर राज्य में कम से कम एक बड़ी रैली कर चुके मोदी 26 मार्च से लोकसभा चुनाव के लिए औपचारिक प्रचार अभियान शुरू करेंगे। वैष्णो देवी की पूजा कर जम्मू से 'भारत विजय रैली' की शुरुआत होगी तो पहले ही दिन कम से कम तीन रैलियां करेंगे। कोशिश होगी कि करीब तीन सौ संसदीय क्षेत्रों में वह किसी न किसी प्रकार जनता को संबोधित करें।

भाजपा के अंदर उठे विवाद और घमासान को नजरअंदाज करते हुए पार्टी ने चुनावी कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर ली है। चुनाव कार्यक्रम का जिम्मा संभाल रहे मुख्तार अब्बास नकवी ने बताया कि मोदी 185 से ज्यादा रैलियां करेंगे। ध्यान रहे कि भाजपा लगभग 280 सीटों पर कभी न कभी जीत हासिल कर चुकी है। 272 प्लस का लक्ष्य लेकर चल रहे मोदी ने भी तीन सौ सीटों पर नजरें जमा दी हैं। लिहाजा, उन क्षेत्रों में जरूर प्रचार करेंगे। शुरुआत जम्मू से होगी। पहले दिन संभवत: ऊधमपुर में वह रैली करेंगे। उसके बाद उत्तर प्रदेश की किसी सीट और आखिरकार दिल्ली में रैली करेंगे। कोशिश यह होगी कि हर रोज वह दो से तीन राज्यों में रैली करें। इसी प्रकार पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी डेढ़ सौ से ज्यादा रैलियां करेंगे। लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली जैसे स्टार प्रचारकों का भी विस्तृत कार्यक्रम बनाया जा रहा है। 

मोदी के चुनाव प्रचार में कुछ नया भी दिखेगा। मसलन, मोदी अपनी रैलियों के लिए वोटर को लिखित निमंत्रण भेजेंगे। उनसे यह अपील की जाएगी कि वह अपनी समस्याओं के बारे में बताएं। यह लिखित वादा भी होगा कि भाजपा सरकार पांच साल में उनका निदान करेगी। कोशिश यह है कि चुनाव प्रचार सिर्फ रैली तक सीमित न रहे बल्कि लोगों की भागीदारी हो। लिहाजा 'नमो समाधान' सुझाया जाएगा जिसमें धर्मनिरपेक्षता के अर्थ लेकर कृषि और गांव तक पर मोदी को सोच बताई जाएगी। तो रैली में पहुंचे लोगों से सुझाव भी मांगे जाएंगे। इसके लिए पार्टी ने प्रोफार्मा तैयार कर लिया है। बात यहीं नहीं रुकेगी। नकवी के मुताबिक इन सुझावों को एकत्रित कर उसे छांटा जाएगा और आने वाली भाजपा सरकार उस दिशा में काम करेगी।

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BJP launches new party anthem with Narendra Modi as singer

भाजपा के चुनाव प्रचार का हर हिस्सा संवाद की तरह ही होगा और केंद्र में मोदी ही होंगे। रैलियों के लिए नरेंद्र मोदी का लिखित निमंत्रण हर वोटर तक जाएगा तो चुनावी गीत भी खुद मोदी ही गाएंगे। 'मैं देश नहीं मिटने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा' के आश्वासन के साथ मोदी वोट भी मांगेंगे और यह भरोसा भी दिलाएंगे कि अब हर किसी को उसका पूरा अधिकार मिलेगा।

पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने मंगलवार को भाजपा का चुनावी गीत जारी किया। एलबम का टाइटल है 'सौगंध' गीत प्रसून जोशी ने लिखा है जबकि संगीत आदेश श्रीवास्तव और स्वर सुखविंदर ने दिया है। नई बात यह है कि गीत के अलग-अलग पैरा की शुरुआत मोदी की आवाज में है। दरअसल, मतदाताओं को यह अहसास दिलाने की कोशिश होगी कि भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार ने मिंट्टी की सौगंध ली है तो उसे पूरा भी करेंगे। एलबम का वीडियो भी जारी किया गया है। यह गीत अब रैली, प्रचार वैन, 3डी ट्रक और अन्य स्थानों पर चलाए जाएंगे। पूरे गीत का मंत्र यह है कि भाजपा सरकार बनी तो देश और देश का कोई भी नागरिक अब पीछे नहीं होगा। उसे उसका हक मिलेगा और देश आगे बढ़ेगा। वीडियो में महंगाई, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा जैसे कई विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। एक सवाल के जवाब में जेटली ने कहा कि मोदी प्रधानमंत्री उम्मीदवार हैं और प्रचार सबसे आगे खड़े नेता को केंद्रित कर ही किया जाता है। ध्यान रहे कि इससे पहले भी 'मोदी आने वाला है' के मुखड़े के साथ एलबम जारी किया गया था। दरअसल, मोदी की लोकप्रियता को भुनाने के लिहाज से ही पार्टी ने 'मोदी फार पीएम' का नारा दिया था।

Source: Lok Sabha Elections 2014 Prediction

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Modi's mega poll campaign to begin today

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर के हीरानगर में भारत विजय रैली को संबोधित करते हुए कहा कि यहां की जनता के प्यार को ब्याज समेत वापस करूंगा।

इससे पहले नरेंद्र मोदी आज सुबह सांझी छत पहुंचे और वहां से माता वैष्णो देवी के दरबार में पहुंचे। मां के दर्शन करने के बाद मोदी भारत विजय रैली को संबोधित करने के लिए कठुआ के हीरानगर पहुंचे। इसके बाद वे उत्तर प्रदेश में दो और दिल्ली में एक रैली को संबोधित करेंगे।

रैली में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि 30 साल से जम्मू-कश्मीर लहुलूहान है। अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने शासनकाल में यहां के विकास और शांति के लिए जो नींव डाली थी उसे सही दिशा में ले जाना है।

उन्होंने देश में व्याप्त बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विरोधी दल उनके विकास, किसान और महंगाई के मुद्दे का जवाब धर्मनिरपेक्षता से देते हैं। वे धर्मनिरपेक्षता की आड़ में देश की ज्वलंत समस्याओं का जवाब देने से बच जाते हैं। कांग्रेस भ्रष्टाचार और महंगाई के मुद्दों पर जवाब देने की ताकत नहीं है। उन्होंने कहा कि आज किसी भी समस्या का समाधान विकास के बिना संभव नहीं है।

उन्होंने कांग्रेस की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जय किसान, जय जवान का नारा देने वाली पार्टी की आज की नीति मर किसान, मर जवान है। आज सरहदों पर भारतीय जवानों के सिर काटे जा रहे हैं, परंतु कांग्रेस नीत संप्रग सरकार इस पर चुप्पी साधे बैठे है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को तीन नए सिपाही मिल गए हैं, जोकि पाक की नई ताकत है। एक है एक47 जिसकी गोलियों का प्रयोग हमारे सैनिकों के ऊपर किया जाता है। दूसरे है एके एंटनी, जो कि भारत के रक्षा मंत्री होते हुए भी संसद में ऐसे बयान देते हैं जैसे पाकिस्तान सेना अपना पक्ष रख रही है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि एक अन्य है एके-49 जिन्होंने अभी-अभी एक पार्टी को जन्म दिया है। इनकी पार्टी की वेबसाइट पर दिए गए नक्शे में कश्मीर पाकिस्तान को सौंप दिया गया है। उनके नेता कहते हैं जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह होना, जिस पर पाकिस्तान खुश होता है। वे पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं। यहां के सैनिकों के सिर कट जाते हैं परंतु वे कुछ नहीं बोलते।

मोदी ने कहा कि सैकड़ों हिंदू वर्षो से भारतीय नागरिकता के लिए तरस रहे हैं। परंतु उनकी कोई सुनवाई नहीं होती। वहीं, बांग्लादेश मुसलमानों को यहां से आसानी की नागरिकता मिल जाती है और उनके लिए हकों की बात की जाती है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की उत्तर पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क में होने वाली रैली की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन व पुलिस दिन भर जुटी रही। जिला पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त वीवी चौधरी समेत सुरक्षा शाखा के अधिकारी रैली स्थल पर सुरक्षाकर्मियों को दिशा निर्देश देते रहे। रैली को लेकर भाजपा नेता भी दिन भर जुटे रहे। कार्यकर्ताओं को पास उपलब्ध करवाने से लेकर रैली में आने वाले लोगों की सूची बनाने में लगे रहे।

जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार रैली को लेकर आतंकी हमले का खतरा है। इस वजह से पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए गए हैं। जिला पुलिस के अलावा स्पेशल सेल और सुरक्षा विंग के अधिकारियों ने भी रैली स्थल और आसपास के इलाकों का जायजा लिया। रैली की सुरक्षा व्यवस्था के लिए जिला पुलिस ने सुरक्षा बलों की कई अतिरिक्त कंपनियां मांगी हैं। अधिकारियों के अनुसार मोदी की रैली में आने वाले लोगों पर नजर रखने के लिए कई चक्रीय सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। जहां पहले घेरे में जिला पुलिस के जवान रहेंगे वहीं दूसरे घेरे में अ‌र्द्धसैनिक बलों की टुकड़ियां रहेंगी। सुरक्षा विंग के कर्मचारी भी आने जाने वालों की जांच में जुटे रहेंगे। इसके अलावा रैली के दौरान मंच के आसपास तीन चक्रीय सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। मंच के आसपास के क्षेत्र में वीआइपी और वीवीआइपी पास धारक ही पहुंच पाएंगे। रैली के दौरान लोगों के बीच में काफी संख्या में पुलिस कर्मी तैनात रहेंगे। इसमें स्पेशल सेल के जवान व अधिकारी भी रहेंगे। काफी तादाद में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। रैली को लेकर भाजपा नेता मंगलवार को दिन भर मंथन करते रहे। भाजपा के विभिन्न मंडलों ने 20 हजार कार्यकर्ताओं को पास दिए गए हैं। काफी संख्या में आम लोग भी रैली में आएंगे। टेंट लगने से से लेकर बैरीकेडिंग और कुर्सियों आदि की व्यवस्था का जायजा लेने में भाजपा नेता जुटे रहे। इस रैली में दिल्ली के सभी सात संसदीय क्षेत्र के प्रत्याशी पहुंचेगे। चूंकि शास्त्री पार्क का डीडीए मैदान छोटा है इस वजह से पुलिस व जिला प्रशासन ने ज्यादा लोगों को रैली में शामिल नहीं करने का आग्रह किया है। इससे सुरक्षा व्यवस्था संभालना मुश्किल हो जाएगा।

रैली के दौरान लगेगा जाम:

रैली के दौरान जीटी रोड पर जाम रहने की संभावना है। जिससे रैली के दौरान वैकल्पिक रास्तों का प्रयोग करने की यातायात पुलिस ने सलाह दी है।

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Arvind kejriwal comment on modi

राजनीतिक पार्टियों और राजनेताओं से सवाल-जवाब करने के लिए मशहूर आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुजरात सरकार द्वारा नरेंद्र मोदी के बचाव पक्ष में दिए जवाबों से असंतोष जताते हुए बुधवार को कहा कि मुझे भाजपा से नहीं बल्कि मोदी जी से जवाब चाहिए। केजरीवाल ने मोदी की चिट्ठी को भी मीडिया के समक्ष पेश किया। मोदी को भाजपा से सर्वश्रेष्ठ बताते हुए केजरीवाल ने कहा कि यहां भाजपा की नहीं मोदी की सरकार बनने जा रही है।

गौरतलब है कि गुजरात सरकार ने पहली बार केजरीवाल के 16 आरोपों का जवाब दिया और उन्हें भ्रमजाल फैलाने में माहिर बताते हुए जिंदा किसानों को मृत बता देने वाला बताया है एवं केजरीवाल के आरोपों को झूठ का पुलिंदा बताया। गुजरात सरकार ने प्रेस रिलीज जारी कर आम आदमी पार्टी द्वारा लगाए गए आरोपों का सिलसिलेवार जवाब देते हुए कहा कि गुजरात में सिर्फ एक किसान ने अब तक आत्महत्या की है। उसकी आत्महत्या का कारण फसल खराब होना था। आप का आरोप था कि पिछले 10 साल में गुजरात में 800 किसानों ने आत्महत्या की है। आप द्वारा मृत बताए गए किसान आज भी जिंदा है। गुजरात सरकार ने अरविंद केजरीवाल के किसानों की आत्महत्या के आंकड़ों पर भी अंगुली उठाई और पूछा कि मात्र दस दिनों में 800 किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा बढ़कर एकदम से 5,874 कैसे हो गया।

उल्लेखनीय है कि अरविंद केजरीवाल ने गुजरात दौरे के दौरान राज्य में 800 किसानों द्वारा आत्महत्या करने की बात कहने के बाद मंगलवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे हुए अपने भाषण में गुजरात में पिछले 10 साल में 5 हजार से ज्यादा किसानों द्वारा आत्महत्या करने की बात कही थी।

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Madhusudan Mistry will contest loksabha election against Modi in Vadodara

आखिरकार आदर्श घोटाले के आरोपी और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण को कांग्रेस ने चुनाव मैदान में उतार दिया। उन्हें नांदेड़ से टिकट मिला है। एक अन्य फैसले में नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से अब तक प्रत्याशी तय करने में नाकाम रही कांग्रेस ने वडोदरा से अपना उम्मीदवार बदल दिया है। सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी की चुनाव नहीं लड़ने की बात भी पार्टी ने मान ली है और लुधियाना से उनके स्थान पर रवनीत सिंह बिंट्टू को मैदान में उतारा है।

कांग्रेस ने बुधवार को 12 नामो की नई सूची जारी की है। पार्टी ने भाजपा प्रधानमंत्री पद उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को कड़ी टक्कर देने के लिए राहुल गांधी की महत्वाकांक्षी प्राइमरीज प्रक्रिया से चुने गए वडोदरा शहर अध्यक्ष का टिकट काट कर पार्टी महासचिव मधूसूदन मिस्त्री को नमो के मुकाबले उतारा है। बुधवार को सूची जारी होने के बाद मोदी के खिलाफ ताल ठोकते हुए मधूसूदन मिस्त्री ने कहा 'मुझे कब से इस दिन का इंतजार था। मैं मोदी के खिलाफ लड़ूंगा और उन्हें हराऊंगा।' कांग्रेस ने अहमदाबाद पूर्व से भाजपा के परेश रावल के मुकाबले हिम्मत सिंह पटेल को उतारा है। 

महाराष्ट्र के नांदेड़ से पार्टी ने आखिरी वक्त पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण को ही टिकट दे दिया है। नांदेड़ में नामांकन दाखिल करने का बुधवार को आखिरी दिन है। इसे देखते हुए चह्वाण ने अपनी पत्नी अमिता चह्वाण से नांदेड़ से मंगलवार को ही नामांकन दाखिल करा दिया था। मनीष तिवारी ने खराब स्वास्थ्य के चलते आलाकमान के सामने चुनाव लड़ने में असमर्थता जाहिर की थी। पार्टी ने पंजाब से एक ओर कद्दावर नेता पूर्व प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र सिंह केपी को उम्मीदवार बनाया है। उत्तर प्रदेश में पार्टी ने डुमरियागंज और चंदौली में प्रत्याशी बदले हैं। डुमरियागंज से पूर्व प्रत्याशी तरुण पटेल की जगह वसुंधरा कुमारी को उतारा है जबकि तरुण पटेल को चंदौली में पूर्व घोषित प्रत्याशी सतीश बिंद की जगह उतारा गया है।

वडोदरा से प्रत्याशी बदलना राहुल की हार: भाजपा
वडोदरा में प्रत्याशी बदले जाने पर भाजपा ने चुटकी ली। पार्टी प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने हार मान ली है। यही कारण है कि प्राइमरी माध्यम से चुने गए उम्मीदवार को इस डर से हटा दिया कि वह कमजोर है। जिसे नया प्रत्याशी बनाया गया है कि उसकी भी हार तय है, लेकिन असली हार राहुल की है। 

आरएसएस में रहे हैं मिस्त्री
वडोदरा से भाजपा प्रधानमंत्री पद उम्मीदवार का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मधूसूदन मिस्त्री कभी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का अंग हुआ करते थे। कर्नाटक की जीत के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष के बेहद करीब हो चुके मिस्त्री 1995 में शंकर सिंह वाघेला के भाजपा से बगावत कर नई पार्टी राष्ट्रीय जनता पार्टी के गठन करने के साथ भाजपा को छोड़ नई पार्टी में शामिल हो गए। बाद में वाघेला की पार्टी का विलय कांग्रेस में हो गया और मिस्त्री भी कांग्रेस पार्टी के सदस्य बन गए। 

भाजपा की नई सूची में विनोद खन्ना भी
भाजपा ने पंजाब के गुरुदासपुर से विनोद खन्ना को टिकट दिया है। खन्ना 2009 में इसी सीट से लोकसभा चुनाव हार गए थे। पार्टी ने हिमाचल के मंडी से रामस्वरूप शर्मा को मैदान में उतारा है। 

इनके अलावा पार्टी ने उत्तर प्रदेश की तीन सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। इनमें हाथरस से राजेश दिवाकर, फूलपुर से केशव मौर्य और संत कबीर नगर से शरद त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है। जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर से आरिफ मजीद पमपोरी भाजपा प्रत्याशी होंगे। इसके साथ ही पार्टी ने ओड़िशा की दो और सिक्किम की एक सीट पर उम्मीदवार का एलान कर दिया है।
अकबर बने भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता
तीन दिन पहले भाजपा में शामिल हुए वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर को पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया है। 1989 से 1991 तक बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद रहे अकबर को भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय प्रवक्ता घोषित किया। इनके साथ अरुण सिंह को ओड़िशा का प्रभारी बनाया गया है। ओड़िशा में लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव भी होने हैं। 

आप की 11वीं सूची में 11 नाम
आम आदमी पार्टी (आप) ने मंगलवार को लोकसभा उम्मीदवारों की 11वीं सूची जारी कर दी। सूची में पार्टी ने चार राज्यों के 11 प्रत्याशियों की घोषणा की है। इसके साथ ही पार्टी के लोकसभा उम्मीदवारों की संख्या 350 के करीब पहुंच गई। पार्टी ने सूची में राजस्थान के छह, महाराष्ट्र और पंजाब के दो-दो के अलावा बिहार के एक सीट पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है।

आप ने अमृतसर से डॉ. दलजीत सिंह को पार्टी का टिकट दिया है, जो भाजपा के अरुण जेटली और कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह को चुनौती देंगे। अजमेर से मौजूदा कांग्रेस सांसद और केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट के खिलाफ पार्टी ने अजय सोनामी को उतारा है। बिहार के आरा से भाजपा उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह के खिलाफ पार्टी ने डॉ. सुरेश कुमार को टिकट दिया है।

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Narendra Modi to address rally in Bulandshahr today

भाजपा नेता नरेंद्र मोदी के रैली स्थल को सुरक्षा के लिहाज से अभेद्य बनाने की तैयारियां हैं। कल गुजरात से आए बम निरोधक दस्ते और एक विशेष पुलिस टीम ने सुरक्षा के मानकों को जांचा परखा। दोपहर बाद एसपीजी ने भी सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया।

नरेंद्र मोदी निजी हेलीकाप्टर से सीधे रैली स्थल पर उतरेंगे। इसके लिए मंच से करीब 50 मीटर दूरी पर अस्थायी हैलीपैड बनाया गया है। गुजरात के बम निरोधक दस्ते और पुलिस की स्पेशल टीम की निगरानी में हैलीपैड का निर्माण कराया गया। हैलीपैड से लेकर मंच तक के इलाके को बैरिकैडिंग करके बंद कर दिया गया।

केवल वही लोग हैलीपैड तक जा सकेंगे, जिन्हें परमीशन होगी। रैली स्थल पर दो मंच बनाए गए हैं। एक मंच पर नरेंद्र मोदी, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी डॉक्टर भोला सिंह के अलावा जिलाध्यक्ष डीके शर्मा या रैली मौजूद राष्ट्रीय या राज्य स्तर के नेता होंगे। वहीं दूसरे मंच पर स्थानीय बड़े नेता मंचासीन होंगे। रैली स्थल तक जाने के लिए दो मार्ग बनाए गए हैं। एक मार्ग वीआइपी होगा, जबकि दूसरे से आम पब्लिक को प्रवेश मिलेगा। मोदी को जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त है, इसलिए मंच के आगे डी बनाई गई है। इसमें सुरक्षा अधिकारी तैनात रहेंगे।

इसके बाद स्थानीय भाजपा नेता और मीडिया के बैठने का स्थान बनाया गया है। पीछे पब्लिक को बैठने का स्थान बनाया गया है। सुरक्षा के लिहाज से गुजरात से एसआई एमआर राजपूत के नेतृत्व में बम निरोध दस्ता और गुजरात पुलिस के आईजी सुरक्षा अनिल प्रथम के नेतृत्व में दूसरी टीम बुलंदशहर आई हुई है। वहीं दूसरी ओर राज्य पुलिस के करीब डेढ़ हजार पुलिसकर्मी नरेंद्र मोदी व रैली की सुरक्षा में लगाए गए हैं।

भाजपाइयों ने झोंकी ताकत

नरेंद्र मोदी आज को सिंह गर्जना रैली को संबोधित करेंगे। इसके लिए भाजपा ने करीब 70 हजार की भीड़ जुटाने का दावा किया है। इसके लिए मोदी रथों के अलावा पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता घर-घर जाकर प्रचार कर रहे हैं। पार्टी के जिला मीडिया प्रभारी अजय त्यागी ने बताया कि 70 से 75 हजार की भीड़ पहुंचने का अनुमान है। इसके लिए व्यापक तैयारी की गई है। मंगलवार सुबह कार्यकर्ताओं ने प्रभात फेरी निकाली। सभासदों ने भी घर-घर जाकर प्रचार किया। उन्होंने बताया कि रैली की सफलता के लिए दस मोदी रथ भी उतारे गए हैं। उस पर एलसीडी के जरिये मोदी के भाषण चल रहे हैं। इसकी जिम्मेदारी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को दी गई है। मंच के आसपास की व्यवस्था भाजयुमो कार्यकर्ता संभालेंगे। भाजपा के प्रदेश महामंत्री स्वतंत्रदेव सिंह मंगलवार को ही बुलंदशहर पहुंच गए और रैली स्थल पर तैयारियों का जायजा लिया। मोदी की सभा में अन्य वरिष्ठ नेताओं में पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कल्याण सिंह मौजूद रहेंगे। प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी के आने की भी चर्चा है। पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं।

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Monday, March 24, 2014

Kalmadi will be obstacle in pune for congress

पुणे में कांग्रेस के मजबूत स्तंभ रहे सुरेश कलमाड़ी इस बार कमजोर कड़ी बन सकते हैं। शायद यही कारण है कि टिकट न मिलने की दशा में निर्दलीय ही मैदान में उतरने की लगभग घोषणा कर चुके कलमाड़ी को पटाने की कवायद शुरू हो गई है। 

करीब डेढ़ दशक से सुरेश कलमाड़ी पुणे में कांग्रेस का चेहरा रहे हैं। वह पहली बार 1996 में तब लोकसभा के लिए चुने गए थे, जब महाराष्ट्र में कांग्रेस की हालत बहुत पतली रही थी। उसके बाद 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव में भी कलमाड़ी ने ही पुणे से कांग्रेस की जीत दिलाई थी। राष्ट्रमंडल घोटाले में उनका नाम आने के बाद न सिर्फ उन्हें कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया बल्कि कुछ माह उन्हें जेल में भी गुजारने पड़े। चुनाव की घोषणा होने के बाद अब पार्टी ने उनका टिकट भी काट दिया है। कलमाड़ी को अहसास था कि इस बार उनका टिकट कट सकता है। इसलिए महीनों पहले से वह कांग्रेस आलाकमान के सामने अपनी पच्ी का नाम आगे बढ़ाने की कोशिश में लगे रहे। लेकिन आलाकमान ने उनकी यह दलील भी ठुकराते हुए इस बार पुणे से महाराष्ट्र युवक कांग्रेस अध्यक्ष विश्वजीत कदम को टिकट दे दिया। कदम के पिता पतंगराव कदम महाराष्ट्र सरकार में वरिष्ठ मंद्दी हैं। 

कांग्रेस नेताओं को अहसास है कि कलमाड़ी के बागी तेवर पार्टी को नुकसान कर सकते हैं। 1998 में कांग्रेस ने उनका टिकट काटकर विट्ठलराव तुपे को दिया था। उस समय किसी और दल ने भी अपना उम्मीदवार नहीं खड़ा किया था। तब कलमाड़ी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भी दूसरे स्थान पर रहते हुए साढ़े तीन लाख मत पाने में सफल रहे थे। टिकट पाने की रस्साकसी में कलमाड़ी ब्राह्मण कार्ड भी खेल रहे हैं। पुणे के लिए अब तक घोषित कांग्रेस एवं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के उम्मीदवार मराठा हैं। जबकि पुणे ने अब तक 14 में से 11 बार ब्राह्मणों को लोकसभा में भेजा है। लिहाजा कांग्रेस ने उन्हें मनाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार में वरिष्ठ मंद्दी हर्षव‌र्द्धन पाटिल को सौंपी है। बात नहीं बनी तो कांग्रेस के लिए इस बार पुणे जीतना मुश्किल होगा।

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Suspense starts on nagina lok sabha seat

नगीना लोकसभा सीट ने राजनीतिक दलों को भ्रम के भंवर में डाल दिया है। सपा के कब्जे से सीट निकालने के लिए बसपा और भाजपा पूरी तिकड़म भिड़ा रहे हैं। सपा अपना दबदबा बनाए रखने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। अब देखना यह है कि 17 अप्रैल को होने वाले मतदान महायज्ञ का प्रसाद किसके हिस्से में आएगा।

वर्ष 2009 में अमरोहा लोकसभा सीट से स्योहारा और धामपुर विधानसभा तथा बिजनौर लोकसभा सीट से अफजलगढ़, नगीना और नजीबाबाद काटकर नगीना लोकसभा सीट बनाई गई। स्योहारा विधानसभा को नूरपुर और अफजलगढ़ को बढ़ापुर नाम दिया गया। इस लोकसभा क्षेत्र से सपा ने यहां पर यशवीर सिंह धोबी को उतारा था और उन्होंने बसपा के आरके सिंह को शिकस्त दी थी, जबकि भाजपा और रालोद के गठबंधन के प्रत्याशी मुंशी रामपाल तीसरे नंबर पर आए थे। यशवीर सिंह को 2,34,739 तथा बसपा के आरके सिंह 1,75,056 वोट मिले। जबकि मुंशीरामपाल को 1,62,897 और कांग्रेस प्रत्याशी इसम सिंह मात्र 31,770 वोटों पर सिमट गए थे।

सपा को छोड़कर स्थिति इस बार जुदा है। मोहरे भी और राजनीतिक बिसात भी। बसपा ने इस बार पूर्व विधायक गिरीशचंद और सपा ने अपने पुराने सांसद यशवीर पर ही दांव लगाया है। कांग्रेस और रालोद ने इस सीट से खुद का पल्ला झाड़कर रणक्षेत्र गठबंधन के सहयोगी महानदल को सौंप दिया है। अब भगवानदास राठौर इस सीट से ताल ठोंक रहे हैं। आम आदमी पार्टी से सारिका चौधरी व पीस पार्टी से पूर्व सांसद शीशराम सिंह रवि समेत आधा दर्जन से अधिक दावेदार मैदान में ताल ठोक रहे हैं।

भाजपा से डा. यशवंत सिंह नामांकन करा चुके हैं, लेकिन अभी उनके प्रत्याशी बनने पर संदेह के बादल पूरी तरह छंटे नहीं हैं। इस सीट पर भाजपा के तीन दर्जन दावेदार पहले ही थे। अब पूर्व केंद्रीय मंत्री अशोक प्रधान का नाम भी अचानक चर्चा में आ गया है। सपा की निगाह मुस्लिमों के साथ ही चौहान बिरादरी पर भी है। प्रदेश सरकार में मंत्री व धामपुर विधायक मूलचंद चौहान इसी बिरादरी से हैं। बसपा दलितों के साथ ही मुस्लिमों में सेंध लगाने में जुटी है। भाजपा प्रत्याशी मोदी के नाम पर मैदान में उतर रहे हैं। अन्य दलों के प्रत्याशी भी जीत के दावे कर रहे हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि जो भी प्रत्याशी या पार्टी मतदाताओं को अपना पक्ष समझाने में सफल हो जाएगी नगीना की जीत का 'नगीना' उसी की अंगूठी में होगा।

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Chandrashekhar has changed the wind in his favour in 1980

बात 1980 की है। लोकसभा चुनाव अपने शबाब पर था। तत्कालीन जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर जब यहां प्रचार अभियान में आये तो तीन बार से लगातार कांग्रेस के सांसद रहे राजदेव सिंह को हार का सामना करना पड़ा। कारण कि नौजवान चंद्रशेखर के साथ उठ खड़ा हुआ। उस समय मुख्य मुकाबला तीन बार सांसद रहे कांग्रेस के धुरंधर राजदेव सिंह और डा.आजमी में था। बुजुर्गो का कहना है कि माहौल पूरी तरह राजदेव सिंह के पक्ष में था। चुनाव के दो दिन पूर्व तत्कालीन जनता पार्टी अध्यक्ष चंद्रशेखर यहां राजा यादवेंद्र दत्त का प्रचार करने आये तो चुनावी फिजां ही बदल गयी। परिणाम यह हुआ कि जनता पार्टी उम्मीदवार राजा यादवेंद्र दत्त और राजदेव सिंह चुनाव हार गये। यदि चंद्रशेखर यहां राजा के पक्ष में चुनाव प्रचार करने न आते तो राजदेव सिंह निश्चित रूप से चुनाव जीत जाते, क्योंकि उस समय चंद्रशेखर के आने से काफी संख्या में नौजवान एवं राजपूत मतदाता राजदेव सिंह का साथ छोड़कर राजा यादवेंद्र दत्त के पक्ष में चले गये। तत्कालीन प्रत्यक्षदर्शी बुजुर्गो का कहना है कि शुरूआती दौर में मुख्य मुकबला जनता एस के डा.आजमी और कांग्रेस के राजदेव सिंह के बीच ही रहा। बाद में लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने और राजा जौनपुर को विजयी बनाने के उद्देश्य से जब चंद्रशेखर यहां पहुंचे तो लोगों ने उन्हें हाथोंहाथ लिया और मालाओं से उन्हें ढक देने जैसी स्थिति हो गयी। तब चंद्रशेखर पैदल ही चलने लगे। भीड़ देखकर वे भी इतने उत्साहित हो गये कि जंक्शन स्टेशन से कोतवाली तक दौड़ पड़े। आगे-आगे वे दौड़ रहे थे और पीछे-पीछे भीड़ थी। इसका परिणाम यह हुआ कि तमाम वे मतदाता जो खासतौर से नौजवान एवं राजपूत राजदेव सिंह के पक्ष में लामबंद थे वे बदल गये।


उनका रुख क्या बदला चुनाव परिणाम पर भी इसका विपरीत असर पड़ा। एक ओर राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी और संसद सदस्य राजदेव सिंह थे तो दूसरी ओर नयी परिस्थितियों में राजा यादवेंद्र दत्त के बीच बड़ा जमकर संघर्ष हुआ।

चंद्रशेखर के आने के बाद राजा के वोटों में जहां काफी वृद्धि हो गयी वहीं राजदेव सिंह के वोट कम हो गये। चंद्रशेखर ने दीवानी बार में अधिवक्ताओं को भी सम्बोधित किया, बावजूद इसके राजा जीत की दहलीज तक भी नहीं पहुंच सके और हारकर तीसरे स्थान पर पहुंच गये।


उधर राजदेव सिंह भी जीतते-जीतते चंद्रशेखर के आने तथा वोटों के बिखराव के कारण चुनाव हार गये। जीत का सेहरा जनता दल एस के डा.एयू आजमी को मिला। इस चुनाव में जनता एस उम्मीदवार डा.आजमी को 128745 मत और राजदेव सिंह को 125982 मत प्राप्त हुए थे। राजदेव सिंह को महज 2763 मत से हार का सामना करना पड़ा। जनता पार्टी उम्मीदवार राजा यादवेंद्र दत्त को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा और उन्हें 84911 मत मिले। अभी तक लोग इस चुनाव की चर्चा करते हैं।

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